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दिल्ली में फर्जी पुलिस बनकर साइबर ठगी करने वाले गैंग का भंडाफोड़, तीन गिरफ्तार

 

नई दिल्ली, 18 मार्च (आईएएनएस)। बाहरी दिल्ली क्षेत्र की साइबर पुलिस ने एक बड़े 'डिजिटल अरेस्ट' इम्पर्सोनेशन साइबर फ्रॉड का पर्दाफाश करते हुए तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इस पूरे मामले में एक व्यक्ति से करीब 14.20 लाख रुपये की ठगी की गई जबकि ठगी के लिए जिस बैंक खाते का इस्तेमाल हुआ उसमें कुल लेनदेन करीब 2.20 करोड़ रुपए है।

21 फरवरी को पश्चिम विहार निवासी सत्यपाल गुप्ता ने पुलिस में शिकायत दी कि उन्हें एक अनजान नंबर से व्हाट्सऐप कॉल आया था। कॉल करने वाले ने खुद को एक सीनियर पुलिस अधिकारी बताया और कहा कि उनके बैंक खाते मनी लॉन्ड्रिंग में शामिल हैं और जल्द ही उन्हें गिरफ्तार कर लिया जाएगा। इस तरह की बातों से शिकायतकर्ता बुरी तरह डर गए और घबराहट में आकर उन्होंने आरोपी द्वारा बताए गए बैंक खाते में 14 लाख 20 हजार रुपए ट्रांसफर कर दिए। बाद में जब उन्हें एहसास हुआ कि उनके साथ ठगी हुई है, तो उन्होंने तुरंत पुलिस से संपर्क किया।

शिकायत के आधार पर साइबर थाने में मामला दर्ज किया गया और एक स्पेशल टीम बनाई गई। इस टीम में एसआई राहुल, हेड कांस्टेबल विजय, हेड कांस्टेबल अजय चिल्लर और कांस्टेबल संजय शामिल थे, जिनका नेतृत्व इंस्पेक्टर गजे सिंह कर रहे थे। पूरी कार्रवाई एसीपी वीरेंद्र दलाल की निगरानी में की गई।

जांच के दौरान पुलिस ने जिस बैंक खाते में पैसे ट्रांसफर हुए थे, उसकी जानकारी निकाली। यह खाता आईसीआईसीआई बैंक में 'रेनुदर सर्विसेज एंड सॉल्यूशंस प्राइवेट लिमिटेड' के नाम से खुला हुआ था। जब इस खाते से जुड़े मोबाइल नंबर और ईमेल आईडी की जांच की गई, तो कई अहम सुराग मिले। इसके बाद 9 मार्च को पुलिस ने इस कंपनी के डायरेक्टर और खाते के धारक सशिंदर राम को कश्मीरी गेट आईएसबीटी से गिरफ्तार कर लिया। पूछताछ में पता चला कि वह जानबूझकर अपना बैंक खाता साइबर फ्रॉड के लिए इस्तेमाल करने दे रहा था और इसके बदले कमीशन लेता था।

आगे की पूछताछ में उसने अपने साथियों के बारे में भी खुलासा किया, जिसके बाद पुलिस ने तकनीकी निगरानी और खुफिया जानकारी के आधार पर दो और आरोपियों मोहम्मद कैफ और मोनिश को उत्तर प्रदेश के कैराना और सहारनपुर से गिरफ्तार किया। ये दोनों आरोपी अलग-अलग बैंकों, खासकर कोटक महिंद्रा बैंक में फर्जी या संदिग्ध खाते खुलवाने का काम करते थे, जिनका इस्तेमाल ऐसे ही साइबर फ्रॉड में किया जाता था।

पुलिस ने इनके पास से तीन एंड्रॉयड मोबाइल फोन बरामद किए हैं, जिनमें व्हाट्सऐप चैट्स जैसे अहम सबूत मिले हैं। इन चैट्स से साफ हो गया कि ये लोग एक संगठित साइबर फ्रॉड नेटवर्क का हिस्सा हैं। फिलहाल पुलिस इस गिरोह के बाकी सदस्यों की तलाश में जुटी हुई है और जांच लगातार जारी है।

पुलिस ने इस मामले के बाद आम लोगों को भी सतर्क रहने की सलाह दी है। अधिकारियों ने बताया कि किसी भी अनजान कॉल, लिंक या मैसेज पर भरोसा न करें, खासकर अगर कोई खुद को पुलिस या सरकारी अधिकारी बताकर डराने की कोशिश करे। कभी भी ओटीपी, बैंक डिटेल्स या पर्सनल जानकारी शेयर न करें। अगर किसी को साइबर फ्रॉड का शक हो, तो तुरंत 1930 हेल्पलाइन नंबर पर कॉल करें, नजदीकी थाने में जाएं या ऑनलाइन शिकायत दर्ज करें ताकि समय रहते नुकसान को रोका जा सके।

--आईएएनएस

पीआईएम/पीएम