NEET पेपर लीक विवाद के बीच शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा, वीडियो में देंखे जंतर-मंतर पर 36 दिन से चल रहा था छात्रों का प्रदर्शन
NEET पेपर लीक मामले को लेकर लंबे समय से चल रहे छात्र आंदोलन के बीच केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। जंतर-मंतर पर पिछले 36 दिनों से धरना दे रहे छात्रों और युवाओं की प्रमुख मांग शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की थी। आंदोलनकारियों का कहना था कि NEET पेपर लीक की जिम्मेदारी तय होने तक उनका प्रदर्शन जारी रहेगा और धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे से कम पर वह पीछे नहीं हटेंगे।
धर्मेंद्र प्रधान ने खुद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट के जरिए अपने इस्तीफे की जानकारी दी। उन्होंने एक पत्र साझा करते हुए कहा कि वह पिछले चार दशकों से अधिक समय से छात्रों, शिक्षकों और शिक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए समर्पित रहे हैं। उन्होंने अपने संदेश में देश की युवा शक्ति और शिक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने के संकल्प को दोहराया।
धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पोस्ट में लिखा, "मेरे युवा साथियों, मैं पिछले 4 दशकों से अधिक समय से छात्र, शिक्षक और शिक्षा सुधार के लिए समर्पित रहा हूं। मेरा सदैव यह विश्वास रहा है कि एक सशक्त, समावेशी और दूरदर्शी शिक्षा व्यवस्था ही सशक्त राष्ट्र की आधारशिला होती है।" उन्होंने आगे कहा कि वह देश के युवाओं की आकांक्षाओं, भावनाओं और उनकी न्यायोचित अपेक्षाओं का सम्मान करते हैं। उनके मुताबिक भारत की युवा पीढ़ी के सपनों को पूरा करना सभी के राजनीतिक और सामाजिक जीवन का नैतिक संकल्प होना चाहिए।
NEET विवाद को लेकर छात्रों में था भारी आक्रोश
NEET परीक्षा में कथित पेपर लीक और अनियमितताओं को लेकर देशभर में छात्रों के बीच नाराजगी देखने को मिली थी। दिल्ली के जंतर-मंतर पर बड़ी संख्या में छात्र और युवा लगातार प्रदर्शन कर रहे थे। प्रदर्शनकारी परीक्षा प्रक्रिया की पारदर्शिता और जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की मांग कर रहे थे। छात्र संगठनों का आरोप था कि पेपर लीक जैसी घटनाओं से लाखों मेहनती अभ्यर्थियों का भविष्य प्रभावित होता है। इसी मुद्दे को लेकर आंदोलनकारियों ने शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को जिम्मेदार ठहराते हुए उनके इस्तीफे की मांग की थी।
धर्मेंद्र प्रधान ने पीएम मोदी का जताया आभार
अपने इस्तीफे के संदेश में धर्मेंद्र प्रधान ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का भी आभार जताया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में देश की सेवा करने का अवसर मिलना उनके लिए गौरव की बात है। उन्होंने कहा कि शिक्षा क्षेत्र में सुधार, युवाओं के हित और बेहतर शिक्षा व्यवस्था के निर्माण के लिए वह लगातार प्रयास करते रहे हैं। उन्होंने शिक्षा को राष्ट्र निर्माण का सबसे महत्वपूर्ण आधार बताया।धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद अब छात्रों के आंदोलन का रुख क्या होगा, इस पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं। वहीं सरकार की ओर से शिक्षा मंत्रालय की जिम्मेदारी किसे दी जाएगी, इसे लेकर भी राजनीतिक गलियारों में चर्चाएं तेज हो गई हैं।