×

डेंगू, मलेरिया और स्वाइन फ्लू से निपटने के लिए प्रयागराज में तैयारी पूरी, डॉक्टर ने बताए बचाव के आसान तरीके

 

प्रयागराज, 29 अगस्त (आईएएनएस)। उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में डेंगू, मलेरिया और फ्लू जैसे मौसमी संक्रमणों को लेकर जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग ने तैयारियां तेज कर दी हैं। तेज बहादुर सप्रू अस्पताल के वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. मंसूर अहमद ने बताया कि अस्पतालों में मरीजों की जांच और इलाज के लिए जरूरी इंतजाम किए गए हैं। डेंगू के मरीजों के लिए अलग वार्ड, दवाएं और जांच की सुविधाएं उपलब्ध हैं। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे लक्षणों को नजरअंदाज न करें और समय रहते डॉक्टर से सलाह लें।

डॉ. मंसूर अहमद ने स्वाइन फ्लू को लेकर बताया कि यह संक्रमण हवा के जरिए फैल सकता है। संक्रमित व्यक्ति के खांसने या छींकने पर निकलने वाली बूंदों के संपर्क में आने से संक्रमण दूसरे लोगों तक पहुंच सकता है। खासकर सार्वजनिक जगहों पर बिना सावधानी के खांसना या छींकना संक्रमण फैलने का कारण बन सकता है।

उन्होंने कहा कि अगर किसी व्यक्ति को बुखार के साथ खांसी और जुकाम है तो बेहतर होगा कि वह मास्क लगाए। सार्वजनिक स्थानों पर छींकते या खांसते समय रुमाल, टिश्यू या मास्क का इस्तेमाल करना चाहिए। इससे आसपास मौजूद लोगों तक संक्रमण पहुंचने की संभावना कम की जा सकती है।

डॉक्टर के मुताबिक वायरल संक्रमण के दौरान आराम और पर्याप्त पानी पीना बेहद जरूरी है। शरीर की प्रतिरोधक क्षमता को बेहतर रखना भी मददगार हो सकता है। उन्होंने बताया कि वायरल फीवर के कई मामले समय के साथ खुद ठीक हो जाते हैं और मरीज को मुख्य रूप से लक्षणों के आधार पर उपचार दिया जाता है। बुखार में डॉक्टर की सलाह के अनुसार पेरासिटामोल और जरूरत के मुताबिक अन्य दवाएं दी जा सकती हैं।

उन्होंने एंटीबायोटिक के इस्तेमाल को लेकर भी सावधानी बरतने की सलाह दी। उनका कहना है कि हर वायरल संक्रमण में एंटीबायोटिक की जरूरत नहीं होती। अगर मरीज में सेकेंडरी बैक्टीरियल इंफेक्शन की आशंका हो, तभी डॉक्टर की सलाह से एंटीबायोटिक दी जाती है। बिना जरूरत एंटीबायोटिक लेने से बचना चाहिए।

उन्होंने बताया कि उनकी ओपीडी में रोजाना करीब 150 से 200 मरीज आते हैं। इनमें लगभग 10 से 12 मरीज बुखार, जुकाम और खांसी जैसे लक्षणों के साथ आते हैं। कुछ मरीजों में बुखार के साथ शरीर और जोड़ों में दर्द की शिकायत भी होती है। ऐसे मामलों में डॉक्टर केवल लक्षणों के आधार पर निष्कर्ष नहीं निकालते, बल्कि अलग-अलग संभावित कारणों को ध्यान में रखते हुए जांच कराते हैं।

डॉ. मंसूर अहमद ने डेंगू के लक्षणों के बारे में बताया कि इसमें तेज बुखार के साथ शरीर पर चकत्ते, आंखों के पीछे दर्द, सिर में भारीपन, जी मिचलाना, उल्टी, अत्यधिक कमजोरी और जोड़ों में दर्द हो सकता है। अगर बीमारी गंभीर रूप लेती है तो मरीज की स्थिति तेजी से बिगड़ सकती है।

गंभीर डेंगू में मरीज को चक्कर आने, ब्लड प्रेशर गिरने और शरीर के अंदर या बाहर रक्तस्राव जैसी समस्याएं हो सकती हैं। ऐसे संकेत दिखाई दें तो मरीज को तुरंत अस्पताल ले जाना चाहिए। गंभीर मरीजों को भर्ती कर उनकी लगातार निगरानी और जरूरी उपचार किया जाता है, जबकि स्थिर मरीजों का इलाज डॉक्टर की सलाह के अनुसार ओपीडी में भी किया जा सकता है।

डेंगू से बचने के लिए उन्होंने कहा कि घर और आसपास पानी जमा न होने दें। डेंगू फैलाने वाला मच्छर साफ पानी में भी पनप सकता है और आमतौर पर दिन में काटता है। इसलिए घर में रखे कूलर, पुराने टायर, गमले, बर्तन या ऐसी कोई भी जगह जहां पानी जमा हो सकता है, उसकी नियमित सफाई करनी चाहिए।

उन्होंने सलाह दी कि सप्ताह में कम से कम एक दिन घर की अच्छी तरह सफाई करें और पानी जमा होने वाली जगहों को खाली करें। पूरे शरीर को ढकने वाले कपड़े पहनना और मच्छरदानी का इस्तेमाल करना भी बचाव में मदद कर सकता है।

--आईएएनएस

पीआईएम/एएस