दिल्ली में 20 जुलाई को संसद मार्च से पहले पत्थरों से भरा ट्रक खड़ा करना साजिश: उदय भानु
नई दिल्ली, 31 जुलाई (आईएएनएस)। यूथ कांग्रेस के अध्यक्ष उदय भानु ने 20 जुलाई को संसद मार्च के दौरान हुए विरोध-प्रदर्शन को लेकर केंद्र सरकार और दिल्ली पुलिस पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि प्रदर्शन के दिन पत्थरों से भरा एक ट्रक पहले जंतर-मंतर और बाद में यूथ कांग्रेस व एनएसयूआई कार्यालय के बाहर खड़ा किया गया था। यह महज संयोग नहीं था, यह शांतिपूर्ण प्रदर्शन को हिंसक दिखाने की एक पूर्व नियोजित साजिश थी।
समाचार एजेंसी आईएएनएस से खास बातचीत में उदय भानु ने कहा कि जिस दिन संसद के पास युवाओं का प्रदर्शन आयोजित था, उसी दिन पत्थरों से भरा ट्रक पहले जंतर-मंतर और बाद में विपक्षी दल के युवा संगठनों के कार्यालय के बाहर मौजूद था। उन्होंने सवाल उठाया कि राजधानी जैसे संवेदनशील क्षेत्र में ऐसा कैसे संभव है कि दिल्ली पुलिस को इस ट्रक की जानकारी न हो। दिल्ली पुलिस इतनी अक्षम नहीं हो सकती कि उसे इस तरह की गतिविधि की भनक तक न लगे। यह पूरा घटनाक्रम पहले से योजनाबद्ध प्रतीत होता है।
उन्होंने आरोप लगाया कि इस ट्रक को यूथ कांग्रेस कार्यालय के बाहर खड़ा करने का उद्देश्य प्रदर्शनकारियों को उकसाना था, ताकि वे पत्थरों का इस्तेमाल करें और उसके बाद सरकार द्वारा की गई सख्त कार्रवाई को उचित ठहराया जा सके। यदि प्रदर्शनकारी पत्थर उठाते, तो सरकार और प्रशासन शांतिपूर्ण आंदोलन को हिंसक बताकर अपने दमनात्मक कदमों को सही साबित करने की कोशिश करते।
प्रदर्शन में शामिल युवाओं की सराहना करते हुए उदय भानु ने कहा कि तमाम उकसावे के बावजूद उन्होंने पूरी तरह शांतिपूर्ण तरीके से विरोध प्रदर्शन किया। उन्होंने कहा कि प्रदर्शनकारियों पर लाठीचार्ज किया गया, आंसू गैस के गोले छोड़े गए और पैलेट गन का भी इस्तेमाल हुआ, लेकिन इसके बावजूद किसी प्रदर्शनकारी ने पत्थर नहीं उठाया। उन्हें अपने कार्यकर्ताओं और युवाओं पर गर्व है कि उन्होंने लोकतांत्रिक तरीके से अपना विरोध जारी रखा। सरकार जानबूझकर शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों की छवि खराब करना चाहती है। लोकतंत्र में शांतिपूर्ण विरोध हर नागरिक का अधिकार है और ऐसे आंदोलनों को बदनाम करने की कोशिश लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है। इससे अधिक दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति और कुछ नहीं हो सकती कि सरकार स्वयं शांतिपूर्ण प्रदर्शन को हिंसा से जोड़ने का प्रयास करे।
उदय भानु ने आगे कहा कि जिस दिन प्रदर्शन था, उसी दिन पत्थरों से भरा ट्रक वहां मौजूद होना कई सवाल खड़े करता है। बिना प्रशासन की जानकारी या अनुमति के इतनी संवेदनशील जगह पर ऐसा ट्रक खड़ा होना संभव नहीं है। कुछ तो दाल में काला है और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
प्रदर्शन के दौरान पुलिसकर्मियों के घायल होने के दावों पर भी उन्होंने सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि यदि किसी पुलिसकर्मी को चोट लगी भी है, तो इसकी जांच होनी चाहिए कि चोट पहुंचाने वाले वास्तव में प्रदर्शनकारी थे या फिर ऐसे लोग जिन्हें किसी अन्य उद्देश्य से वहां भेजा गया था। उपलब्ध वीडियो में महिलाओं और अन्य प्रदर्शनकारियों पर लाठीचार्ज साफ दिखाई देता है, जबकि आंदोलन शांतिपूर्ण था।
नोएडा की उस युवती पर दर्ज एफआईआर के मुद्दे पर, जिसने प्रदर्शन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर टिप्पणी की थी, उदय भानु ने कार्रवाई को पूरी तरह गलत बताया। उन्होंने कहा कि यदि किसी युवा ने गुस्से या आक्रोश में टिप्पणी की है, तो उसे आपराधिक मामला बना देना उचित नहीं है। आलोचना को दबाने के लिए सरकार कानून का इस्तेमाल कर रही है। जब विपक्ष के नेताओं, यहां तक कि राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के खिलाफ भी कुछ लोग कथित रूप से आपत्तिजनक टिप्पणियां करते हैं, तब उनके खिलाफ वैसी कार्रवाई नहीं होती जैसी सरकार के आलोचकों के खिलाफ होती है। यह दोहरा मापदंड है। कानून सभी के लिए समान होना चाहिए और राजनीतिक आधार पर अलग-अलग रवैया नहीं अपनाया जाना चाहिए।
--आईएएनएस
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