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ईडी की प्रॉसिक्यूशन कंप्लेंट पर कोर्ट ने लिया संज्ञान, योगेश कुमार तिवारी पर मनी लॉन्ड्रिंग का आरोप

 

प्रयागराज, 22 जनवरी (आईएएनएस)। प्रयागराज के डायरेक्टरेट ऑफ एन्फोर्समेंट (ईडी) के सब-जोनल ऑफिस ने 29 सितंबर 2025 को योगेश कुमार तिवारी के खिलाफ स्पेशल कोर्ट (सीबीआई), लखनऊ में प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (पीएमएलए), 2002 के तहत प्रॉसिक्यूशन कंप्लेंट (पीसी) दायर की थी, जिसमें उन्हें आरोपी बनाया गया था। कोर्ट ने 21 जनवरी 2026 को इस पर संज्ञान लिया।

ईडी ने प्रयागराज के झूंसी पुलिस स्टेशन में आईपीसी 1860 की विभिन्न धाराओं के तहत धोखाधड़ी, जालसाजी, आपराधिक विश्वासघात और आपराधिक धमकी के अपराधों के लिए दर्ज एफआईआर के आधार पर जांच शुरू की। यह जांच एक सोची-समझी योजना से संबंधित है, जिसके तहत आरोपी ने धोखाधड़ी से शिकायतकर्ता को विकास परियोजनाएं स्थापित करने और भविष्य में वित्तीय लाभ प्रदान करने के झूठे वादों पर कई अचल संपत्तियों को ट्रांसफर करने के लिए दबाव बनाया।

जांच में ईडी ने पाया कि योगेश तिवारी ने खुद को बड़ा बिजनेसमैन और संपत्ति डीलर बताते हुए लोगों को धोखा दिया। उसने शिकायतकर्ता को धोखा दिया और बिना उचित भुगतान किए धोखाधड़ी से पांच प्रॉपर्टी ऐसे ही हासिल की, जिनमें से तीन बाद में तीसरे पक्ष को बेच दी गईं। इसके बाद जो पैसे आए, उन्हें अपने निजी इस्तेमाल के लिए निकाल लिया। ईडी ने इस केस में लगभग 1.41 करोड़ रुपए की 'प्रॉसीड्स ऑफ क्राइम' की पहचान की।

जांच के दौरान, ईडी ने पीएमएलए, 2002 के प्रावधानों के तहत 8 नवंबर 2024 को प्रोविजनल अटैचमेंट ऑर्डर के माध्यम से 78 लाख रुपए मूल्य की अचल संपत्तियों को अस्थायी रूप से अटैच किया। उक्त अटैचमेंट की पुष्टि न्यायनिर्णायक प्राधिकरण, पीएमएलए द्वारा की गई थी।

ईडी की प्रॉसिक्यूशन कंप्लेंट में बताया गया है कि आरोपी ने जानबूझकर अपराध से कमाए गए पैसे को हासिल किया, अपने पास रखा, छिपाया और इस्तेमाल किया और उसे बेदाग संपत्ति के रूप में पेश करने की कोशिश की। ऐसे में मनी लॉन्ड्रिंग का मामला बनता है और इसे पीएमएलए की धारा 3 और 4 के तहत दंडनीय माना गया है।

मामले में अभी भी ईडी की जांच जारी है और आगे की कार्रवाई की जा रही है।

--आईएएनएस

पीआईएम/एबीएम