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कॉलेज कैंपस में कुत्तों की एंट्री पर लगेगी रोक! UGC ने विश्वविद्यालयों से मांगी रिपोर्ट

 

देशभर के विश्वविद्यालयों और कॉलेज परिसरों में आवारा कुत्तों की बढ़ती मौजूदगी को लेकर विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) ने सख्त रुख अपनाया है। आयोग ने सभी विश्वविद्यालयों को पत्र जारी कर पूछा है कि कैंपस में कुत्तों की आवाजाही रोकने और छात्रों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए अब तक क्या कदम उठाए गए हैं।

यूजीसी के इस निर्देश के बाद उच्च शिक्षण संस्थानों को अपने-अपने परिसरों में लागू सुरक्षा व्यवस्था और आवारा कुत्तों पर नियंत्रण के लिए किए जा रहे उपायों का विस्तृत ब्योरा भेजना होगा। आयोग का उद्देश्य यह जानना है कि छात्रों, शिक्षकों और कर्मचारियों की सुरक्षा के लिए संस्थान किस तरह की व्यवस्था कर रहे हैं।

हाल के वर्षों में कई विश्वविद्यालयों और कॉलेजों से कैंपस में आवारा कुत्तों की मौजूदगी, छात्रों का पीछा करने, काटने और दुर्घटनाओं जैसी घटनाओं की शिकायतें सामने आई हैं। इन घटनाओं को देखते हुए यूजीसी ने सभी संस्थानों से इस मुद्दे को गंभीरता से लेने के लिए कहा है।

आयोग ने विश्वविद्यालयों से परिसर में कुत्तों की आवाजाही रोकने, सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने, स्थानीय निकायों के साथ समन्वय बनाने तथा आवश्यक प्रबंधन उपाय अपनाने की जानकारी मांगी है। साथ ही यह भी पूछा गया है कि इस संबंध में संस्थान ने अब तक क्या कार्रवाई की है और भविष्य के लिए उनकी क्या योजना है।

शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि विश्वविद्यालय परिसर छात्रों के लिए सुरक्षित और अनुकूल वातावरण उपलब्ध कराने के उद्देश्य से बनाए जाते हैं। ऐसे में यदि आवारा पशुओं की वजह से विद्यार्थियों को परेशानी या खतरा होता है तो संस्थानों का दायित्व है कि वे संबंधित एजेंसियों के सहयोग से प्रभावी समाधान सुनिश्चित करें।

हालांकि, पशु कल्याण से जुड़े नियमों का पालन भी उतना ही आवश्यक है। इसलिए विश्वविद्यालयों को ऐसी व्यवस्था अपनानी होगी, जिससे छात्रों की सुरक्षा और पशु कल्याण—दोनों के बीच संतुलन बना रहे। इसके लिए स्थानीय नगर निकायों, पशुपालन विभाग और अधिकृत पशु कल्याण संस्थाओं के साथ समन्वय कर मानवीय और कानूनी तरीके से समाधान लागू किया जा सकता है।

यूजीसी के इस निर्देश के बाद देशभर के विश्वविद्यालयों में कैंपस सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा तेज होने की संभावना है। अब सभी संस्थानों को आयोग के समक्ष अपनी कार्ययोजना और अब तक की गई कार्रवाई का विवरण प्रस्तुत करना होगा।