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दिल्ली में पीजी और कोचिंग संस्थानों को लेकर नई नीति की तैयारी, मंत्री आशीष सूद ने छात्रों से की मुलाकात

 

नई दिल्ली, 8 सितंबर (आईएएनएस)। दिल्ली सरकार राजधानी में संचालित पेइंग गेस्ट (पीजी), छात्रावासों और कोचिंग संस्थानों के लिए नई नियामक नीति लाने की तैयारी कर रही है। दिल्ली के शिक्षा एवं शहरी विकास मंत्री आशीष सूद ने कहा कि छात्रों की सुरक्षा, बेहतर आवासीय सुविधाओं और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए सरकार जल्द ही ठोस कदम उठाएगी। उन्होंने बताया कि अगले 1 से 1.5 महीने में पीजी और कोचिंग सेंटरों को नियमित करने के लिए नीति या आवश्यक कानून तैयार किया जा सकता है।

मंत्री आशीष सूद ने बताया कि शहरी विकास विभाग के तहत हाल ही में हुई एक उच्चस्तरीय बैठक में पीजी संचालन से संबंधित नियमों की समीक्षा, नए छात्रावासों के लिए दिशा-निर्देश तैयार करने और छात्रों को सुरक्षित आवास उपलब्ध कराने के उद्देश्य से एक समिति का गठन किया गया है। इसी कड़ी में मंगलवार को विभिन्न हितधारकों और छात्रों के साथ व्यापक चर्चा की गई।

उन्होंने कहा कि सरकार ने दिल्ली विश्वविद्यालय, आईपी यूनिवर्सिटी और अन्य शैक्षणिक संस्थानों के लगभग 30 से 40 छात्रों से सीधे संवाद किया। इस दौरान छात्रों से पीजी आवासों में आने वाली समस्याओं, सुरक्षा संबंधी चिंताओं और आवश्यक कानूनी सुधारों पर सुझाव लिए गए। सूद ने कहा कि छात्र ही इन सुविधाओं के वास्तविक उपयोगकर्ता हैं, इसलिए उनकी राय नीति निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

आशीष सूद ने बताया कि पिछले दिन उपराज्यपाल और मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की अध्यक्षता में हुई उच्चस्तरीय बैठक में भी इस विषय पर विस्तार से चर्चा की गई थी। बैठक में राजधानी में संचालित कोचिंग संस्थानों और पीजी आवासों के लिए प्रभावी नियामक ढांचा तैयार करने पर सहमति बनी।

मंत्री ने कहा कि सरकार ने छात्रावासों के निर्माण और विस्तार को बढ़ावा देने के लिए फ्लोर एरिया रेशियो (एफएआर) बढ़ाने का निर्णय लिया है। उनका कहना था कि हर वर्ष दिल्ली में बाहर से दो लाख से अधिक छात्र शिक्षा प्राप्त करने आते हैं, जबकि सुरक्षित छात्र आवासों की उपलब्धता और मांग के बीच बड़ा अंतर है। इस कमी को दूर करने के लिए नए छात्रावासों के निर्माण को प्रोत्साहित किया जाएगा।

आशीष सूद ने यह भी स्पष्ट किया कि असुरक्षित भवनों और नियमों की अनदेखी करने वाले पीजी संचालकों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि सरकार गौबा समिति की रिपोर्ट के कार्यान्वयन में तेजी लाएगी और युवाओं, अभिभावकों, संस्थान प्रबंधन तथा संबंधित एजेंसियों की चिंताओं को ध्यान में रखकर नीति तैयार करेगी।

इस बैठक में शामिल छात्रों ने भी अपनी समस्याएं खुलकर रखीं। एक छात्र ने कहा कि सत्य निकेतन में हुई हालिया घटना बेहद दुखद थी और इसने पीजी आवासों की वास्तविक स्थिति को उजागर कर दिया। छात्र ने बताया कि वह स्वयं कुछ समय पहले उसी क्षेत्र में रह चुका है और वहां की खराब व्यवस्थाओं से परिचित है। उसने कहा कि पीजी लाइसेंसिंग से जुड़ी नीतियां पहले से मौजूद हैं, लेकिन उनका सही तरीके से पालन नहीं हो रहा है।

छात्रों ने सरकार के सामने यह सवाल भी उठाया कि पीजी संचालकों की जवाबदेही तय होनी चाहिए। उनका कहना था कि कई स्थानों पर मकान मालिक मनमाने ढंग से किराया बढ़ाते हैं, भारी सुरक्षा राशि जमा कराते हैं, समय पर उसे वापस नहीं करते और अलग से बिजली के बिल वसूलते हैं। दूसरे राज्यों से पढ़ाई करने आने वाले छात्रों की शिकायतें सुनने और उनका समाधान करने के लिए प्रभावी व्यवस्था की आवश्यकता है।

एक अन्य छात्र ने कहा कि दिल्ली देश का प्रमुख शिक्षा केंद्र है और यहां पढ़ने आने वाला प्रत्येक छात्र अपने परिवार की उम्मीदों और सपनों का प्रतिनिधित्व करता है। इसलिए छात्रों के लिए सुरक्षित, पारदर्शी और जवाबदेह आवास व्यवस्था सुनिश्चित करना बेहद जरूरी है।

--आईएएनएस

एएमटी/वीसी