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दिशा सालियान केस: कोर्ट की निगरानी में जांच की मांग को लेकर याचिका दाखिल, 18 नवंबर को सुनवाई

 

मुंबई, 2 नवंबर (आईएएनएस)। दिशा सालियान की मौत के मामले में जांच की धीमी गति और आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं होने को लेकर एक बार फिर सवाल उठाए गए हैं। इस मामले में दिशा के वकील नीलेश ओझा ने बताया कि जांच में तेजी लाने और केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) की कार्रवाई को अदालत की निगरानी में कराने के लिए किला कोर्ट में सीबीआई जज के सामने आवेदन दाखिल किया गया है। उन्होंने बताया कि इस मामले की अगली सुनवाई 18 नवंबर को निर्धारित की गई है। ओझा ने यह भी कहा कि दिशा के पिता सतीश सालियान ने देशभर के सांसदों और राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु को पत्र लिखकर इस मुद्दे को संसद के भीतर और बाहर उठाने की अपील की है।

वकील नीलेश ओझा ने कहा कि मामले की जांच में देरी और सीबीआई की धीमी गति को देखते हुए कोर्ट में आवेदन दाखिल किया गया है। उनकी मांग है कि जांच अदालत की निगरानी में कराई जाए, ताकि जांच एजेंसी को अपनी कार्रवाई और प्रगति की जानकारी अदालत को देनी पड़े। ओझा ने कहा कि इस प्रक्रिया के तहत सीबीआई को स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करनी होगी। जांच में कुछ महत्वपूर्ण कदम अब तक नहीं उठाए गए हैं। इनमें आदित्य ठाकरे की गिरफ्तारी नहीं होना और उनके पक्ष की ओर से बताए गए गवाहों के बयान दर्ज नहीं किया जाना शामिल है।

उन्होंने कहा कि यदि जांच में कोई कमी पाई जाती है, तो अदालत सीबीआई को कानून, मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) और सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों के अनुसार कार्रवाई करने का निर्देश दे सकती है। ओझा ने बताया कि इस आवेदन पर अगली तारीख 18 नवंबर तय की गई है।

ओझा ने बताया कि दिशा सालियान के पिता सतीश सालियान ने लोकसभा और राज्यसभा के सभी सांसदों के साथ-साथ राष्ट्रपति को भी पत्र भेजा है। पत्र में उनसे इस मामले को संसद के भीतर और बाहर उठाने का अनुरोध किया गया है। पत्र में सवाल किया गया है कि जब मामले में कथित सामूहिक दुष्कर्म और हत्या से जुड़े साक्ष्य मौजूद होने का दावा किया जा रहा है, तो प्रभावशाली आरोपियों की गिरफ्तारी में देरी क्यों हो रही है। उन्होंने आम नागरिकों और कथित हाई-प्रोफाइल आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की गति में अंतर होने का आरोप भी लगाया।

वकील ने दावा किया कि हाई कोर्ट के आदेश में मामले से जुड़े ऐसे तथ्य दिए गए हैं, जिन्हें उन्होंने मिनी चार्जशीट बताया। उन्होंने कहा कि उस आदेश के आधार पर करीब 30 लोगों की गिरफ्तारी हो जानी चाहिए थी। सतीश सालियान ने बाद में पेन ड्राइव, गवाहों के वीडियो में रिकॉर्ड किए गए बयान और अन्य साक्ष्य भी उपलब्ध कराए। ओझा ने दावा किया कि प्रत्यक्षदर्शियों के नाम दिए गए हैं और सीबीआई के पास 11 प्रत्यक्षदर्शी हैं, लेकिन अब तक कोई गिरफ्तारी नहीं हुई है।

ओझा ने देशभर के लोगों से सीबीआई कार्यालय तक मार्च में शामिल होने की अपील की। उन्होंने कहा कि इस मार्च के जरिए एजेंसी से सवाल किया जाएगा कि कथित साक्ष्य और गवाहों की जानकारी होने के बावजूद आदित्य ठाकरे और अन्य आरोपियों के खिलाफ गिरफ्तारी की कार्रवाई क्यों नहीं की गई। उन्होंने जांच में तेजी लाने और जवाबदेही तय करने की मांग दोहराई।

--आईएएनएस

पीएसके