दो साल बाद अपने देश लौटना चाहती हैं शेख हसीना, इसमें कुछ गलत नहीं : पूर्व राजनयिक वीना सीकरी
नई दिल्ली, 4 अगस्त (आईएएनएस)। बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना 5 अगस्त को एक कार्यक्रम को वर्चुअल मोड में संबोधित करेंगी। हाल ही में उन्होंने ये भी कहा कि वो दिसंबर तक अपने देश लौटना चाहती हैं। उनका ये फैसला क्या सही साबित होगा? क्या भारत-बांग्लादेश के रिश्तों पर इसका कुछ असर पड़ेगा? पूर्व राजनियक और बांग्लादेश की पूर्व उच्चायुक्त वीना सीकरी ने आईएएनएस से बातचीत में तमाम संभावनाओं पर प्रकाश डाला।
बांग्लादेश में भारत की पूर्व हाई कमिश्नर वीना सीकरी ने कहा, " ठीक दो साल पहले 5 अगस्त 2024 को, पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना भारत आई थीं और तब से वह यहीं हैं। आप जानते हैं, वह बेशक भारत सरकार की सरपरस्ती में यहां रह रही हैं। काफी दिनों से वो शांत थीं लेकिन वह अपने लोगों से बात करने के लिए आजाद हैं। वो अपने लोगों से मिलती हैं, दूसरों से बात करने के लिए स्वतंत्र हैं। निकाले जाने के दो साल बाद उन्होंने अपने देश वापस लौटने की इच्छा जताई है तो इसमें गलत कुछ भी नहीं है।
सीकरी ने बांग्लादेश में 2024 के दौरान हुए छात्र आंदोलन को लेकर कहा, "जो हुआ वो छात्रों के गुस्से का नतीजा नहीं था लेकिन वो एक सत्ता को बदलने की सुनियोजित सियासत का हिस्सा था। ऐसा मैं इसलिए कह रही हूं क्योंकि अब भी बांग्लादेश की जनता खुश नहीं है। आर्थिक तौर पर वो संघर्ष कर रहे हैं, बेरोजगारों की कमी नहीं है, कोई विदेशी निवेश नहीं हो रहा है। कुल मिलाकर ऐसा कुछ भी नहीं हो रहा जिसका दावा किया गया था। ऐसे में मुझे लगता है कि शेख हसीना ने लौटने का मन बना लिया है और मुझे लगता है कि 5 अगस्त को शायद वो प्रेस कॉन्फ्रेंस में इस पर ही जोर देंगी।"
क्या शेख हसीना का भारत भूमि से वर्चुअल संबोधन द्विपक्षीय रिश्तों पर असर डाल सकता है? इस सवाल पर पूर्व राजनयिक बोलीं, "ऐसा नहीं लगता। ये कोई राजनीतिक गतिविधि नहीं है। वो अपने देश लौटना चाहती हैं। उन्हें बांग्लादेश की अदालत ने मौत की सजा भी सुना दी है। वहां उन्हें अपना पक्ष रखने का मौका भी नहीं दिया गया। यानी उनकी गैर मौजूदगी में ही सजा-ए मौत का ऐलान कर दिया गया। उनके वकील को भी अपनी बात रखने की छूट नहीं मिली। न्यायिक प्रक्रिया वैसी नहीं दिखी जैसी दिखनी चाहिए थी। तो ऐसे में वो वहां जाकर आत्मसमर्पण कर अपनी सजा के खिलाफ अपील करना चाहती हैं। ऐसे में उन्हें इजाजत दी जानी चाहिए। तो ऐसे में ये कोई राजनीतिक मसला नहीं है और मुझे नहीं लगता इससे भारत-बांग्लादेश के संबंधों में दरार आ सकती है।"
उन्होंने आगे कहा कि हसीना हमारे देश की मेहमान हैं और यहां रहने का उन्हें पूर्ण अधिकार है। वो यहां किसी राजनीतिक गतिविधि का भी हिस्सा नहीं है। वो कोई बंदी नहीं हैं, स्वतंत्र हैं और उन्हें अपनी बात रखने की आजादी पूरी है।
सीकरी के अनुसार भारत के उच्चायुक्त को लेकर भी बांग्लादेश पहले सहज नहीं था। हमारे हाई कमिश्नर कैबिनेट मंत्री रह चुके हैं और पीएम मोदी के भी खास हैं। उन लोगों ने इसका भी मुद्दा बनाया। उनके मंत्री भले कुछ भी कहते रहें लेकिन हमारी सरकार साफ कह चुकी है कि हम रिश्तों को सामान्य और सहज बनाने को लेकर प्रतिबद्ध हैं।
पूर्व राजनियक ने सर्जियो गोर के दौरे का जिक्र करते हुए कहा, " दो दिन पहले ही भारत में अमेरिका के राजदूत सर्जियो गोर बांग्लादेश जाकर अवामी लीग के नेताओं से ढाका में मिलकर आए हैं। वहां उन्होंने जमात-ए इस्लामी जैसे संगठनों से मुलाकात नहीं की। वो जातीय दल के प्रतिनिधियों से भी मिले। गोर दक्षिण एशिया और मध्य एशिया के क्षेत्रीय राजदूत भी हैं। तो मुझे नहीं लगता इसमें कोई बड़ी बात होगी। जब वो इन सबसे मिले और इसे राजनीतिक एक्ट नहीं करार दिया गया तो फिर कैसे शेख हसीना का जाना सियासी मामला हो सकता है?"
--आईएएनएस
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