देव संस्कृति विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में पहुंचे जूना पीठाधीश्वर, बोले– सनातन परंपरा एक महान आंदोलन
हरिद्वार, 20 जनवरी (आईएएनएस)। अखिल विश्व गायत्री परिवार, शांतिकुंज के शताब्दी समारोह के तहत दूसरे दिन देव संस्कृति विश्वविद्यालय का दीक्षांत समारोह बड़े ही गरिमामय माहौल में आयोजित किया गया। इस खास मौके पर जूना पीठाधीश्वर आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी अवधेशानंद गिरि मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद रहे। उन्होंने मंच से विद्यार्थियों को गोल्ड मेडल और डिग्री प्रदान कर उनका उत्साह बढ़ाया।
दीक्षांत समारोह में कुल 1160 विद्यार्थियों को डिग्री दी गई। इनमें गोल्ड मेडल प्राप्त करने वाले छात्र-छात्राओं के साथ-साथ अलग-अलग विषयों में डिग्री हासिल करने वाले विद्यार्थी भी शामिल थे। समारोह के दौरान पूरा परिसर तालियों की गड़गड़ाहट और उत्साह से गूंज उठा। विद्यार्थियों और उनके अभिभावकों के चेहरे पर खुशी साफ दिखाई दे रही थी।
समारोह के बाद मीडिया से बातचीत करते हुए स्वामी अवधेशानंद गिरि ने सनातन परंपरा और गायत्री परिवार की भूमिका पर बात की। उन्होंने कहा कि सनातन परंपरा कोई छोटी बात नहीं, बल्कि यह एक महान आंदोलन है। गायत्री परिवार ने हमेशा समाज को समानता का संदेश दिया है।
उन्होंने कहा कि गायत्री परिवार का साफ संदेश रहा है कि पुरुष और महिलाएं बराबर हैं, सभी जातियां बराबर हैं और हर जाति महान है। हर इंसान भगवान की संतान है और किसी में कोई भेदभाव नहीं होना चाहिए।
स्वामी अवधेशानंद गिरि ने आगे कहा कि भारतीय संस्कृति की सबसे बड़ी खूबी यही है कि हम सब एक हैं। हम सभी में एक ही ब्रह्म है और हम सभी एक ही भगवान की संतान हैं। यही सोच भारत को दुनिया से अलग और महान बनाती है। उन्होंने कहा कि गायत्री परिवार ने समाज में एक रचनात्मक और सकारात्मक आंदोलन चलाया है, जो सिर्फ एक बार का नहीं बल्कि लगातार चलने वाला अभियान है।
इस दौरान सनातन धर्म से जुड़े पवित्र स्थलों पर मुस्लिमों की एंट्री को लेकर चल रहे विवाद पर भी उन्होंने अपनी राय रखी। उन्होंने कहा कि किसी भी तीर्थ स्थल की पवित्रता और सुरक्षा बनाए रखना सबसे बड़ी प्राथमिकता होनी चाहिए। तीर्थ स्थल सिर्फ धार्मिक जगह नहीं होते, बल्कि आस्था, परंपरा और संस्कृति के केंद्र होते हैं, इसलिए वहां अनुशासन और मर्यादा का पालन बेहद जरूरी है।
--आईएएनएस
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