स्टालिन के एआई वीडियो बनाने के मामले में डीएमके ने टीवीके के आईटी विंग पर केस दर्ज करने की मांग की
चेन्नई, 31 अक्टूबर (आईएएनएस)। डीएमके अध्यक्ष एम.के स्टालिन के कथित एआई वीडियो को लेकर पार्टी के लीगल विंग के संयुक्त सचिव आई. परांथामेन की ओर से टीवीके के आईटी विंग के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने की मांग की गई है।
आई. परांथामेन ने 'टीवीके आईटी विंग ऑफिशियल' नाम के एक्स अकाउंट के एडमिनिस्ट्रेटर और ऑपरेटरों के खिलाफ तुरंत केस दर्ज करने की मांग की है। आरोप है कि इस अकाउंट से एक ऐसा एआई-जनित वीडियो जारी किया गया, जिसमें डीएमके अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री एम.के स्टालिन के नाम पर झूठे बयान जोड़े गए हैं।
31 अक्टूबर को दी गई अपनी शिकायत में परांथामेन ने आरोप लगाया कि यह वीडियो 30 अक्टूबर को जारी किए गए स्टालिन के एक असली वीडियो के आवाज में डिजिटल छेड़छाड़ करके बनाया गया है। इसमें ऐसा दिखाया गया है कि स्टालिन ने कुछ ऐसी बातें कही हों, जो असल रिकॉर्डिंग का हिस्सा ही नहीं थीं।
परांथामेन ने बताया कि असली वीडियो में स्टालिन ने टीवीके सरकार की राजनीतिक आलोचना की थी। इसमें महिलाओं की सुरक्षा, कानून-व्यवस्था की स्थिति और टीवीके पदाधिकारियों के गंभीर अपराधों में कथित रूप से शामिल होने जैसे मुद्दे उठाए गए थे।
परांथामेन का आरोप है कि जनता को गुमराह करने के लिए वीडियो को टीवीके आईटी विंग के एक्स अकाउंट से जारी किया गया। इस वीडियो के माध्यम से एम.के. स्टालिन की छवि खराब करने और झूठे नैरेटिव गढ़ने का डीएमके की ओर से आरोप लगाया गया है।
शिकायत में यह भी कहा गया है कि इस छेड़छाड़ किए गए वीडियो को डाउनलोड करके, दोबारा बनाकर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर फैलाया जा सकता है। जिससे स्टालिन की प्रतिष्ठा और सार्वजनिक छवि को और अधिक नुकसान पहुंच सकता है। परांथामेन ने 'भारतीय न्याय संहिता, 2023' और 'सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000' की संबंधित धाराओं के तहत केस दर्ज करने की मांग की है।
शिकायत में एक्स को निर्देश देने की मांग की गई है कि वे इस कथित छेड़छाड़ वाले वीडियो को हटा दें या उस तक पहुंच बंद कर दें। साथ ही, इससे जुड़े इलेक्ट्रॉनिक सबूतों को सुरक्षित रखने को कहा गया है, जिसमें अकाउंट की जानकारी, आईपी लॉग, मेटाडेटा, अपलोड रिकॉर्ड और वीडियो के आगे फैलने से जुड़ी जानकारी शामिल है।
परांथामेन ने पुलिस से आग्रह किया है कि वे वीडियो के मूल निर्माता और इसे एडिट करने, प्रकाशित करने तथा फैलाने में शामिल सभी लोगों की पहचान करें, और जो लोग इसके लिए जिम्मेदार पाए जाएं, उनके खिलाफ उचित कानूनी कार्रवाई करें।
--आईएएनएस
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