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तिरंगा फहराना हर नागरिक का संवैधानिक अधिकार: हन्नान मोल्लाह

 

नई दिल्ली, 16 अक्टूबर (आईएएनएस)। कॉकरोच जनता पार्टी के प्रस्तावित विरोध प्रदर्शन को लेकर पोलित ब्यूरो सदस्य और ऑल इंडिया किसान सभा (एआईकेएस) के महासचिव हन्नान मोल्लाह ने केंद्र सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि तिरंगा फहराना हर नागरिक का संवैधानिक अधिकार और देशभक्तिपूर्ण अभिव्यक्ति है, लेकिन सरकार इससे डर रही है। मोल्लाह ने आरोप लगाया कि सरकार ने दिल्ली को युद्ध क्षेत्र में तब्दील कर दिया है और देश की सीमा की रक्षा करने वाली सेनाओं को युवा पीढ़ी को दबाने के लिए लगाया जा रहा है।

सीजेपी प्रोटेस्ट को लेकर पोलित ब्यूरो सदस्य और एआईकेएस के महासचिव हन्नान मोल्लाह ने कहा, "उन्होंने समय, स्थान और उद्देश्य भी घोषित कर दिया है और तिरंगा फहराना यह संवैधानिक अधिकार है और एक देशभक्तिपूर्ण अभिव्यक्ति है। लेकिन सरकार इससे डरती है। दिन-रात वे देशभक्ति, वंदे मातरम और ऐसी ही बातें चिल्लाते रहते हैं, लेकिन जब लोगों के झंडा फहराने के लोकतांत्रिक अधिकारों की बात आती है तो ये सब बातें कितनी साबित होती हैं? 50 के दशक तक उन्होंने झंडा नहीं फहराया।"

मोल्लाह ने कहा कि वे सैन्य सेनाएं देश की सीमा की रक्षा के लिए हैं। उन्हें यहां देश की युवा पीढ़ी, अगली पीढ़ी को पीटने के लिए लाया गया है।

उन्होंने कहा कि मुझे लगता है कि लोग आ रहे हैं। वे वहां पहुंचने की कोशिश करेंगे, और यह उन पर निर्भर करता है कि वे कैसे पहुंचते हैं। स्टूडेंट फेडरेशन ऑफ इंडिया उनके साथ जुड़ा था। मुझे लगता है कि यह एक बड़ा प्रदर्शन होगा। एक सत्ता परिवर्तन—दिए कि कोई सत्ता अपराधियों द्वारा निर्देशित हो, तो आप इसे कैसे सहन कर सकते हैं?

हन्नान मोल्लाह ने कहा कि सत्ता परिवर्तन अगर अपराधियों के 13 साल से उनकी सारी गतिविधियां संविधान के खिलाफ, संविधान के सिद्धांतों के खिलाफ, लोकतांत्रिक अधिकारों के खिलाफ, धर्मनिरपेक्षता के खिलाफ, और लोगों की एकता के खिलाफ रही हैं, तो एक के बाद एक हम आपको दिखा सकते हैं, और घंटे दर घंटे हम साबित कर सकते हैं कि वे देश और किसान विरोधी हैं।

हन्नान मोल्लाह ने कहा कि किसानों ने तीन काले कानूनों को वापस लेने पर मजबूर किया। उन्होंने वादा किया था कि वे हमसे बात करेंगे और अन्य समस्याओं का समाधान करेंगे।

एक अन्य सवाल का जवाब देते हुए उन्होंने कहा कि हमारा सम्मेलन 15, 16, 17, 18 नवंबर को नालगोंडा, आंध्र प्रदेश में आयोजित होगा। यह 36वां सम्मेलन है और हमारी किसान सभा देश का सबसे पुराना और सबसे बड़ा किसान संगठन है। अब हम अपने संगठन की 90वीं वर्षगांठ मना रहे हैं। सबसे पहले यह संगठन 1936 में बना था। हमने स्वतंत्रता के लिए लड़ाई लड़ी और फिर हमने किसानों के अधिकारों के लिए लड़ाई लड़ी तो यह 36वां सम्मेलन है। हमने पहले ही 35 सम्मेलन पूरे कर लिए हैं।

उन्होंने कहा कि तो उस सम्मेलन में हम किसानों की समस्या, सरकार के धोखे और आने वाले दिनों में हम अपने संघर्ष को कैसे तेज कर सकते हैं, इस पर चर्चा करेंगे। हम उस पर चर्चा करेंगे और हम अपने संगठन को मजबूत करेंगे क्योंकि संगठन के बिना कोई लड़ाई नहीं हो सकती। हमारा संगठन भारत के 525 जिलों में फैला हुआ है।

उन्होंने कहा कि 525 जिलों में किसान सभा काम कर रही है, उनकी इकाइयां और समितियां हैं। आने वाले दिनों में हम इसे उन क्षेत्रों में और फैलाने की कोशिश करेंगे जहां हम अभी तक नहीं पहुंचे हैं। तो सम्मेलन में हमारी नीति, हमारी राजनीति और हमारे संगठनात्मक पहलुओं पर चर्चा होगी।

--आईएएनएस

केके/डीकेपी