अल नीनो का खतरा बढ़ा, मानसून पर पड़ सकता है असर; वीडियो में जाने राज्यों को सतर्क रहने के निर्देश
भारतीय मौसम विभाग (IMD) के बाद अब विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) ने भी वैश्विक जलवायु को लेकर चिंता जताई है। संयुक्त राष्ट्र की इस मौसम एजेंसी ने चेतावनी दी है कि प्रशांत महासागर में समुद्री जल के तेजी से गर्म होने के कारण जून से अगस्त के बीच अल नीनो विकसित होने की संभावना करीब 80 प्रतिशत है। इसके चलते दुनिया के कई हिस्सों में मौसम के पैटर्न में बदलाव देखने को मिल सकता है, जिसका असर भारत के मानसून पर भी पड़ने की आशंका है।
सामान्य से कमजोर रह सकता है मानसून
विशेषज्ञों के अनुसार, अल नीनो की स्थिति बनने पर भारत में दक्षिण-पश्चिम मानसून सामान्य से कमजोर रह सकता है। इससे कई क्षेत्रों में कम बारिश होने की संभावना बढ़ जाती है, जिसका सीधा प्रभाव कृषि उत्पादन और जल संसाधनों पर पड़ सकता है।
इसी आशंका को देखते हुए केंद्र सरकार ने राज्यों और संबंधित एजेंसियों को पहले से तैयारी करने के निर्देश दिए हैं।
कृषि मंत्रालय ने जारी किए निर्देश
कृषि मंत्रालय ने सभी राज्यों को कहा है कि सामान्य से कम मानसून और अल नीनो की संभावित परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए जिला स्तर पर आकस्मिक कार्ययोजनाएं (कंटिजेंसी प्लान) लागू की जाएं। इसका उद्देश्य किसानों को मौसम संबंधी चुनौतियों से बचाना और कृषि गतिविधियों को सुचारु बनाए रखना है।
किसानों तक तेजी से पहुंचे जानकारी
केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि मौसम संबंधी सूचनाएं किसानों तक समय पर पहुंचाना बेहद जरूरी है। इसके लिए डिजिटल प्लेटफॉर्म, मोबाइल सेवाओं और कृषि कॉल सेंटरों को और अधिक मजबूत किया जाए, ताकि किसानों को समय रहते आवश्यक सलाह और चेतावनी मिल सके।उन्होंने कहा कि बदलते मौसम के मद्देनजर किसानों को फसल चयन, सिंचाई प्रबंधन और अन्य कृषि गतिविधियों के बारे में लगातार मार्गदर्शन उपलब्ध कराया जाएगा।
क्या होता है अल नीनो?
अल नीनो एक जलवायु घटना है, जिसमें प्रशांत महासागर के मध्य और पूर्वी हिस्से का समुद्री जल सामान्य से अधिक गर्म हो जाता है। इसका प्रभाव वैश्विक मौसम प्रणाली पर पड़ता है। भारत में अल नीनो के दौरान अक्सर मानसून कमजोर पड़ जाता है, जिससे कई क्षेत्रों में वर्षा की कमी देखी जाती है।
कृषि और अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है प्रभाव
भारत की बड़ी आबादी आज भी कृषि पर निर्भर है और खेती काफी हद तक मानसूनी बारिश पर आधारित है। ऐसे में यदि अल नीनो के कारण बारिश कम होती है तो फसल उत्पादन प्रभावित हो सकता है। इससे खाद्य पदार्थों की कीमतों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर भी असर पड़ने की आशंका रहती है।मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले महीनों में प्रशांत महासागर की स्थिति पर लगातार नजर रखी जाएगी और आवश्यकतानुसार राज्यों तथा किसानों को अपडेट जारी किए जाएंगे।