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देश बाबा साहेब के संविधान से चलेगा, विपक्ष अराजकता फैला रहा है : भाजपा प्रवक्ता गुरु प्रकाश

 

पटना, 29 अक्टूबर (आईएएनएस)। भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता गुरु प्रकाश ने विभिन्न राजनीतिक मुद्दों पर विपक्षी दलों को निशाने पर लिया। उन्होंने एमएलसी चुनावों के नतीजों पर कहा कि देश का जनादेश भाजपा और एनडीए के साथ मजबूती से खड़ा है। उन्होंने चुनावी हार-जीत को लोकतंत्र का हिस्सा बताते हुए जनता के फैसले को सर्वोपरि बताया।

मल्लिकार्जुन खड़गे के आवास पर आयोजित 'मॉक पार्लियामेंट' पर गुरु प्रकाश ने कहा कि विपक्षी नेता इस तरह के आयोजन करके मजाक कर रहे हैं। सर्वोच्च न्यायालय में स्थिति स्पष्ट हो चुकी है और विपक्ष की ओर से उठाए गए सवालों के जवाब सामने आ चुके हैं। उन्होंने मतदाता सूची से संबंधित आंकड़ों का उल्लेख करते हुए कहा कि 13 करोड़ नामों के गायब होने की बात कही जा रही है, जबकि इन आंकड़ों का कई बार वर्गीकरण सामने आ चुका है। दो करोड़ 80 लाख मतदाता मृत पाए गए और पांच करोड़ से अधिक लोगों के पते बदल चुके हैं, जबकि बाकी लोगों का पता नहीं चल पाया है।

गुरु प्रकाश ने कहा कि जो लोग भारत के नागरिक नहीं हैं, उन्हें मतदाता सूची में शामिल नहीं किया जा सकता। उन्होंने कांग्रेस पर संविधान विरोधी मानसिकता के साथ काम करने का आरोप लगाया। बाबा साहेब आंबेडकर के 'ग्रामर ऑफ एनार्की' यानी अराजकता के व्याकरण का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि विपक्ष की राजनीति इसी तरह की अराजकता पर आधारित है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि देश बाबा साहेब आंबेडकर के संविधान के अनुसार ही चलेगा, न कि पुरानी और दकियानूसी सोच के आधार पर।

कर्नाटक के मंत्री जारकीहोली की एसआईआर के तहत मतदाता सूची से नाम हटाए जाने को लेकर की गई टिप्पणी पर गुरु प्रकाश ने कहा कि एसआईआर पूरी तरह संवैधानिक तरीके से हुई है और इसमें कोई समस्या नहीं है। कांग्रेस में जमीन से जुड़े और संवैधानिक आदर्शों में विश्वास रखने वाले नेताओं को इस प्रक्रिया की समझ है। उन्होंने राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए उन्हें 'हवा-हवाई नेता' बताया। उन्होंने कांग्रेस के भीतर वर्चस्व की लड़ाई होने का दावा किया और कहा कि रेहान वाड्रा के राजनीतिक रूप से चर्चा में आने के बाद राहुल गांधी अपनी प्रासंगिकता बनाए रखने के लिए अलग-अलग मुद्दे उठा रहे हैं। देशभर में विधान परिषद के स्नातक, शिक्षक और स्थानीय निकायों के चुनावों के परिणाम कांग्रेस की स्थिति स्पष्ट करते हैं। उन्होंने दावा किया कि जनता का समर्थन बीजेपी और एनडीए के साथ है।

एक नवंबर की रैली के लिए विपक्ष और सीजेपी की एकजुटता को लेकर गुरु प्रकाश ने आरोप लगाया कि शुरुआत में इस समूह की ओर से खुद को गैर-राजनीतिक बताया जा रहा था, लेकिन अब उसकी मंशा स्पष्ट हो गई है। उन्होंने कहा कि ये लोग आम आदमी पार्टी के छात्र संगठन से जुड़े हैं और अराजकतावादी राजनीति करते हैं। समूह से जुड़े लोगों की पुरानी तस्वीरें देखने पर उनकी राजनीतिक संबद्धता सामने आ जाएगी।

गुरु प्रकाश ने नेहा बोरा और शरजील इमाम का जिक्र करते हुए कहा कि नेहा बोरा की ओर से शरजील इमाम को बाहर करने की बात कही जाती है, जबकि शरजील इमाम भारतीय संविधान को केवल एक दस्तावेज बताते हैं। उन्होंने राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा पर भी निशाना साधते हुए सवाल उठाया कि यदि वे नेहा बोरा को नेता बनाते हैं, तो राहुल गांधी और शरजील इमाम के बीच संबंधों को लेकर क्या संदेश जाता है। इन मुद्दों पर जनता के सामने स्थिति स्पष्ट हो जाएगी।

एमएलसी चुनाव के नतीजों पर भाजपा प्रवक्ता ने कहा कि राजनीति में जीत और हार लगी रहती है। उन्होंने बांकीपुर विधानसभा में मिली हार का उल्लेख करते हुए कहा कि भाजपा ने उस पराजय को विनम्रता से स्वीकार किया था। अटल बिहारी वाजपेयी के विचारों का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि हार मिलने पर आत्ममंथन करना चाहिए और जीतने वालों को विनम्र रहना चाहिए।

दरभंगा ग्रेजुएट निर्वाचन क्षेत्र में आरजेडी की जीत पर गुरु प्रकाश ने कहा कि वहां बैलेट से चुनाव हुआ और आरजेडी को जीत मिली, लेकिन उन्होंने अन्य राज्यों में हुए चुनावों का हवाला देते हुए पूछा कि कुल कितने चुनाव हुए और उनमें विपक्षी दलों का प्रदर्शन कैसा रहा। उन्होंने बैलेट और बुलेट का उल्लेख करते हुए आरजेडी पर निशाना साधा। गुरु प्रकाश ने आरोप लगाया कि लालू यादव के शासनकाल में चुनावी प्रक्रिया के दौरान दलितों, वंचितों, पीड़ितों और शोषितों को मतदान के अधिकार से वंचित होना पड़ता था। क्या विपक्ष उसी दौर की राजनीति वापस लाना चाहता है?

भाजपा प्रवक्ता ने कहा कि देश आगे बढ़ चुका है और चुनावी पारदर्शिता को लेकर लोगों का भरोसा कायम है। उन्होंने आरजेडी की जीत स्वीकार करते हुए कहा कि चुनाव में जीतने वालों की तरह हारने वालों में भी परिणाम स्वीकार करने की क्षमता होनी चाहिए। किसी एक चुनाव में जीत के आधार पर व्यापक राजनीतिक निष्कर्ष निकालना उचित नहीं है।

--आईएएनएस

पीएसके/एबीएम