☰
×

दिल्ली में राहुल गांधी की रैली से हमें दिक्कत नहीं पर समय गलत है : व्यापारिक संगठन

 

नई दिल्ली, 27 अक्टूबर (आईएएनएस)। दिल्ली के रामलीला मैदान में इंडिया ब्लॉक की होने वाली रैली को लेकर व्यापारियों में असंतोष है। व्यापारियों का मानना है कि इससे बहुत नुकसान होगा। उन्होंने राहुल गांधी से एक बार फिर रैली को आगे बढ़ाने की अपील की है। व्यापारियों का कहना है कि दीपावली के साथ अन्य त्योहार नजदीक है, ऐसे में रैली करने से व्यापारियों को नुकसान होगा। दिसंबर माह में रैली करें, हमें कोई दिक्कत नहीं है।

नई लाजपत राय मार्केट के अध्यक्ष कमल कालरा ने कहा कि इसका व्यापार पर बहुत बुरा असर पड़ रहा है और हमें काफी नुकसान हो रहा है। वे लोग व्यापारी तो हैं नहीं। इन लोगों का काम सिर्फ देश को नुकसान पहुंचाना है। इंडिया ब्लॉक के नेता राहुल गांधी को किस आधार पर बढ़ावा दे रहे हैं, यह समझ से परे है। ऐसा लगता है कि वे देश को बर्बाद करने पर तुले हुए हैं। इससे हम व्यापारियों को बहुत नुकसान हो रहा है।

भागीरथ पैलेस इलेक्ट्रॉनिक्स मार्केट के अध्यक्ष अजय शर्मा ने कहा कि इन रैलियों ने दिल्ली के व्यापार को बुरी तरह प्रभावित किया है। हमने सरकार से कई बार अनुरोध किया है कि त्योहारों के इस मौसम में रैलियों की अनुमति न दी जाए, चाहे वह रामलीला मैदान हो या कोई अन्य स्थान। यदि रैली की अनुमति देनी ही है, तो इसे शहर से बाहर, बुराड़ी या द्वारका के बाहरी इलाके में आयोजित किया जाना चाहिए। हमने इस संबंध में सरकार को पत्र भी लिखा है। रैली आयोजित करने वाले लोगों और संबंधित संगठनों को भी पत्र भेजा है। हमने राहुल गांधी को भी पत्र लिखकर अनुरोध किया था कि कम से कम त्योहारों के इस मौसम में कोई रैली आयोजित न की जाए, क्योंकि साल में एक बार आने वाले इस बड़े त्योहार से करोड़ों लोगों की रोजी-रोटी जुड़ी हुई है। दुकानदार के साथ गरीब आदमी को भी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। हमारा इलेक्ट्रिक ट्रेड इसी से जुड़ा है। इस पर रैली होगी तो बहुत बुरा असर होगा। मैं राहुल गांधी से अपील करता हूं कि वह रैली को आगे बढ़ाएं।

साइकिल व्यापारी जसप्रीत सिंह ने कहा कि इससे व्यापार पर बहुत असर पड़ता है और यह व्यापारियों के लिए चिंता का विषय है। भारत एक लोकतांत्रिक देश है और सभी को विरोध प्रदर्शन करने का अधिकार है, लेकिन इसके लिए सही समय और स्थान का चुनाव करना बहुत जरूरी है। जैसा कि सभी जानते हैं, अभी त्योहारों का सीजन चल रहा है। सभी व्यापारियों को इस समय कारोबार में तेजी आने और अच्छी कमाई होने की उम्मीद रहती है, क्योंकि इससे उनकी और उनके कर्मचारियों की रोजी-रोटी चलती है। व्यापार हमारे देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है। जीएसटी संग्रह भी तभी बढ़ेगा, जब व्यापार अच्छा होगा। अगर दिल्ली में ऐसे ही रैलियां होती रहेंगी तो बिजनेस दिन पर दिन असर पड़ेगा।

भारतीय उद्योग व्यापार मंडल के राष्ट्रीय अध्यक्ष रविकांत गर्ग ने कहा कि त्योहार का सीजन है और शादियों व अन्य मांगलिक कार्यों का सीजन भी शुरू हो रहा है। इसलिए मेरी अपील है कि इस रैली को कम से कम एक महीने के लिए स्थगित कर दिया जाए। 14 दिसंबर से 14 जनवरी तक मलमास रहेगा। उस दौरान वे रोज रैलियां करें, हमें कोई आपत्ति नहीं है।

उन्होंने कहा कि किसी भी राजनेता या राजनीतिक पार्टी को किसी का काम-धंधा और रोजी-रोटी छीनने का अधिकार नहीं है और न ही ऐसा किया जाना चाहिए, लेकिन जिस प्रकार 1 नवंबर को जानबूझकर रैली आयोजित की जा रही है और उसमें 10 से 12 लाख लोगों को आमंत्रित किया जा रहा है, जबकि रामलीला मैदान, जहां रैली आयोजित करने और दिल्ली मार्च करने की बात कही जा रही है, उसकी क्षमता मेरे अनुसार 40,000 से 50,000 लोगों की है। आसपास की जगहों पर भी लोगों को खड़ा करके शामिल कर लिया जाए, तो अधिकतम एक लाख लोग ही आ सकते हैं। ऐसे में 10 लाख, 9 लाख या 12 लाख लोग आखिर कहां जाएंगे। मुझे लगता है कि अराजकता फैलाने के लिए रैली करेंगे। इससे 25 हजार करोड़ रुपए का व्यापार प्रभावित होगा।

ऑटोमोटिव पार्ट्स मर्चेंट्स एसोसिएशन के अध्यक्ष विनय नारंग ने कहा कि हमें राहुल गांधी की रैली से कोई दिक्कत नहीं है। राहुल गांधी की रैली का समय गलत है। दीपावली एक ऐसा त्योहार है जिसमें हमारे अपने खर्चे भी होते हैं, खुशियां भी होती हैं। कर्मचारियों और ग्राहकों को भी उम्मीदें होती हैं, पिछले 1 महीने से हम लोग प्रताड़ित हैं। तलवार सदैव व्यापारी की गर्दन पर ही क्यों गिरती है? इतनी बड़ी राष्ट्रीय पार्टी है, उनको भी इस बारे में सोचना चाहिए।

--आईएएनएस

डीकेएम/वीसी