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70 साल की उम्र में होटल चलाती दीपाली घोष: अकेलेपन में संघर्ष और आत्मनिर्भरता की मिसाल

 

जब हम 70 साल की उम्र में होते हैं, तो अक्सर लोग आराम और परिवार के साथ समय बिताने की सोचते हैं। लेकिन दीपाली घोष, उम्र 70 साल, इस सामान्य सोच को चुनौती देती हैं। अजीब लगे या ना लगे, लेकिन इस उम्र में भी दीपाली होटल चलाती हैं।

दीपाली घोष का होटल चलाने का मकसद सिर्फ व्यवसाय नहीं है, बल्कि यह उनके जीवनयापन का माध्यम भी है। उन्होंने बताया कि उनके परिवार में कोई नहीं है। ऐसे में वे पिछले कई सालों से अकेले ही अपनी ज़िंदगी का ख्याल रख रही हैं और यही कारण है कि उन्होंने खुद के लिए रोजगार और आत्मनिर्भरता का रास्ता चुना।

होटल चलाना केवल खाना परोसने या ग्राहकों को सेवा देने का काम नहीं है। इसके पीछे दीपाली की मेहनत, लगन और जिम्मेदारी छिपी हुई है। सुबह से लेकर रात तक वे होटल की गतिविधियों की निगरानी करती हैं, सामग्री खरीदती हैं, कर्मचारियों के काम को देखती हैं और अपने ग्राहकों को बेहतर अनुभव देने की पूरी कोशिश करती हैं।

सोशल मीडिया और स्थानीय न्यूज प्लेटफॉर्म्स पर दीपाली की यह कहानी लोगों के लिए प्रेरणा बन गई है। कई लोगों ने उन्हें “हौसले की मिसाल” बताया, तो कुछ ने लिखा कि उनकी कहानी यह साबित करती है कि उम्र केवल एक संख्या है और इंसान कभी भी नया शुरू कर सकता है।

विशेषज्ञों का कहना है कि समाज में अकेलेपन से जूझ रहे बुज़ुर्गों के लिए दीपाली जैसी मिसालें बहुत महत्वपूर्ण हैं। अकेले रहने वाले बुज़ुर्गों के लिए आर्थिक आत्मनिर्भरता और मानसिक सक्रियता ज़रूरी है। दीपाली ने यह साबित किया कि उम्र के बावजूद भी स्वावलंबन और मेहनत से जीवन को संभाला जा सकता है।

दीपाली की कहानी यह भी दर्शाती है कि समाज में बुज़ुर्गों की भूमिका केवल परिवार तक सीमित नहीं रहती। वे अपने अनुभव और मेहनत से खुद के लिए और दूसरों के लिए भी मार्ग बना सकते हैं। उनका होटल न केवल व्यवसाय है, बल्कि उनके अकेलेपन और चुनौतियों से लड़ने की कहानी का प्रतीक भी है।

अंततः, दीपाली घोष की कहानी हम सभी को यह सिखाती है कि उम्र कोई बाधा नहीं है। अगर इच्छा शक्ति और मेहनत हो, तो इंसान हर चुनौती का सामना कर सकता है। 70 साल की उम्र में होटल चलाना आसान नहीं, लेकिन दीपाली ने दिखा दिया कि संघर्ष, आत्मनिर्भरता और हौसला किसी भी उम्र में चमक सकता है।

यह कहानी सिर्फ दीपाली की नहीं है, बल्कि उन सभी बुज़ुर्गों और अकेले रहने वाले लोगों के लिए प्रेरणा है, जो जीवन की चुनौतियों के बावजूद खुद के लिए जीने और काम करने की हिम्मत रखते हैं।