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दिल्ली पुलिस ने नौकरी दिलाने के नाम पर चल रहे दो फर्जी कॉल सेंटर का किया भंडाफोड़, 11 गिरफ्तार

 

नई दिल्ली, 5 अक्टूबर (आईएएनएस)। सेंट्रल डिस्ट्रिक्ट के स्पेशल स्टाफ, साइबर पुलिस स्टेशन और रंजीत नगर पुलिस ने रंजीत नगर में नौकरी दिलाने के नाम पर चल रहे दो फर्जी कॉल सेंटर का भंडाफोड़ करते हुए 11 लोगों को गिरफ्तार किया है। दोनों जगहों से पुलिस ने 13 कंप्यूटर सिस्टम और 5 मोबाइल फोन के साथ-साथ कॉलिंग सॉफ्टवेयर, नौकरी चाहने वालों का डेटा और डिजिटल, फाइनेंशियल सबूत जब्त किए गए।

पुलिस ने बताया कि 3 सितंबर को दिल्ली के रंजीत नगर में शादीपुर मेट्रो स्टेशन के पास लाल रतन बिल्डिंग से चल रहे दो संदिग्ध नकली जॉब-प्लेसमेंट, कॉलिंग सेंटरों के बारे में जानकारी मिली। इन दोनों कॉल सेंटर में बेरोजगारों से नौकरी दिलाने के नाम पर पैसे लिए जा रहे थे।

सच्चाई का पता लगाने और जरूरी कार्रवाई के लिए पुलिस की दो टीमें बनाई गईं। एक टीम में रंजीत नगर पुलिस स्टेशन और स्पेशल स्टाफ के लोग शामिल थे, जिन्होंने तकनीकी विश्लेषण और फील्ड वेरिफिकेशन के जरिए जानकारी को और पुख्ता किया। संदिग्ध नेटवर्क की तकनीकी जांच के दौरान, पता चला कि संदिग्ध जॉब-प्लेसमेंट गतिविधि से जुड़ी बहुत सारी कॉल उसी जगह से की जा रही थीं। तकनीकी जानकारी और फील्ड वेरिफिकेशन के आधार पर संदिग्ध जगह पर छापा मारा गया।

छापे के दौरान चार महिलाएं और दो पुरुष मौजूद मिले और उन्हें पूछताछ के लिए हिरासत में लिया गया। ऑफिस की अच्छी तरह से तलाशी ली गई और नौकरी चाहने वालों से संपर्क करने के लिए इस्तेमाल किए जा रहे कंप्यूटर सिस्टम, कॉलिंग एप्लिकेशन और डिजिटल सामग्री की जांच की गई।

जांच में पता चला कि नौकरी चाहने वालों के डेटा और संपर्क विवरण का इस्तेमाल संभावित उम्मीदवारों से संपर्क करने और उन्हें नौकरी के अवसर देने के लिए किया जा रहा था। उम्मीदवारों से अलग-अलग पैकेज के तहत रजिस्ट्रेशन फीस जमा करने के लिए कहा जाता था। इसके बाद कॉलर कुछ दिनों तक नौकरी और आगे की औपचारिकताओं के बारे में भरोसा दिलाकर उम्मीदवारों से संपर्क बनाए रखते थे और फिर वादा की गई नौकरी दिए बिना ही संपर्क बंद कर देते थे।

इसी दौरान, स्पेशल स्टाफ और सेंट्रल डिस्ट्रिक्ट के साइबर पुलिस स्टेशन की एक और संयुक्त टीम ने लाल रतन बिल्डिंग से चल रहे एक और संदिग्ध नकली जॉब-प्लेसमेंट कॉल सेंटर के बारे में पक्की जानकारी मिलने पर उस जगह पर भी छापा मारा।

पांच पुरुष कर्मचारी कॉलिंग क्यूबिकल्स में काम करते हुए पाए गए और उन्हें पकड़ लिया गया। जब पुलिस ने कॉर्पोरेट ऑथराइजेशन लेटर, प्लेसमेंट एग्रीमेंट या नौकरी पाने वाले असली उम्मीदवारों के रिकॉर्ड मांगे, तो कर्मचारी भर्ती की असली प्रक्रिया साबित करने वाला कोई भी वैध दस्तावेज नहीं दिखा पाए। कंप्यूटर की जांच करने पर कॉलिंग सॉफ्टवेयर और नौकरी चाहने वालों का डेटा मिला। इसके बाद, पूछताछ और आगे की कानूनी कार्रवाई के लिए उन पांचों कर्मचारियों को थाने लाया गया। इस तरह, नौकरी दिलाने वाले दो फर्जी कॉल सेंटरों से कुल 11 कर्मचारियों को पकड़ा गया।

जांच से पता चला कि दोनों कॉल सेंटरों में काम करने का तरीका एक जैसा था। नौकरी चाहने वालों का डेटा और कॉन्टैक्ट डिटेल्स ऑनलाइन जॉब-सर्च और रिक्रूटमेंट प्लेटफॉर्म से हासिल किए गए थे और उनका इस्तेमाल टारगेटेड कॉलिंग के लिए किया जाता था। ऑपरेटर रिक्रूटर बनकर उम्मीदवारों को नौकरी के आकर्षक मौके देते थे। उनका भरोसा जीतने के बाद, उन्होंने अलग-अलग पैकेज के तहत रजिस्ट्रेशन औक प्रोसेसिंग फीस की मांग की, जिसमें 3,500, 1,400 और 1,200 रुपये शामिल थे।

पैसे मिलने के बाद कॉलर ने कथित तौर पर नौकरी और आगे की औपचारिकताओं के बारे में भरोसा दिलाकर कुछ समय तक उम्मीदवारों को उलझाए रखा। इसके बाद, वादा की गई नौकरी दिए बिना ही बातचीत बंद कर दी गई।

पहले कॉल सेंटर से अर्पित, सकीना, करिश्मा, मीनाक्षी, चंचल और अशोक को पकड़ा गया। वहीं, दूसरे कॉल सेंटर से आसिम, संदीप, गौरव मलिक, ज्ञान सिंह और रोहित को गिरफ्तार किया गया। दोनों फर्जी कॉल सेंटर चलाने वाले मास्टरमाइंड की पहचान करने और उन्हें पकड़ने, नौकरी चाहने वालों के डेटा का स्रोत पता लगाने, पैसों के लेन-देन का पता लगाने, जब्त किए गए इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस की जांच और कथित फ़र्ज़ी जॉब-प्लेसमेंट ऑपरेशन से जुड़े अन्य लोगों की पहचान करने के लिए आगे की जांच चल रही है।

--आईएएनएस

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