Fake Cancer Drugs: कर्नाटक में नकली दवाओं का अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क उजागर, तुर्किये से मंगवाए जाते थे फाइजर के लेबल
कर्नाटक में नकली दवाएं बनाने और उनकी सप्लाई करने वाले गिरोह की जांच में अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क का खुलासा हुआ है। स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) के अनुसार, गिरोह का कथित सरगना आर. प्रशांत रंजन बाबू तुर्किये से फाइजर की दवाओं के लेबल मंगवाता था। आरोपी अजरबैजान में रहकर नेटवर्क का संचालन कर रहा था। जांच एजेंसियां अब उसे भारत लाने की कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ा रही हैं।
नकली क्यूआर कोड और लेबल से तैयार होती थीं दवाओं की शीशियां
जांच में सामने आया है कि गिरोह फाइजर की दवाओं के असली पैकेजिंग लेबल और क्यूआर कोड की नकल कर नकली लेबल तैयार करता था। इन लेबल को इस तरह बनाया जाता था कि क्यूआर कोड स्कैन करने पर भी नकली होने का आसानी से पता नहीं चलता था। जांच के दौरान फाइजर के लेबल लगी करीब 10 हजार शीशियां मिलने की जानकारी सामने आई है।
छापेमारी में 5 करोड़ रुपये की नकली दवाएं बरामद
इस मामले में 18 अगस्त को बेंगलुरु के आसपास बिदादी और दोड्डेरी में छापेमारी की गई थी। कार्रवाई के दौरान करीब 5 करोड़ रुपये की नकली दवाएं, बिल, इंजेक्शन भरने वाले उपकरण और नकली लेबल बरामद किए गए थे। मामले में अब तक सात लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। जांच एजेंसियां गिरोह की सप्लाई चेन और उससे जुड़े अन्य लोगों की भूमिका का पता लगाने में जुटी हैं।
अजरबैजान से भारत लाने की तैयारी
जांच के मुताबिक, कथित सरगना प्रशांत अजरबैजान में रहकर दूर से गिरोह का संचालन कर रहा था। उसे भारत लाने के लिए जांच एजेंसियां केंद्रीय गृह मंत्रालय, विदेश मंत्रालय और सीबीआई के माध्यम से कानूनी प्रक्रिया पर काम कर रही हैं। जरूरत पड़ने पर कर्नाटक पुलिस इस मामले में इंटरपोल की मदद भी मांग सकती है।
हवाला और क्रिप्टोकरेंसी से फंडिंग की आशंका
जांच एजेंसियां गिरोह की वित्तीय गतिविधियों की भी पड़ताल कर रही हैं। शुरुआती जानकारी के अनुसार, नेटवर्क को चलाने के लिए हवाला और क्रिप्टोकरेंसी के जरिए धन का लेन-देन किए जाने की आशंका है। इस पहलू की जांच शुरू कर दी गई है, ताकि फंडिंग के स्रोत और इसमें शामिल लोगों का पता लगाया जा सके।
पहले भी सामने आ चुके हैं अंतरराष्ट्रीय कनेक्शन
नकली दवाओं की अंतरराष्ट्रीय सप्लाई का मुद्दा पहले भी जांच एजेंसियों के सामने आ चुका है। दिल्ली-एनसीआर में सामने आए नकली कैंसर दवा मामले में भी तुर्किये और चीन से जुड़े कनेक्शन की जानकारी सामने आई थी। वहीं, इंटरपोल के ऑपरेशन पांजिया में भी नकली दवाओं के निर्माण और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उनकी सप्लाई से जुड़े मामलों पर कार्रवाई की गई थी।
कर्नाटक के इस मामले में अब जांच का दायरा नकली दवाओं के निर्माण से आगे बढ़कर उनके अंतरराष्ट्रीय स्रोत, वित्तीय लेन-देन और विदेश में मौजूद कथित सरगना तक पहुंच गया है। जांच एजेंसियों की आगे की कार्रवाई से नेटवर्क के अन्य सदस्यों और इसकी सप्लाई चेन से जुड़ी जानकारियां सामने आ सकती हैं।