दिशा सालियान केस में नए सरकारी रिकॉर्ड सामने आने का दावा, सीबीआई से कार्रवाई की मांग
मुंबई, 3 अक्टूबर (आईएएनएस)। दिशा सालियान मामले में वकील नीलेश ओझा ने दावा किया है कि उनके द्वारा एफआईआर और अदालत में दिए गए आरोपों के समर्थन में लगातार सरकारी रिकॉर्ड और नए दस्तावेज सामने आ रहे हैं। उन्होंने सीबीआई से मामले में नामजद लोगों के खिलाफ जांच तेज करने और कानून के तहत कार्रवाई की मांग की है।
नीलेश ओझा ने आईएएनएस से बातचीत में कहा कि मामले से जुड़े उनके आरोपों के समर्थन में सरकारी रिकॉर्ड सामने आ रहे हैं और उन्होंने सीबीआई को इनसे संबंधित दस्तावेज उपलब्ध कराए हैं। उन्होंने गृह विभाग से जुड़ी एक रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि 30 मार्च 2021 को जॉइन्ट सीपी क्राइम की ओर से गृह विभाग के तत्कालीन अतिरिक्त मुख्य सचिव को रिपोर्ट सौंपी गई थी। रिपोर्ट में सचिन वाजे की नियुक्ति, उनकी जिम्मेदारी और उन्हें दोबारा सेवा में लेने की प्रक्रिया से जुड़े सवालों की जांच की गई थी।
ओझा ने दावा किया कि रिपोर्ट में दिशा सालियान की मौत की तारीख का भी जिक्र है और उससे कुछ दिन पहले सचिन वाजे को क्राइम इंटेलिजेंस यूनिट में नियुक्त किए जाने की प्रक्रिया पर सवाल उठाए गए हैं। उनका आरोप है कि वाजे को निर्धारित पद और नियमों से अलग तरीके से जिम्मेदारी दी गई थी। उन्होंने यह भी दावा किया कि वाजे पहले एक मामले के बाद विभाग से बाहर किए गए थे और करीब 16 साल बाद उनकी सेवा में वापसी हुई।
वकील ने तत्कालीन पुलिस अधिकारी परमबीर सिंह के बयानों का भी हवाला दिया। उनका दावा है कि परमबीर सिंह ने सीबीआई के सामने और मीडिया में सचिन वाजे की बहाली को लेकर राजनीतिक दबाव की बात कही थी। ओझा ने कहा कि इस संबंध में उपलब्ध बयानों और दस्तावेज की सीबीआई को जांच करनी चाहिए। इन सभी दस्तावेज और बयानों को जोड़कर देखने पर मामले की जांच के लिए महत्वपूर्ण कड़ियां सामने आती हैं।
नीलेश ओझा ने कहा कि उन्होंने सीबीआई को मामले से जुड़े नए दस्तावेज और जानकारियां दी हैं। उन्होंने एजेंसी से कुछ महत्वपूर्ण लोगों के बयान दर्ज करने की मांग की है। इनमें पूर्व अधिकारी समीर वानखेड़े का नाम भी शामिल है। मामले से जुड़े कुछ अन्य लोगों के बयानों और दस्तावेज की भी जांच की जानी चाहिए। ओझा ने सीबीआई से दिशा पाटनी और शिवानी मुंदरेजा को भी आरोपी बनाए जाने की मांग की और उनके द्वारा दिए गए बयानों की जांच की जरूरत बताई।
वकील ने अपने पहले के एफआईआर और अदालत में दाखिल हलफनामे का हवाला देते हुए आदित्य ठाकरे समेत अन्य लोगों के खिलाफ लगाए गए गंभीर आरोपों की भी जांच की मांग की। उन्होंने कहा कि इन आरोपों से संबंधित जानकारी पहले भी विभिन्न एजेंसियों को दी गई है और अब नए दस्तावेजों के साथ सीबीआई के सामने मामला रखा गया है। ओझा ने एनआईए को दी गई शिकायत का भी जिक्र किया और कहा कि उसमें लगाए गए गंभीर आरोपों की भी जांच होनी चाहिए। उन्होंने सीबीआई से अनुरोध किया कि यदि जांच में आरोपों की पुष्टि होती है तो संबंधित कानूनी धाराओं के तहत कार्रवाई की जाए।
नीलेश ओझा ने कहा कि उन्होंने सीबीआई से मामले में उपलब्ध साक्ष्यों, गवाहों और दस्तावेजों के आधार पर जांच में तेजी लाने की मांग की है। उन्होंने महत्वपूर्ण गवाहों, शिकायतकर्ता और वकील को पुलिस सुरक्षा देने की भी मांग रखी। ओझा ने कहा कि उन्हें सीबीआई पर भरोसा है, लेकिन जांच में देरी को लेकर चिंता है।
--आईएएनएस
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