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डीआरआई ने अवैध ड्रग्स निर्यात नेटवर्क का किया भंडाफोड़, नाइजीरिया भेजी जा रही 2 लाख गोलियां जब्त; तीन गिरफ्तार

 

मुंबई, 10 अगस्त (आईएएनएस)। राजस्व खुफिया निदेशालय (डीआरआई) ने मादक दवाओं के अवैध निर्माण और अंतरराष्ट्रीय तस्करी के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए एक संगठित गिरोह का भंडाफोड़ किया है। यह गिरोह गुप्त रूप से प्रतिबंधित दवाओं का निर्माण कर उन्हें अफ्रीकी देशों में निर्यात करने में जुटा था।

खुफिया अभियान के दौरान डीआरआई ने 1 लाख ट्रामाडोल हाइड्रोक्लोराइड टैबलेट और 1 लाख टैपेंटाडोल टैबलेट जब्त की हैं। इसके साथ ही अवैध निर्माण में इस्तेमाल होने वाली मशीनें और कच्चा माल भी बरामद किया गया है। मामले में तीन प्रमुख आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है।

डीआरआई अधिकारियों ने 2 अगस्त 2026 को एक खुफिया सूचना के आधार पर मुंबई एयर कार्गो कॉम्प्लेक्स में नाइजीरिया भेजे जा रहे एक निर्यात खेप को रोका। दस्तावेजों में इस खेप को प्रेगाबालिन 300 मिग्रा कैप्सूल बताया गया था, लेकिन जांच के दौरान इसमें छिपाकर रखी गई 1 लाख ट्रामाडोल हाइड्रोक्लोराइड 250 मिग्रा टैबलेट (करीब 25 किलोग्राम) और 1 लाख टैपेंटाडोल 200 मिग्रा टैबलेट (करीब 20 किलोग्राम) बरामद हुईं।

जांच में सामने आया कि यह एक सुनियोजित नेटवर्क था, जो कई चरणों में काम कर रहा था। ट्रामाडोल की गोलियां महाराष्ट्र के अंबरनाथ स्थित एक फैक्ट्री में गुप्त रूप से बनाई जा रही थीं। पहचान छिपाने के लिए इन्हें साधारण कार्टनों में पैक किया जाता था। बाद में इन्हें मुंबई एयर कार्गो कॉम्प्लेक्स के पास एक गोदाम में ले जाकर सफेद बोरियों में दोबारा पैक किया जाता था और फिर नाइजीरिया भेजने की तैयारी की जाती थी।

इसके बाद डीआरआई ने निर्यातक, निर्माता, आपूर्तिकर्ता, परिवहनकर्ता और गोदाम से जुड़े कई ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की। निर्माण इकाई की तलाशी के दौरान टैबलेट बनाने वाली मशीनें और मन:प्रभावी पदार्थों के निर्माण में इस्तेमाल होने वाला बड़ी मात्रा में कच्चा माल बरामद किया गया।

कार्रवाई के दौरान डीआरआई ने तीन प्रमुख आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इनमें आईईसी धारक निर्यातक, सप्लायर एवं समन्वयक तथा ट्रामाडोल का अवैध निर्माता शामिल हैं।

डीआरआई के अनुसार, ट्रामाडोल और टैपेंटाडोल सिंथेटिक ओपिओइड दर्द निवारक दवाएं हैं, जिनका उपयोग चिकित्सकीय निगरानी में मध्यम से गंभीर दर्द के उपचार के लिए किया जाता है। हालांकि, इनके दुरुपयोग और लत लगने की आशंका के कारण इन पर सख्त नियामक नियंत्रण लागू हैं। ट्रामाडोल को एनडीपीएस अधिनियम, 1985 के तहत मन:प्रभावी पदार्थ (साइकोट्रोपिक सब्सटेंस) घोषित किया गया है, जबकि टैपेंटाडोल भले ही अभी एनडीपीएस अधिनियम की सूची में शामिल नहीं है, लेकिन यह औषधि एवं प्रसाधन सामग्री अधिनियम के तहत कड़े नियंत्रण में है।

अधिकारियों ने कहा कि इन दवाओं का अवैध निर्माण, भंडारण और तस्करी सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा है तथा अक्सर ऐसे मामले अंतरराष्ट्रीय संगठित ड्रग तस्करी नेटवर्क से जुड़े पाए जाते हैं।

डीआरआई का कहना है कि इस कार्रवाई के जरिए अवैध निर्माण, भंडारण, छिपाने और विदेश भेजने में शामिल एक बड़े संगठित नेटवर्क को पूरी तरह ध्वस्त कर दिया गया है।

--आईएएनएस

एएमटी/डीकेपी