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धारा-370 से लेकर यूपीआई तक, भारत ने दुनिया को दिखाया अपना सामर्थ्य : स्वामी अवधेशानंद गिरी

 

मुरैना, 10 फरवरी (आईएएनएस)। महामंडलेश्वर स्वामी अवधेशानंद गिरी जी महाराज हाल ही में मुरैना पहुंचे। इस दौरान उन्होंने आईएएनएस से बातचीत की और देश की वर्तमान स्थिति पर अपनी राय रखी। उन्होंने भारत को हिंदू राष्ट्र बताते हुए कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर बात करते हुए कहा कि भारत अब पहले से कहीं ज्यादा मजबूत और समृद्ध राष्ट्र हो गया है।

उन्होंने कहा, "यूजीसी गाइडलाइंस पर उच्चतम न्यायालय ने संज्ञान लिया है और हमारी सरकार भी चाहती है कि उस पर संशोधन हो। मुझे लगता है कि जल्द ही उस पर संशोधन प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी। केंद्र सरकार इस चीज के लिए प्रतिबद्ध है। पिछले कुछ दिनों में, नई, अभूतपूर्व, अकल्पनीय और अविश्वसनीय चीजें हुई हैं। कश्मीर से धारा-370 हटने के बाद स्थिति पूरी तरह से बदल गई है। पहले लाल चौक पर तिरंगा फहराना मुश्किल था। डल झील से हजारों झंडे हटाए गए थे, लेकिन अब सिर्फ 5,000 बहनों ने वहां झंडा फहराया। आज भारत की आर्थिक ताकत और क्षमताएं बहुत आगे हैं। आज भारत की गिनती चौथी आर्थिक शक्ति में होती है।"

उन्होंने कहा कि आने वाले समय में भारत तीसरे नंबर की अर्थव्यवस्था बन जाएगा। मैं एक और बात कहना चाहता हूं कि शांति का माहौल बना है। कोई दंगा नहीं हुआ, कहीं हिंसा नहीं हुई और कोई सांस्कृतिक उथल-पुथल नहीं आई। ट्रिपल तलाक खत्म करने से मुस्लिम बहनों का सम्मान बढ़ा। महामारी के समय सरकार ने आगे बढ़कर कई योजनाएं शुरू कीं।

उन्होंने कहा, "अमेरिका, यूरोप, फ्रांस और सिंगापुर जैसे विकसित देशों में भी अभी तक ऑनलाइन पेमेंट भारत से पीछे है। यूरोपीय देशों में, यूपीआई पेमेंट की बहुत तारीफ हो रही है।

स्वामी जी ने स्पष्ट किया कि वे कोई सरकारी प्रवक्ता नहीं हैं, लेकिन भारत सरकार शांतिपूर्ण समाज और सामाजिक खुशहाली के लिए काम कर रही है। इसी के साथ ही, उन्होंने सभी जातियों को बराबर कहा। उन्होंने कहा, "आज के समय में सभी जातियां समान हैं और सभी का सम्मान होना चाहिए। हम किसी भी जाति के हों, लेकिन हम सब हिंदू हैं। हमें इस पर गर्व होना चाहिए। हिंदू बहुत आगे निकल गए हैं। योग और आयुर्वेद के रूप में हिंदू मूल्य पूरी दुनिया में फैल रहे हैं। मुस्लिम देशों में भी लोग योग कर रहे हैं। दुनिया भर में आयुर्वेद का सम्मान है। भारत में तीन तरह के लोग रहते हैं- हिंदू, वे जिनके पूर्वज हिंदू थे, और वे जिन्हें याद है कि वे हिंदू हैं।"

--आईएएनएस

एनएस/एबीएम