दिवाली पर पटाखों से होने वाले शोर और प्रदूषण पर बॉम्बे हाईकोर्ट सख्त, सरकार के कदमों पर जताई संतुष्टि
मुंबई, 27 अक्टूबर (आईएएनएस)। बॉम्बे हाईकोर्ट ने दिवाली के दौरान पटाखों से होने वाले शोर और वायु प्रदूषण को लेकर दायर स्वतः संज्ञान जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए महाराष्ट्र सरकार और प्रशासन की ओर से उठाए गए कदमों पर संतुष्टि जताई है। हालांकि, कोर्ट ने कहा कि पहले के आदेशों के पालन में देरी हुई, लेकिन अब प्रशासन ने तेजी दिखाई है।
जस्टिस जी. एस. कुलकर्णी और जस्टिस डॉ. नीला गोखले की पीठ ने 26 अक्टूबर के आदेश में यह टिप्पणी की। सुनवाई के दौरान मुंबई पुलिस कमिश्नर देवेन भारती, बीएमसी कमिश्नर अश्विनी भिडे और महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (एमपीसीबी) की ओर से हलफनामा दाखिल कर प्रदूषण और शोर पर नियंत्रण के लिए उठाए गए कदमों की जानकारी दी गई।
बीएमसी ने कोर्ट को बताया कि पर्यावरण विभाग के डिप्टी चीफ इंजीनियर अजय राणे को इस अभियान का नोडल अधिकारी बनाया गया है। 22 अक्टूबर को 'लोकसत्ता' और 'इंडियन एक्सप्रेस' में जन-जागरूकता संबंधी विज्ञापन प्रकाशित किए गए, जबकि 25 अक्टूबर से टीवी विज्ञापनों का प्रसारण शुरू किया गया है। बीएमसी के अनुसार, रेलवे स्टेशनों, बस डिपो, हाईवे और बीएमसी के पोर्टल पर भी जागरूकता के लिए होर्डिंग और डिस्प्ले लगाए गए हैं। स्कूलों में पोस्टर प्रतियोगिताओं का आयोजन किया जा रहा है और विद्यार्थियों को पर्यावरण संरक्षण की शपथ दिलाई जा रही है। बीएमसी ने बताया कि शोर से संबंधित शिकायतों के लिए हेल्पलाइन नंबर 1916 पर शिकायतें ली जा रही हैं। इन शिकायतों को सीधे पुलिस कंट्रोल रूम को भेजा जाएगा।
वहीं, महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने बताया कि केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के निर्देशों के तहत दीपावली 2026 के दौरान हवा और शोर के स्तर की विशेष निगरानी की जाएगी। इसके लिए संबंधित प्रोटोकॉल और मैनुअल तैयार किया गया है। पुलिस कमिश्नर देवेन भारती ने कोर्ट को बताया कि सभी पुलिस थानों के प्रभारियों को हाईकोर्ट के आदेशों की जानकारी दे दी गई है। बिना लाइसेंस वाले लाउडस्पीकर और सार्वजनिक सड़कों पर पटाखे फोड़ने पर प्रतिबंध लागू करने के लिए मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) तैयार करने के निर्देश भी दिए गए हैं।
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि मुंबई की 50 प्रतिशत से अधिक आबादी झुग्गी-बस्तियों में रहती है। ऐसे में इन इलाकों में जागरूकता अभियान चलाने के लिए नगरसेवकों और स्लम रिहैबिलिटेशन अथॉरिटी (एसआरए) के सीईओ को शामिल करते हुए बैठक की जानी चाहिए। कोर्ट ने सुझाव दिया कि झुग्गी-बस्तियों के प्रभावशाली लोगों के माध्यम से भी जागरूकता अभियान चलाया जाए। सेलिब्रिटी को इस अभियान से जोड़ने के मुद्दे पर कोर्ट ने कहा कि इसके लिए सरकारी खजाने से पैसे नहीं दिए जाने चाहिए। कोर्ट ने उम्मीद जताई कि फिल्मी सितारे और खिलाड़ी समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी समझते हुए स्वेच्छा से आगे आएंगे। कोर्ट ने फिलहाल प्रशासन की ओर से उठाए गए कदमों पर संतोष जताया और मामले को आगे की निगरानी के लिए सूचीबद्ध रखा।
--आईएएनएस
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