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एलन मस्क के सबसे ताकतवर रॉकेट की 14वीं टेस्ट उड़ान, फुटेज में देंखे पहली बार ऑर्बिट में जाएगा स्टारशिप

 

एलन मस्क की कंपनी स्पेसएक्स ने अपने सबसे ताकतवर रॉकेट स्टारशिप की 14वीं टेस्ट उड़ान सोमवार, 28 सितंबर को भारतीय समयानुसार शाम 6:16 बजे लॉन्च की। इस मिशन को स्टारशिप के विकास के लिहाज से अहम माना जा रहा है, क्योंकि इस बार व्हीकल को पहली बार पृथ्वी की ऑर्बिट में भेजने की योजना है। इससे पहले की टेस्ट उड़ानों को सब-ऑर्बिटल ट्रैजेक्टरी तक सीमित रखा गया था, ताकि सुरक्षा के साथ रॉकेट की तकनीक से जुड़ा अधिक से अधिक डेटा जुटाया जा सके।

पहली बार पृथ्वी की ऑर्बिट में जाएगा स्टारशिप

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इस मिशन के दौरान स्टारशिप पृथ्वी से करीब 275 किलोमीटर की ऊंचाई तक पहुंचेगा। योजना के मुताबिक यह पृथ्वी के छह चक्कर लगाएगा। मिशन के दौरान सैटेलाइट्स को भी अंतरिक्ष में छोड़ा जाएगा। इसके बाद स्टारशिप अपनी यात्रा पूरी करते हुए चिली के पास प्रशांत महासागर में पानी पर स्प्लैशडाउन करेगा। पूरे मिशन की अवधि करीब 10 घंटे बताई गई है। इस दौरान रॉकेट के अलग-अलग सिस्टम और उसकी ऑर्बिटल क्षमता का परीक्षण किया जाएगा। मिशन से हासिल होने वाले डेटा का इस्तेमाल भविष्य के स्टारशिप मिशनों को बेहतर बनाने में किया जाएगा।

क्या है स्टारशिप?

स्पेसएक्स के इस विशाल व्हीकल को दो मुख्य हिस्सों से मिलकर बनाया गया है। ऊपरी हिस्से को स्टारशिप स्पेसक्राफ्ट कहा जाता है, जबकि निचले हिस्से को सुपर हेवी बूस्टर कहा जाता है। दोनों हिस्सों को मिलाकर सामूहिक रूप से स्टारशिप कहा जाता है।स्टारशिप की ऊंचाई करीब 403 फीट यानी लगभग 123 मीटर है। इसे भविष्य में इंसानों और भारी सामान को पृथ्वी की कक्षा के साथ-साथ चंद्रमा और मंगल जैसे दूसरे खगोलीय पिंडों तक पहुंचाने के लिए विकसित किया जा रहा है। स्पेसएक्स का लक्ष्य इसे पूरी तरह से दोबारा इस्तेमाल किए जा सकने वाले अंतरिक्ष परिवहन सिस्टम के रूप में विकसित करना है।

पिछली उड़ानों में सब-ऑर्बिटल ट्रैजेक्टरी

स्टारशिप की पिछली टेस्ट उड़ानों में इसे पृथ्वी की पूरी ऑर्बिट में स्थापित नहीं किया गया था। इन मिशनों का उद्देश्य रॉकेट के इंजन, स्टेजिंग, उड़ान नियंत्रण, हीट शील्ड और दोबारा प्रवेश से जुड़े सिस्टम का परीक्षण करना था।अब 14वीं टेस्ट उड़ान में मिशन प्रोफाइल को पहले के मुकाबले अधिक आगे बढ़ाया गया है। पहली बार पृथ्वी की ऑर्बिट में जाने और कई चक्कर लगाने की योजना के कारण इस उड़ान से मिलने वाले आंकड़े स्पेसएक्स के लिए महत्वपूर्ण होंगे।

मिशन का अंतिम चरण होगा स्प्लैशडाउन

करीब 10 घंटे की यात्रा के दौरान स्टारशिप के पृथ्वी के छह चक्कर पूरे करने की योजना है। मिशन के अंतिम चरण में यह पृथ्वी के वायुमंडल में दोबारा प्रवेश करेगा और चिली के पास प्रशांत महासागर में पानी पर उतरने यानी स्प्लैशडाउन का प्रयास करेगा।स्टारशिप कार्यक्रम का अंतिम लक्ष्य एक ऐसे बड़े और पुन: उपयोग योग्य अंतरिक्षयान का विकास करना है, जिसे बार-बार अंतरिक्ष अभियानों में इस्तेमाल किया जा सके। इस टेस्ट फ्लाइट से मिलने वाले परिणाम आने वाले मिशनों की तकनीकी तैयारियों और डिजाइन में अहम भूमिका निभा सकते हैं।