दुश्मन की पनडुब्बियों को ढूंढ कर उसे नष्ट कर देगा नौसेना का ‘मालवन’
नई दिल्ली, 31 मार्च (आईएएनएस)। भारत ने स्वदेशी रक्षा क्षमता के क्षेत्र में एक और बड़ी सफलता हासिल की है। मंगलवार 31 मार्च को ‘मालवन’ नामक अत्याधुनिक युद्धपोत को औपचारिक रूप से नौसेना में शामिल किया गया है।
खास बात यह है कि यह नौसैनिक जहाज कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड, कोच्चि द्वारा देश में ही निर्मित किया गया है। भारतीय नौसेना का यह आधुनिक पोत टॉरपीडो, एंटी-सबमरीन रॉकेट्स तथा अत्याधुनिक रडार और सोनार प्रणालियों से लैस है।
यही कारण है कि यह जहाज समुद्र के भीतर दुश्मन पनडुब्बियों का पता लगाने और उन्हें निष्क्रिय करने में सक्षम है। यह जहाज उथले जल क्षेत्र में बेहतरीन प्रदर्शन कर सकता है। यह भारतीय नौसेना को मिलने वाले आठ एंटी-सबमरीन युद्धक उथले जल पोतों की श्रृंखला का दूसरा जहाज है।
भारतीय नौसेना के मुताबिक यह युद्धपोत स्वदेशी तकनीक से डिजाइन और निर्मित किया गया है। युद्धपोत को भारतीय नौसेना की सभी आवश्यकताओं के अनुसार तैयार किया गया है। इसके निर्माण में अंतरराष्ट्रीय मानकों का पालन किया गया है, जिनमें डीएनवी के नियम शामिल हैं, जिससे इसकी गुणवत्ता और सुरक्षा सुनिश्चित होती है।
वहीं, युद्धपोत का नाम ‘मालवन’ महाराष्ट्र के ऐतिहासिक तटीय शहर मालवन से लिया गया है। यह क्षेत्र महान योद्धा छत्रपति शिवाजी महाराज की समृद्ध समुद्री परंपरा से जुड़ा हुआ है। इसके साथ ही यह नाम भारतीय नौसेना के एक पुराने माइंसवीपर की विरासत को भी आगे बढ़ाता है, जो वर्ष 2003 तक सेवा में रहा था।
नौसेना का मानना है कि तकनीकी दृष्टि से यह जहाज बेहद आधुनिक है। इसकी लंबाई लगभग 80 मीटर है और इसका भार करीब 1,100 टन है। इसमें वॉटरजेट प्रोपल्शन प्रणाली लगाई गई है। यह प्रणाली इस युद्धपोत को समुद्र में तेज गति और बेहतर संचालन क्षमता प्रदान करती है। गौरतलब है कि यह जहाज कई ऐसी तकनीकी क्षमताओं से लैस है जो समुद्र के भीतर दुश्मन पनडुब्बियों का पता लगाने और उन्हें निष्क्रिय करने में सक्षम हैं। बावजूद इसके यह जहाज केवल पनडुब्बी रोधी अभियानों तक सीमित नहीं है, बल्कि तटीय क्षेत्रों में निगरानी, कम तीव्रता वाले समुद्री अभियान और माइन युद्ध जैसी भूमिकाओं को भी प्रभावी ढंग से निभा सकता है।
इस युद्धपोत की एक प्रमुख विशेषता यह है कि इसमें 80 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी सामग्री का उपयोग किया गया है। यह भारत की बढ़ती रक्षा उत्पादन क्षमता और आत्मनिर्भरता को दर्शाता है। यह उपलब्धि आत्मनिर्भर भारत अभियान के लक्ष्य को मजबूत करती है और देश के सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योगों की महत्वपूर्ण भूमिका को भी उजागर करती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि ‘मालवन’ का भारतीय नौसेना में शामिल होना देश की समुद्री सुरक्षा को और सुदृढ़ करेगा तथा साथ ही साथ यह स्वदेशी रक्षा निर्माण में भारत की बढ़ती शक्ति का प्रतीक भी है।
--आईएएनएस
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