दिल्ली में 1 जून को होगा आईबीसीए शिखर सम्मेलन 2026, भारत करेगा मेजबानी: डॉ. एसपी यादव
नई दिल्ली, 11 मई (आईएएनएस)। इंटरनेशनल बिग कैट अलायंस (आईबीसीए) के शिखर सम्मेलन 2026 का आयोजन कब और कहां होगा? आईबीसीए की स्थापना कब और कैसे हुई थी सहित विभिन्न मुद्दों पर आईबीसीए के महानिदेशक डॉ. एसपी यादव ने प्रतिक्रिया दी।
डॉ. एसपी यादव ने समाचार एजेंसी आईएएनएस से बातचीत में कहा, "आईबीसीए शिखर सम्मेलन की मेजबानी भारत सरकार द्वारा 1 जून को नई दिल्ली में की जा रही है। यह अंतरराष्ट्रीय बिग कैट एलायंस का पहला आईबीसीए शिखर सम्मेलन होगा, जिसमें विश्व भर के 95 बिग कैट रेंज देशों को आमंत्रित किया गया है। इसके साथ ही, आईबीसीए के 25 सदस्य और पर्यवेक्षक, उनके राष्ट्राध्यक्ष और सरकार प्रमुखों को भी आमंत्रित किया गया है। 'बिग कैट बचाओ, पारिस्थितिकी तंत्र बचाओ, मानवता बचाओ' का नारा बहुत महत्वपूर्ण है। हमें इसे समझने की जरूरत है। जब हम बिग कैट्स की बात करते हैं तो दुनिया में सात बिग कैट्स (बाघ, चीता, तेंदुआ, हिम तेंदुआ, जगुआर, प्यूमा) हैं। बिग कैट्स बचाने का मकसद जंगलों को भी बचाना है। इसके अलावा जंगल के पारिस्थितिकी तंत्र को सुरक्षित कर हम इंसान को लाभ पहुंचाते हैं।"
आईबीसीए के महानिदेशक डॉ. एसपी यादव ने कहा, "प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आईबीसीए के पीछे का विचार यह था कि ये बड़ी बिल्लियां विश्व भर के पारिस्थितिकी तंत्रों और आवासों का प्रतिनिधित्व करती हैं। यदि हम विश्व को देखें तो 5 करोड़ वर्ग किलोमीटर से अधिक वन क्षेत्र में इन बड़ी बिल्लियों का आवास है और ये जैव विविधता से भरपूर हैं, इसलिए, इन बड़ी बिल्लियों के नाम पर संपूर्ण जैव विविधता की रक्षा करना आवश्यक है। जैव विविधता का यह संरक्षण केवल जैव विविधता की रक्षा ही नहीं, बल्कि कार्बन पृथक्करण के माध्यम से जलवायु परिवर्तन को कम करना भी है। स्थानीय लोगों को पर्यावरण-पर्यटन और पर्यावरण-विकास समितियों के माध्यम से आजीविका के विकल्प मिलते हैं।
डॉ. एसपी यादव ने कहा, "95 देश जो बिग कैट्स के हैं, उनमें से 92 देश साउथ में हैं। ऐसे में ग्लोबल साउथ की लीडरशिप का एक आईबीसीए के माध्यम से एक बहुत अच्छा मंच दुनिया को प्राप्त हुआ है। बिग कैट डिप्लोमेसी और सॉफ्ट डिप्लोमेसी, या कुल मिलाकर हम ग्रीन डिप्लोमेसी कह सकते हैं।"
आईबीसीए का उद्देश्य सात बड़ी बिल्ली प्रजातियों के संरक्षण के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग को बढ़ावा देना, बड़ी बिल्लियों से होने वाले खतरों और उनके समाधानों पर ज्ञान के आदान-प्रदान को बढ़ावा देना और बड़ी बिल्लियों के प्रभावी प्रबंधन के लिए उनके वितरण क्षेत्रों की क्षमता का निर्माण, वैश्विक जागरूकता बढ़ाना और प्रचार-प्रसार गतिविधियों को बढ़ावा देना है। इसके अलावा, संसाधनों को जुटाएं और संरक्षण से जुड़े अंतरराष्ट्रीय निकायों के साथ तालमेल बिठाने के अवसरों का पता लगाना लक्ष्य है।
आईबीसीए का गठन विशाल बिल्लियों के संरक्षण के लिए वैश्विक सहयोगात्मक दृष्टिकोण की तत्काल आवश्यकता के फलस्वरूप हुआ। विभिन्न देशों, संरक्षण साझेदारों और वैज्ञानिक संगठनों को एक साथ लाकर, यह गठबंधन विशाल बिल्लियों के मंडराते खतरों के खिलाफ एक एकजुट मोर्चा तैयार करता है। यह भावी पीढ़ियों के लिए हमारे ग्रह की प्राकृतिक विरासत को संरक्षित करने में अंतरराष्ट्रीय सहयोग की शक्ति का प्रमाण है।
--आईएएनएस
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