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क्या सच में लाल रंग देखकर भड़क जाते हैं सांड? जानिए इसके पीछे की असली वजह

 

अक्सर फिल्मों और कहानियों में यह दिखाया जाता है कि सांड लाल रंग को देखते ही गुस्से में आ जाते हैं और हमला कर देते हैं। लेकिन हकीकत इससे बिल्कुल अलग है। वैज्ञानिक तथ्यों के अनुसार, सांड असल में लाल रंग को देख ही नहीं सकते।

दरअसल, सांड Bull की आंखों की संरचना ऐसी होती है कि वे रंगों को इंसानों की तरह पहचान नहीं पाते। वे “डाइक्रोमैटिक विज़न” वाले जानवर होते हैं, यानी उनकी आंखें सीमित रंगों को ही पहचान सकती हैं। खासतौर पर लाल और हरे रंग के बीच अंतर करना उनके लिए संभव नहीं होता। ऐसे में यह कहना कि सांड लाल रंग देखकर भड़कते हैं, पूरी तरह एक मिथक है।

तो फिर सवाल उठता है कि आखिर सांड गुस्से में क्यों आ जाते हैं? इसका जवाब है—हलचल और उत्तेजना। स्पेन में होने वाले पारंपरिक बुलफाइटिंग में मैटाडोर जो लाल कपड़ा (म्यूलेटा) इस्तेमाल करते हैं, वह असल में सांड को रंग से नहीं, बल्कि उसकी तेजी से हिलती-डुलती गति से आकर्षित करता है। जब कपड़ा तेजी से हिलाया जाता है, तो सांड उसे खतरे या चुनौती के रूप में देखता है और उसी दिशा में हमला कर देता है।

विशेषज्ञों के अनुसार, सांड स्वभाव से सतर्क और संवेदनशील होते हैं। किसी भी अचानक हरकत, तेज आवाज या उकसावे पर वे प्रतिक्रिया दे सकते हैं। ऐसे में लाल रंग की भूमिका लगभग न के बराबर होती है।

दिलचस्प बात यह है कि लाल कपड़ा परंपरा का हिस्सा है और इसका उपयोग इसलिए भी किया जाता है ताकि खून के धब्बे ज्यादा दिखाई न दें, जिससे दर्शकों पर कम असर पड़े।

यह जानकारी एक बार फिर साबित करती है कि हर सुनी-सुनाई बात सच नहीं होती। सांड का लाल रंग से भड़कना सिर्फ एक भ्रम है, जबकि असल वजह उनकी प्रतिक्रिया और आसपास की गतिविधियां होती हैं।

इसलिए अगली बार जब आप यह सुनें कि सांड लाल रंग देखकर गुस्सा हो जाता है, तो आप निश्चिंत होकर कह सकते हैं—यह सिर्फ एक मिथक है, हकीकत नहीं।