ईएसटीआईसी 2026 से विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को मिलेगी गति, भविष्य की तकनीकों पर जोर: जितेंद्र सिंह
नई दिल्ली, 28 अक्टूबर (आईएएनएस)। केंद्रीय राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह ने कहा कि इमर्जिंग साइंस टेक्नोलॉजी इनोवेशन कॉन्क्लेव (ईएसटीआईसी) 2026 का उद्देश्य भारत में हो रहे वैज्ञानिक अनुसंधान, स्वदेशी नवाचार और भविष्य की तकनीकों को एक मंच पर लाना है। उन्होंने कहा कि विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में किए जा रहे प्रयास विकसित भारत-2047 के लक्ष्य को हासिल करने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। कॉन्क्लेव के दौरान उन्होंने प्रदर्शनी क्षेत्र का दौरा किया और देश में विकसित हो रही तकनीकों तथा नवाचारों को प्रदर्शित करने की पहल पर चर्चा की।
जितेंद्र सिंह ने बताया कि ईएसटीआईसी की शुरुआत पिछले वर्ष ईएसटीआईसी 2025 के रूप में की गई थी और इस बार इसका दूसरा संस्करण आयोजित किया जा रहा है। तीन दिन चलने वाले इस कार्यक्रम का उद्घाटन समारोह पिछले दिन हुआ, जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हिस्सा लिया। सरकार का प्रयास है कि विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी से जुड़ी छोटी-छोटी कई बैठकों के बजाय कुछ बड़े आयोजनों पर विशेष ध्यान केंद्रित किया जाए, ताकि शोध, नवाचार और उनके व्यावहारिक उपयोग को व्यापक मंच मिल सके।
उन्होंने बताया कि ईएसटीआईसी एक गंभीर अकादमिक और वैज्ञानिक आयोजन है, जिसमें देश-विदेश के विशेषज्ञ विभिन्न क्षेत्रों से हिस्सा ले रहे हैं। इस बार कार्यक्रम में तीन नोबेल पुरस्कार विजेताओं के साथ ऐसे विशेषज्ञ भी शामिल हैं, जिन्हें उन्होंने नोबेल पुरस्कार के संभावित दावेदारों के रूप में वर्णित किया। कॉन्क्लेव में करीब एक हजार प्रतिनिधि हिस्सा ले रहे हैं। वैज्ञानिक कार्यक्रम को व्यापक विचार-विमर्श के बाद तैयार किया गया है, जिसमें भविष्य की जरूरतों और नई तकनीकों से संबंधित विषयों को शामिल किया गया है।
मंत्री ने कहा कि कॉन्क्लेव का एक प्रमुख उद्देश्य यह जानकारी सामने लाना भी है कि भारत में स्टार्टअप और नवप्रवर्तक किन क्षेत्रों में काम कर रहे हैं और उनके अनुसंधान को बाजार में उपयोगी उत्पादों और सेवाओं में बदलने की कितनी संभावनाएं हैं। देश में कई ऐसे काम हो रहे हैं जिनकी जानकारी भारतीयों को भी पर्याप्त रूप से नहीं है। ऐसे आयोजनों से इन उपलब्धियों को सामने लाने और विभिन्न हितधारकों को उनके लाभ से जोड़ने का अवसर मिलता है।
जितेंद्र सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में पिछले आठ से दस वर्षों के दौरान स्वदेशी नवाचारों को प्राथमिकता दी गई है। पहले जिन उपकरणों और तकनीकों के लिए भारत को विदेशों पर निर्भर रहना पड़ता था, उनमें से कई अब देश में ही बनाए जा रहे हैं। संबंधित मंत्रालय ने पहली बार अपने स्तर पर विकसित स्वदेशी अनुसंधान को कोलकाता से लॉन्च किया है। इसके साथ ही उन्होंने परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में स्वदेशी प्रयोगों और फास्ट ब्रीडर कार्यक्रम के दूसरे चरण तक पहुंचने का भी उल्लेख किया।
उन्होंने कहा कि इन प्रयासों को प्रदर्शित करना इसलिए जरूरी है, ताकि वैज्ञानिक उपलब्धियों की जानकारी अधिक लोगों तक पहुंचे और अनुसंधान से जुड़े संस्थानों तथा अन्य हितधारकों को सहयोग के नए अवसर मिलें।
जितेंद्र सिंह ने ईएसटीआईसी के साथ इंडिया इंटरनेशनल साइंस फेस्टिवल का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि यह चार दिन का आयोजन होता है और इसे आम नागरिकों से जोड़ने का प्रयास किया जाता है। इसमें महिलाओं, बच्चों और स्कूली विद्यार्थियों के लिए अलग-अलग गतिविधियां रखी जाती हैं। नुक्कड़ नाटकों के माध्यम से भी विज्ञान और नवाचार के प्रति जागरूकता बढ़ाने की कोशिश की जाती है। सरकार इन दोनों बड़े आयोजनों के माध्यम से वैज्ञानिक गतिविधियों को व्यापक पहचान देने और समाज के विभिन्न वर्गों को विज्ञान से जोड़ने पर ध्यान केंद्रित कर रही है।
विकसित भारत-2047 के लक्ष्य में ईएसटीआईसी की भूमिका पर मंत्री ने कहा कि देश में वैज्ञानिक और तकनीकी विकास की गति लगातार तेज हो रही है। उन्होंने जैव प्रौद्योगिकी क्षेत्र का उदाहरण देते हुए बताया कि वर्ष 2014 में भारत की बायोइकोनॉमी लगभग 10 अरब अमेरिकी डॉलर थी, जो अब बढ़कर 195 अरब अमेरिकी डॉलर हो गई है। उन्होंने अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था का आकार भी लगभग आठ से नौ अरब अमेरिकी डॉलर बताया।
जितेंद्र सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री के नेतृत्व और समर्थन से कई ऐसे नीतिगत फैसले लिए गए हैं, जिनसे नए क्षेत्रों में काम करने की संभावनाएं बढ़ी हैं। विभिन्न संस्थानों और क्षेत्रों के बीच समन्वय बढ़ने से भारत को विज्ञान, तकनीक और नवाचार के क्षेत्र में आगे बढ़ने में मदद मिल रही है।
--आईएएनएस
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