दिल्ली हाई कोर्ट ने बरकरार रखा निचली अदालत का फैसला, एनआईए को मिली 180 दिन की जांच अवधि
नई दिल्ली, 4 अगस्त (आईएएनएस)। दिल्ली हाईकोर्ट ने म्यांमार में आतंकी प्रशिक्षण देने के आरोप में गिरफ्तार 7 विदेशी नागरिकों के खिलाफ जांच की अवधि बढ़ाने को लेकर निचली अदालत के आदेश को बरकरार रखा है। अदालत ने आरोपियों द्वारा पटियाला हाउस कोर्ट के फैसले को चुनौती देने वाली याचिका को खारिज कर दिया।
पिछले दिनों पटियाला हाउस कोर्ट ने एनआईए की अर्जी पर 6 यूक्रेनी नागरिकों और एक अमेरिकी नागरिक के खिलाफ यूएपीए के तहत दर्ज मामले की जांच पूरी करने के लिए समय 90 दिन से बढ़ाकर 180 दिन कर दिया था। एनआईए ने कोर्ट से कहा था कि यह मामला पैन-इंडिया और ट्रांस-नेशनल लिंकेज वाली आपराधिक साजिश से जुड़ा है। बड़ी साजिश का पता लगाने और विदेशों तक फैले नेटवर्क की कड़ियों को जोड़ने के लिए जांच में और समय की जरूरत है।
एनआईए के अनुसार, गिरफ्तार किए गए विदेशी नागरिकों पर आरोप है कि ये लोग म्यांमार के एथनिक ग्रुप के संपर्क में थे। वहां इन्होंने आतंकी गुटों को हथियार चलाने और ड्रोन उड़ाने की ट्रेनिंग दी थी। आरोप है कि इन लोगों ने यूरोप से ड्रोन मंगवाए थे और उन्हें म्यांमार भेजकर आतंकियों को उनका इस्तेमाल सिखाया। म्यांमार से वापस भारत आने के बाद एनआईए ने इन सभी को गिरफ्तार किया था।
एजेंसी ने बताया कि अमेरिकी नागरिक को कोलकाता से, तीन यूक्रेनी नागरिकों को दिल्ली से और तीन अन्य यूक्रेनी नागरिकों को लखनऊ से पकड़ा गया था। गिरफ्तार छह यूक्रेनियों की पहचान हर्बा पेट्रो, स्लिवियाक टारस, इवान सुकमनोवस्की, स्टीफन मारियन, होंचारुक मकसीम और कामिनिस्की विक्टर के रूप में हुई है। वहीं अमेरिकी नागरिक की पहचान मैथ्यू वैनडाइक के रूप में हुई है।
एनआईए का कहना है कि इस पूरे नेटवर्क के पीछे एक बड़ी अंतरराष्ट्रीय साजिश है। विदेशी धरती पर आतंकियों को सैन्य प्रशिक्षण देना और ड्रोन जैसी तकनीक उपलब्ध कराना गंभीर सुरक्षा खतरा है। एजेंसी जांच में इन लोगों के भारत और अन्य देशों में संपर्क, फंडिंग के स्रोत और आगे की योजना का भी पता लगाना चाहती है। इसी वजह से जांच की अवधि बढ़ाने की मांग की गई थी।
--आईएएनएस
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