दिल्ली में 500 यूनिट से अधिक बिजली खपत करने वालों पर बढ़ेगा बिल का बोझ, डीईआरसी ने पीपीएसी लागू करने को दी मंजूरी
नई दिल्ली, 13 जून (आईएएनएस)। दिल्ली के बिजली उपभोक्ताओं को जून महीने में बड़ा झटका लग सकता है। दिल्ली विद्युत विनियामक आयोग (डीईआरसी) ने राजधानी की तीनों बिजली वितरण कंपनियों, बीएसईएस राजधानी पावर लिमिटेड (बीआरपीएल), बीएसईएस यमुना पावर लिमिटेड (बीवाईपीएल) और टाटा पावर दिल्ली डिस्ट्रीब्यूशन लिमिटेड (टीपीडीडीएल) को अप्रैल 2026 के लिए पावर परचेज एडजस्टमेंट चार्ज (पीपीएसी) वसूलने की अनुमति दे दी है। इसके चलते अधिक बिजली खपत करने वाले उपभोक्ताओं के बिलों में बढ़ोतरी देखने को मिलेगी।
यह पहली बार है जब दिल्ली में पीपीएसी की समीक्षा और वसूली मासिक आधार पर की जाएगी। इससे पहले यह प्रक्रिया प्रत्येक तीन महीने में होती थी। डीईआरसी के अनुसार, बिजली उत्पादन कंपनियों से बिजली खरीदने की लागत में वृद्धि होने पर उसका कुछ हिस्सा उपभोक्ताओं तक पहुंचाने के लिए पीपीएसी लगाया जाता है। कोयला और अन्य ईंधनों की कीमतों में बढ़ोतरी के कारण बिजली खरीद महंगी हुई है, जिसके चलते यह कदम उठाया गया है।
डीईआरसी ने बीआरपीएल को 17.94 प्रतिशत, बीवाईपीएल को 17.43 प्रतिशत और टीपीडीडीएल को 16 प्रतिशत पीपीएसी लगाने की अनुमति दी है, हालांकि आयोग ने बिजली कंपनियों की ओर से मांगी गई दरों की तुलना में कम दरों को मंजूरी दी है।
आम उपभोक्ताओं के लिए राहत की बात यह है कि दिल्ली सरकार की बिजली सब्सिडी का लाभ लेने वाले अधिकांश परिवारों पर इसका सीधा असर नहीं पड़ेगा। 200 से 400 यूनिट तथा 500 यूनिट तक बिजली खर्च करने वाले सब्सिडी लाभार्थियों के बिलों में कोई अतिरिक्त बोझ नहीं आएगा, क्योंकि सब्सिडी बिल राशि के बजाय खपत की गई यूनिटों पर आधारित है।
हालांकि 500 यूनिट से अधिक बिजली खर्च करने वाले और सब्सिडी के दायरे से बाहर आने वाले उपभोक्ताओं को अप्रैल के बिल में 7 से 18 प्रतिशत तक अतिरिक्त सरचार्ज का सामना करना पड़ सकता है। इसके कारण जून में मिलने वाले बिजली बिल पहले की तुलना में अधिक हो सकते हैं।
डीईआरसी ने नया नियम ‘एफ’ भी लागू किया है, जिसके तहत यदि किसी महीने की कोई राशि समायोजित नहीं हो पाती है तो उसे बाद के महीनों में धीरे-धीरे वसूला जा सकेगा। आयोग का कहना है कि इससे बिजली वितरण कंपनियों को बिजली उत्पादकों को समय पर भुगतान करने में मदद मिलेगी और ब्याज का अतिरिक्त बोझ कम होगा।
--आईएएनएस
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