दिशा सालियान प्रकरण : बॉम्बे हाईकोर्ट में सुनवाई पूरी, फैसला सुरक्षित
मुंबई, 28 अगस्त (आईएएनएस)। दिशा सालियान की मौत के मामले में बॉम्बे हाईकोर्ट में शुक्रवार को सुनवाई पूरी हो गई है। कोर्ट ने इस मामले में एफआईआर दर्ज करने की मांग वाली याचिका पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है।
दिशा के पिता सतीश सालियान ने याचिका दायर कर दिशा के साथ बलात्कार कर हत्या करने का आरोप लगाया है और केस दर्ज करने की मांग की है।
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने दिशा के इन्क्वेस्ट पंचनामे को लेकर कई सवाल उठाए। दिशा सालियान के इन्क्वेस्ट पंचनामे में उसके शव पर कपड़े न होने के उल्लेख पर कोर्ट ने सरकारी वकील से सवाल किया। कोर्ट ने पूछा कि दिशा के शरीर पर कपड़े नहीं थे, ऐसा हॉस्पिटल के पंचनामे में उल्लेख है, फिर वो कपड़े किसने उतारे थे? उस डॉक्टर का बयान क्यों नहीं लिया गया?
इस पर सरकारी वकील ने कोर्ट में कहा कि उसके शरीर पर कपड़े न होने का पंचनामा हॉस्पिटल का है, घटनास्थल का नहीं। सरकारी वकील ने दिशा के आत्महत्या के बाद का अस्पताल का फोटो भी दिखाया और शव पर कपड़े होने वाला फोटो भी कोर्ट में पेश किया। फोटो को लेकर भी जजों ने सरकारी वकील से सवाल किए।
कोर्ट ने कहा कि इतनी ऊंचाई से गिरने पर सिर्फ मुंह से खून आया क्या? चेहरे पर ज्यादा जख्म नहीं दिख रहे हैं, बाकी कोई बड़ा जख्म नहीं दिख रहा। इस पर सरकारी वकील ने कहा कि वो ऊंचाई से गिरते समय मुंह के बल गिरी थी, स्कल फ्रैक्चर हुआ था, जबड़े में गंभीर चोट लगी थी और अन्य चोटें भी थीं।
कोर्ट ने कहा कि हमें इस मामले में अभी कोई निष्कर्ष नहीं निकालना है लेकिन इसमें शक करने जैसा वाकई कुछ है क्या, ये देखना है।
कोर्ट ने पूछा कि आप कह रहे हैं कि वो मुंह के बल गिरी, फिर इतनी ऊंचाई से गिरने पर कोई भी महत्वपूर्ण हड्डी फ्रैक्चर कैसे नहीं हुई? इस पर सरकारी वकील ने बताया कि दांत फ्रैक्चर होने की जानकारी है और हर बॉडी के गिरने पर होने वाली चोटें अलग-अलग होती हैं।
सुनवाई में 15 जनवरी 2024 में पिता द्वारा दिया गया बयान कोर्ट में पढ़ा गया। उसमें उन्होंने कहा था कि मेरी बेटी की डील कैंसल हो गई और उससे हुए आर्थिक नुकसान के कारण उसने आत्महत्या की, ऐसा मुझे लगता है। अब तक उनका बयान पांच बार दर्ज किया गया है।
सरकारी वकील ने कोर्ट को जानकारी दी कि पिता ने कहा था कि इसके अलावा मुझे कुछ नहीं कहना है। दिशा सालियान के पिता सतीश सालियान का बयान पांच बार दर्ज किया गया है। दूसरे एक मामले में सतीश सालियान का बयान दर्ज किया गया था, उसमें भी उन्होंने कोई शक जाहिर नहीं किया था। सरकारी वकील ने कोर्ट में कहा कि इस मामले में कोई अपराध नहीं बनता है और याचिका खारिज करने की मांग की।
सरकारी वकील ने कोर्ट में जानकारी दी कि मेडिकल रिपोर्ट में सेक्शुअल असॉल्ट होने की बात सामने नहीं आई है। डॉक्टरों की जांच में वैसा कुछ सामने नहीं आया है। बहुत आरोप-प्रत्यारोप हो रहे थे, इसलिए इतने समय तक जांच जारी रही।
उन्होंने बताया कि दिशा सालियान, रोहित रॉय के साथ रहती थी इसलिए उसका बयान महत्वपूर्ण है। उसने भी बयान दिया है कि दिशा बहुत डिप्रेशन में थी और उसी के चलते उसने आत्महत्या की। उसके बयान में पिता के चरित्र पर सवाल उठते हैं और इस कारण भी दिशा डिप्रेशन में थी, ऐसा उसने अपने बयान में कहा है।
सरकारी वकील ने कहा कि हमने अखबारों में विज्ञापन भी दिए थे कि अगर किसी की कोई शिकायत हो तो वो सामने आए, लेकिन कोई कभी सामने नहीं आया।
सरकारी वकील की दलील पूरी होते ही आदित्य ठाकरे के वकील की दलील शुरू हुई। आदित्य ठाकरे की ओर से सीनियर काउंसिल सुदीप पासबोला ने दलील रखी। याचिका में आदित्य ठाकरे पर केस दर्ज करने की मांग की गई है। इससे पहले भी इसी तरह की याचिका दायर की गई थी।
आदित्य ठाकरे के वकील ने कहा कि जब रशीद खान पठान ने शिकायत की तब सतीश सालियान ने कोई शिकायत नहीं की थी। सुनी-सुनाई जानकारी के आधार पर मनमाने आरोप लगाए गए जो अलग मकसद दर्शाते हैं। राजनीतिक दुश्मनी और अन्य रंजिश निकालने के लिए ये आरोप लगाए गए हैं।
सुनवाई के दौरान राणे के नाम का भी जिक्र आया। वकील ने कहा कि मेरे राजनीतिक विरोधियों ने यह करवाया है, उसमें राणे, उनके बेटे और नेशनल मीडिया का एक व्यक्ति है लेकिन यह याचिका टिकने लायक नहीं है।
वकील ने कहा कि हमें पिता के प्रति पूरी सहानुभूति है, उन्हें क्लोजर मिलना चाहिए, इस मत के हम भी हैं। हालांकि इस याचिका में जो भी मांगें की गई हैं, वो टिकने लायक नहीं हैं। यह याचिका तथ्यों पर आधारित नहीं है। मनमाने आरोप लगाकर राजनीतिक दुश्मनी साधने के लिए याचिका दायर की गई है। मेरी दिशा के पिता के प्रति पूरी संवेदना है लेकिन उनकी बेटी की मौत को लेकर जो भी राजनीति चल रही है वो बंद होनी चाहिए। इसके बाद सुनवाई खत्म हुई और बॉम्बे हाईकोर्ट ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया।
--आईएएनएस
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