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वोटर लिस्ट की गड़बड़ियां पकड़ने वाले सॉफ्टवेयर की जानकारी देने से चुनाव आयोग का इनकार, वीडियो में जाने AI के इस्तेमाल पर भी सवाल

 

चुनाव आयोग की स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) प्रक्रिया के दौरान मतदाता सूची में गड़बड़ियां पहचानने के लिए इस्तेमाल किए गए सॉफ्टवेयर को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। आयोग ने सूचना के अधिकार (RTI) के तहत मांगी गई जानकारी देने से इनकार कर दिया है। हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, आयोग ने अपने जवाब में कहा कि संबंधित जानकारी ट्रेड सीक्रेट और इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी से जुड़ी है, इसलिए इसे RTI कानून के तहत सार्वजनिक नहीं किया जा सकता।

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इस मामले में एक अहम सवाल यह भी है कि मतदाता सूची में गड़बड़ियां पहचानने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) या मशीन लर्निंग का इस्तेमाल किया गया था या नहीं। रिपोर्ट के मुताबिक, चुनाव आयोग ने अपने जवाब में इस बारे में स्पष्ट जानकारी नहीं दी। इसके बाद सॉफ्टवेयर की कार्यप्रणाली और मतदाता सूची के संशोधन में इस्तेमाल की गई तकनीक को लेकर सवाल उठने लगे हैं।

कांग्रेस ने भी इस मुद्दे पर चुनाव आयोग से सवाल किए हैं। पार्टी ने आरोप लगाया कि आयोग ECINET सॉफ्टवेयर से जुड़ी जानकारी सार्वजनिक नहीं कर रहा है। कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने सॉफ्टवेयर के विकास, AI के संभावित इस्तेमाल और डेटा सुरक्षा से जुड़े उपायों पर स्पष्टीकरण मांगा है।

ECINET और TCS को लेकर भी उठे सवाल

कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने सवाल उठाया कि ECINET सॉफ्टवेयर को टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) ने विकसित किया है, तो चुनाव आयोग ने इसकी जानकारी खुद सार्वजनिक क्यों नहीं की। उन्होंने SIR और मतदाता सूची में संशोधन के दौरान AI के इस्तेमाल तथा मतदाताओं के डेटा की सुरक्षा के लिए किए गए उपायों पर भी सवाल उठाए।

रमेश ने यह भी दावा किया कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने ECINET सॉफ्टवेयर तथा चुनाव आयोग के आईटी डिवीजन को लेकर कई आपत्तियां दर्ज कराई थीं। उनके मुताबिक, ये शिकायतें प्रधानमंत्री के अधीन आने वाले कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (DoPT) तक भी पहुंची थीं। ये आरोप कांग्रेस नेता के दावे हैं; इन्हें स्वतंत्र रूप से पुष्ट तथ्यों के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

चुनाव आयोग ने क्या सफाई दी?

हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, चुनाव आयोग ने RTI के जवाब में कहा कि SIR के लिए कोई नया सॉफ्टवेयर विकसित या खरीदा नहीं गया था। आयोग ने यह भी स्पष्ट किया कि मतदाता सूची में किसी व्यक्ति का नाम शामिल करने या हटाने का फैसला संबंधित निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी (ERO) तथ्यों और रिकॉर्ड के आधार पर करता है।

आयोग ने सॉफ्टवेयर का नाम और संस्करण बताने से इनकार किया, जबकि AI, मशीन लर्निंग और स्वचालित प्रणाली के इस्तेमाल से जुड़े सवालों पर स्पष्ट जवाब नहीं दिया। ऐसे में इस विवाद का केंद्र अब तकनीक की कार्यप्रणाली, डेटा सुरक्षा और मतदाता सूची में नाम जोड़ने या हटाने की प्रक्रिया में जवाबदेही बन गया है।

फिलहाल, आयोग के जवाब और कांग्रेस के आरोपों के बीच यह स्पष्ट होना बाकी है कि मतदाता सूची की विसंगतियां पहचानने में किन तकनीकी प्रणालियों का इस्तेमाल हुआ और वास्तविक मतदाताओं को गलत तरीके से चिह्नित होने से बचाने के लिए कौन-से सुरक्षा उपाय अपनाए गए।