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धर्मांतरण के मामलों की निष्पक्ष जांच हो, इस्लाम जबरन धर्म परिवर्तन की इजाजत नहीं देता: शिया धर्मगुरु

 

लखनऊ, 11 जून (आईएएनएस)। उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने केजीएमयू और एसजीपीजीआई से जुड़े कथित धर्मांतरण मामलों का संज्ञान लिया है। हर डेंटल और मेडिकल कॉलेज में धर्मांतरण रोकथाम केंद्र बनाए जाने के आदेश पर मुस्लिम समुदाय से जुड़े लोगों की प्रतिक्रियाएं आ रही हैं।

शिया धर्मगुरु सैयद सैफ अब्बास ने आईएएनएस से बातचीत में कहा कि इस्लाम जबरन धर्मांतरण की निंदा करता है। शिक्षण संस्थानों में धर्मांतरण की बातें सामने आ रही हैं। इसमें यह देखा जाना चाहिए कि पहले दोस्ती होती है, फिर जब दोस्ती बिगड़ती है तो सीधे धर्मांतरण का आरोप लगा दिया जाता है।

उन्होंने कहा कि अगर राज्यपाल ने शैक्षणिक संस्थानों में गड़बड़ियों और खराबियों को रोकने के लिए कोई कानून या जांच के लिए समिति बनाई है तो इसमें कोई ऐतराज नहीं है। कोई समिति बने, वह इस बात पर गंभीरता से जांच करे कि क्या यह मामला वाकई धर्मांतरण का ही है या कुछ और है।

शिया धर्मगुरु सैयद सैफ अब्बास ने धर्मांतरण और लव जिहाद के मामले पर कहा कि एक शख्स की शादी 20 साल पहले हुई थी। अब महिला कह रही है कि मुझे नहीं पता था कि लड़का मुसलमान है। दोस्ती, शादी सब हो जाता है, लेकिन जब समझ या किसी अन्य कारण से कोई विवाद होता है तो धर्मांतरण का आरोप लगा दिया जाता है।

उन्होंने कहा कि कोई भी मुसलमान किसी का जबरन धर्म परिवर्तन नहीं करवा सकता। अगर करवाता भी है तो यह निंदनीय और गलत है। इस मामले की जांच होनी चाहिए।

वहीं शिया धर्मगुरु यासूब अब्बास ने कहा कि अगर राज्यपाल इतने बड़े सूबे को देखते हुए कोई कदम उठाती हैं तो उसमें कोई गलत नहीं है। धर्मांतरण के कई मामले सामने आ रहे हैं। जबरन धर्म परिवर्तन कराने के लिए कोई धर्म नहीं कहता है। इस्लाम कहता है कि दीन में कोई जबरदस्ती नहीं है, अगर जबरदस्ती होती है तो वहां मजहब नहीं होता।

उन्होंने कहा कि धर्मांतरण के बढ़ते मामलों को देखते हुए अगर कोई कदम उठाए जाते हैं तो इसमें कुछ भी गलत नहीं है।

--आईएएनएस

एएमटी/वीसी