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6 साल के बच्चे के फेफड़े में फंसा चुंबक डॉक्टरों ने निकाला, लोकल वर्कशॉप में बने खास मैग्नेट से बचाई जान

 

पश्चिम बंगाल के कोलकाता मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल में डॉक्टरों ने अपनी सूझबूझ और तकनीकी कौशल से छह साल के बच्चे की जान बचा ली। बच्चे के फेफड़े में तीन दिनों से एक छोटा चुंबक फंसा हुआ था, जिससे उसकी सांस लेने की क्षमता प्रभावित हो रही थी। डॉक्टरों ने कई बार सामान्य तरीके से चुंबक निकालने की कोशिश की, लेकिन सफलता नहीं मिली। इसके बाद माणिकतला की एक स्थानीय वर्कशॉप में खास तौर पर तैयार करवाए गए चुंबक की मदद से उसे बाहर निकाला गया।

बच्चे का नाम आराफात अली है। वह उत्तर 24 परगना जिले के बादुड़िया का रहने वाला है। मंगलवार को उसकी मां उसे लगातार खांसी और सांस लेने में परेशानी की शिकायत के साथ अस्पताल लेकर पहुंची थीं। जांच के दौरान डॉक्टरों को पता चला कि बच्चे की सांस की नली से होते हुए चुंबक दाएं ब्रॉन्कस तक पहुंच गया है। यह स्थिति उसके लिए गंभीर खतरा पैदा कर रही थी।

CT स्कैन और एक्स-रे में सामने आई चुंबक की जानकारी

अस्पताल में बच्चे की जांच के लिए CT स्कैन और एक्स-रे कराया गया। रिपोर्ट में पता चला कि उसके फेफड़े में खिलौने में इस्तेमाल होने वाला ताबीज जैसे आकार का एक छोटा चुंबक फंसा हुआ है। सांस की नली के रास्ते फेफड़े तक पहुंचने के कारण चुंबक को निकालना चुनौतीपूर्ण हो गया था।डॉक्टरों के मुताबिक, फेफड़े में किसी बाहरी वस्तु का फंसना खतरनाक हो सकता है। इससे सांस लेने में रुकावट, संक्रमण और अन्य गंभीर जटिलताएं पैदा होने का जोखिम रहता है। बच्चे की स्थिति को देखते हुए डॉक्टरों ने जल्द से जल्द चुंबक निकालने का फैसला किया।

फोर्सेप्स से चार बार कोशिश, लेकिन नहीं मिली सफलता

शुरुआत में एसोसिएट प्रोफेसर दिप्तांशु मुखोपाध्याय ने फोर्सेप्स की मदद से चुंबक निकालने का प्रयास किया। उन्होंने चार बार कोशिश की, लेकिन हर बार सफलता नहीं मिली। चुंबक की स्थिति और उसकी बनावट के कारण उसे सामान्य उपकरणों से पकड़ना मुश्किल हो रहा था।इसके बाद प्रोफेसर बंद्योपाध्याय के नेतृत्व में छह डॉक्टरों की टीम ने एक अलग तरीका अपनाने का फैसला किया। टीम ने माणिकतला की स्थानीय वर्कशॉप में विशेष रूप से एक मैग्नेट तैयार करवाया। इस मैग्नेट को इस तरह बनाया गया कि वह बच्चे के फेफड़े में फंसे चुंबक को अपनी ओर खींच सके।

स्थानीय वर्कशॉप में बना मैग्नेट बना मददगार

डॉक्टरों ने विशेष रूप से तैयार किए गए मैट  इस्तेमाल किया और आखिरकार फेफड़े में फंसे चुंबक को बाहर निकालने में कामयाबी हासिल की। इस तरह तीन दिनों से फंसी वस्तु को निकालकर बच्चे को गंभीर खतरे से बचा लिया गया।इस मामले की खास बात यह रही कि चुंबक निकालने के लिए किसी महंगी मशीन के बजाय स्थानीय वर्कशॉप में तैयार किए गए विशेष उपकरण का इस्तेमाल किया गया। डॉक्टरों की टीम की यह कोशिश चिकित्सा क्षेत्र में सूझबूझ और जरूरत के मुताबिक उपकरण तैयार करने की अहमियत को दिखाती है।यह घटना बच्चों के खिलौनों को लेकर भी सावधानी बरतने की जरूरत बताती है। छोटे चुंबक या अन्य छोटी वस्तुएं खेलते समय बच्चों के मुंह या सांस की नली में जा सकती हैं। इसलिए अभिभावकों को छोटे बच्चों को ऐसे खिलौने देने से बचना चाहिए, जिनके छोटे हिस्से आसानी से अलग हो सकते हैं।