दिल्ली: सत्य निकेतन हादसे के विरोध में एबीवीपी की न्याय यात्रा, छात्रों के लिए सुरक्षित आवास की मांग
नई दिल्ली, 8 सितंबर (आईएएनएस)। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के सत्य निकेतन में पीजी भवन गिरने की घटना के विरोध में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) ने दिल्ली विश्वविद्यालय के नॉर्थ कैंपस में 'न्याय यात्रा' का आयोजन किया। संगठन ने घटना में जान गंवाने वाले छात्रों के लिए न्याय और राजधानी में छात्रों के आवास की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग उठाई।
घटना के दो दिन बाद भी सत्य निकेतन हादसे को लेकर छात्रों और आम लोगों में चिंता बनी हुई है। इस घटना ने राजधानी में निर्माण कार्यों के दौरान सुरक्षा मानकों, पीजी और हॉस्टल की स्थिति तथा छात्रों की सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े किए हैं। एबीवीपी ने प्रशासन से ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए ठोस कदम उठाने की मांग की।
एबीवीपी ने मांग की कि पीजी और हॉस्टल के सुरक्षा ऑडिट की रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए। संगठन का कहना है कि यदि रिपोर्ट सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध होगी, तो छात्रों को आवास चुनते समय यह जानकारी मिल सकेगी कि संबंधित भवन सुरक्षा मानकों पर कितना खरा उतरता है।
एबीवीपी दिल्ली के एसएफएस सह-संयोजक यश डबास ने कहा कि सत्य निकेतन में पीजी भवन गिरने की घटना में छात्रों की जान गई है। इसी के विरोध में संगठन की ओर से न्याय यात्रा निकाली जा रही है। आंदोलन का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि भविष्य में किसी अन्य छात्र को ऐसी घटना का सामना न करना पड़े। दिल्ली में छात्रों के लिए पीजी और हॉस्टल बड़ी संख्या में आवास का माध्यम हैं, लेकिन इनकी सुरक्षा को लेकर नियमित जांच जरूरी है। उन्होंने मांग की कि सभी पीजी और हॉस्टल का अनिवार्य रूप से सुरक्षा ऑडिट कराया जाए।
यश डबास ने कहा कि छात्रों को केवल कम किराए या सुविधाओं के आधार पर आवास चुनने के लिए मजबूर नहीं होना चाहिए, बल्कि उन्हें भवन की सुरक्षा की जानकारी भी उपलब्ध होनी चाहिए। इसके लिए प्रशासन को पारदर्शी व्यवस्था बनाने की जरूरत है। साथ ही, हर छात्र को सुरक्षित हॉस्टल उपलब्ध कराने की दिशा में काम होना चाहिए। जब तक पर्याप्त हॉस्टल नहीं बनते, तब तक निजी पीजी और अन्य छात्र आवासों की सुरक्षा सुनिश्चित करना भी प्रशासन की जिम्मेदारी है।
एबीवीपी ने दिल्ली विश्वविद्यालय के छात्रों के लिए पर्याप्त हॉस्टल उपलब्ध कराने की मांग भी उठाई। संगठन ने दावा किया कि मौजूदा समय में विश्वविद्यालय में हॉस्टल की संख्या सीमित है, जिसके कारण बड़ी संख्या में छात्रों को निजी पीजी और अन्य किराये के आवासों पर निर्भर रहना पड़ता है। संगठन ने यह भी मांग की कि सभी छात्रावासों और पीजी की नियमित सुरक्षा जांच हो तथा सुरक्षा मानकों का पालन नहीं करने वाले भवनों पर समय रहते कार्रवाई की जाए। केवल किसी हादसे के बाद कार्रवाई करने के बजाय पहले से सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित की जानी चाहिए।
--आईएएनएस
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