दिल्ली: ईडी ने 600 करोड़ रुपए से अधिक के कथित दवा खरीद घोटाले में डीजीएचएस से मांगे दस्तावेज
नई दिल्ली, 25 जून (आईएएनएस)। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने दिल्ली सरकार के स्वास्थ्य विभाग से 600 करोड़ रुपए से अधिक के कथित दवा खरीद घोटाले के सिलसिले में दस्तावेज मांगे हैं। सूत्रों ने बताया कि ईडी ने मेडिकल उपकरणों की खरीद में कथित घोटाले को लेकर जांच शुरू की है। इस मामले में एजेंसी ने मैन्युफैक्चरर्स और सप्लायर्स से जुड़े टेंडर, पेमेंट और ट्रांजैक्शन के रिकॉर्ड भी मांगे हैं।
ईडी की दिल्ली जोन-2 टीम ने दिल्ली सरकार के स्वास्थ्य सेवा महानिदेशालय (डीजीएचएस) के निदेशक को एक पत्र भेजा है, जिसमें सेंट्रल प्रोक्योरमेंट एजेंसी (सीपीए) और डीजीएचएस की ओर से की गई खरीद से जुड़े दस्तावेज उपलब्ध कराने को कहा है।
जांच के दायरे में एक्स-रे मशीन, सी-आर्म रेडियोलॉजिकल उपकरण, एनेस्थीसिया वर्कस्टेशन, ओरल रिहाइड्रेशन सॉल्ट (ओआरएस), बेड शीट, लिनेन सामान, सर्जिकल सामान, ड्रेसिंग, स्यूचर, कैनुला, दस्ताने और दवाइयों जैसी खरीद शामिल हैं।
सूत्रों ने बताया कि जांच एजेंसी ने तथाकथित घोटाले की जांच करते हुए टेंडर प्रक्रिया, तकनीकी और वित्तीय मूल्यांकन, ठेके देने की प्रक्रिया, सामान की सप्लाई, जांच, मंजूरी और पेमेंट रिलीज से जुड़े रिकॉर्ड भी मांगे हैं। इसके अलावा ईडी ने उन कंपनियों, मैन्युफैक्चरर्स, ओईएम और डिस्ट्रीब्यूटर्स से जुड़े लेन-देन की जानकारी मांगी है, जिनसे मेडिकल उपकरण खरीदे गए थे।
जिन कंपनियों और उपकरणों से जुड़े रिकॉर्ड मांगे गए हैं, उनमें पोर्टेबल एक्स-रे मशीन, सी-आर्म मशीन और एनेस्थीसिया वर्कस्टेशन बनाने वाली कंपनियां शामिल हैं। ईडी इस पूरे मामले में यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि मेडिकल सामान की खरीद प्रक्रिया में कोई अनियमितता, वित्तीय गड़बड़ी या मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़ा मामला तो नहीं है।
सूत्रों ने कहा कि फिलहाल जांच जारी है और विभाग से मांगे गए दस्तावेजों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
इससे पहले, दिल्ली सरकार की एंटी-करप्शन ब्रांच (एसीबी) ने सेंट्रल प्रोक्योरमेंट एजेंसी (सीपीए) के पूर्व प्रमुख विनोद कुमार रंगा को दवाओं, सर्जिकल सामान, इस्तेमाल होने वाली चीजों और मेडिकल उपकरणों की गैर-कानूनी खरीद में कथित तौर पर शामिल होने के आरोप में गिरफ्तार किया था।
दवा खरीद घोटाला इस महीने की शुरुआत में सीपीए की ओर से दवाओं और मेडिकल उपकरणों की खरीद में कथित अनियमितताओं के कारण चर्चा में आया था। इस घटना के बाद कई डॉक्टर और मेडिकल स्टाफ जांच एजेंसियों की नजर में आए। वहीं, दिल्ली के उपराज्यपाल और मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद मुकदमा दर्ज किया गया था।
--आईएएनएस
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