डेबिट कार्ड के साथ मिलता है 2 लाख रुपए तक का मुफ्त बीमा! क्या आपको इसकी जानकारी है?
नई दिल्ली, 8 नवंबर (आईएएनएस)। क्या आप जानते हैं कि आपके डेबिट कार्ड के साथ एक मुफ्त बीमा कवर भी मिल सकता है? भारत के अधिकांश बैंक अपने ग्राहकों को डेबिट कार्ड के साथ व्यक्तिगत दुर्घटना बीमा (पर्सनल एक्सीडेंट इंश्योरेंस) या दुर्घटना मृत्यु बीमा का लाभ देते हैं। कई मामलों में यह कवर 50,000 रुपए से लेकर 2 लाख रुपए या उससे अधिक तक हो सकता है। हालांकि बड़ी संख्या में बैंक ग्राहक और उनके परिवार इस सुविधा से अनजान रहते हैं।
बैंकों द्वारा दिया जाने वाला यह बीमा आमतौर पर कार्ड के प्रकार पर निर्भर करता है। उदाहरण के लिए रुपे प्लेटिनम जैसे कार्डों पर अक्सर 2 लाख रुपए तक का दुर्घटना बीमा कवर उपलब्ध होता है। कुछ प्रीमियम कार्डों पर यह राशि इससे भी अधिक हो सकती है। बीमा के तहत दुर्घटना में मृत्यु, स्थायी पूर्ण विकलांगता जैसी स्थितियों में लाभ दिया जाता है।
विशेषज्ञों के अनुसार, केवल डेबिट कार्ड होना पर्याप्त नहीं है। अधिकांश बैंकों की शर्तों के मुताबिक कार्ड "सक्रिय" होना चाहिए। आम तौर पर दुर्घटना से पहले 30 से 90 दिनों के भीतर कार्ड से कोई लेन-देन किया गया होना आवश्यक होता है। साथ ही, बीमा दावा करने की समय-सीमा भी बैंक के नियमों के अनुसार अलग-अलग हो सकती है।
इसलिए ग्राहकों को सलाह दी जाती है कि वे अपने बैंक से यह जानकारी जरूर प्राप्त करें कि उनके कार्ड पर कितना बीमा कवर उपलब्ध है और दावे की शर्तें क्या हैं।
स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (एसबीआई) अपने विभिन्न डेबिट कार्डों पर 2 लाख से 50 लाख रुपए तक का बीमा कवर उपलब्ध कराता है। इसमें पर्सनल एक्सीडेंटल इंश्योरेंस (मृत्यु) और एयर एक्सीडेंटल इंश्योरेंस जैसे लाभ शामिल हैं। हालांकि बैंक की वेबसाइट के अनुसार वीज़ा, मास्टरकार्ड ग्लोबल, क्लासिक और वर्चुअल कार्डों पर यह सुविधा उपलब्ध नहीं है।
वहीं एचडीएफसी बैंक भी अपने कई डेबिट कार्डों पर पर्सनल एक्सीडेंटल डेथ कवर प्रदान करता है। उदाहरण के तौर पर, एचडीएफसी के प्लेटिनम डेबिट कार्ड धारकों को पात्र अंतरराष्ट्रीय हवाई टिकटों पर 3 करोड़ रुपए तक का एयर एक्सीडेंट कवर उपलब्ध कराया जाता है। यह सुविधा क्लासिक, प्रेफर्ड, इम्पेरिया, प्लेटिनम, विशेष और मनीबैक डेबिट कार्ड ग्राहकों के लिए उपलब्ध है।
यदि कार्डधारक की दुर्घटना में मृत्यु हो जाती है, तो नामांकित व्यक्ति या कानूनी उत्तराधिकारी को निर्धारित समय के भीतर बैंक में दावा प्रस्तुत करना होता है। उदाहरण के लिए एचडीएफसी बैंक के नियमों के अनुसार, दावे के लिए आवेदन मृत्यु के एक महीने के भीतर निकटतम शाखा में जमा करना होता है।
इसके लिए मृत्यु प्रमाण पत्र, पोस्टमार्टम रिपोर्ट, पुलिस जांच रिपोर्ट, बैंक स्टेटमेंट और नॉमिनी के केवाईसी दस्तावेज जैसे रिकॉर्ड जमा करने पड़ते हैं। अलग-अलग बैंकों के नियमों के अनुसार दावा प्रक्रिया और समय-सीमा में अंतर हो सकता है।
वित्तीय विशेषज्ञों का कहना है कि कई बार परिवार को इस तरह के बीमा कवर की जानकारी ही नहीं होती, जिसके कारण पात्र होने के बावजूद दावा नहीं किया जाता। इसलिए अपने डेबिट कार्ड से जुड़े बीमा लाभ, नामांकन और दावा प्रक्रिया की जानकारी परिवार के सदस्यों के साथ साझा करना बेहद जरूरी है।
--आईएएनएस
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