दशकों से रह रहे बांग्लादेशियों को सीएए के तहत मिले राहत, जबरन न निकाला जाए बाहर: मौलाना शहाबुद्दीन रजवी
बरेली, 31 मई (आईएएनएस)। ऑल इंडिया मुस्लिम जमात के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी ने पश्चिम बंगाल में घुसपैठियों के लिए बनाए गए होल्डिंग सेंटरों (नजरबंदी केंद्रों) और केरल में ‘वंदे मातरम’ को लेकर चल रहे विवाद पर अपनी प्रतिक्रिया दी है।
मौलाना शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी ने आईएएनएस से बात करते हुए पश्चिम बंगाल में घुसपैठियों के मुद्दे पर कहा कि वर्तमान समय में राज्य का सबसे महत्वपूर्ण मुद्दा घुसपैठियों का है, जिसे सीएम सुवेंदु अधिकारी प्रमुखता से उठा रहे थे।"
उन्होंने कहा कि वर्ष 1971 में भारत के सहयोग से बांग्लादेश का गठन हुआ था। उस दौरान और उसके बाद बड़ी संख्या में हिंदू और मुस्लिम समुदाय के लोग बांग्लादेश से भारत आए और असम, पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश तथा दिल्ली सहित विभिन्न राज्यों में बस गए।
मौलाना ने कहा कि इनमें से अधिकांश लोग शोषित और वंचित वर्गों से संबंधित थे, जिन्होंने पिछले कई दशकों से भारत में रहकर मेहनत-मजदूरी के जरिए अपना जीवन यापन किया है।
उन्होंने कहा कि ऐसे लोगों के प्रति भारत सरकार की जिम्मेदारी बनती है कि उन्हें नागरिकता संशोधन अधिनियम (सीएए) के तहत राहत प्रदान की जाए। उनका मानना है कि जो लोग वर्षों से भारत में रह रहे हैं और समाज का हिस्सा बन चुके हैं, उन्हें देश से बाहर नहीं निकाला जाना चाहिए और न ही उन्हें जबरन वापस भेजने का प्रयास किया जाना चाहिए।
वहीं, केरल में ‘वंदे मातरम’ को लेकर चल रहे विवाद पर प्रतिक्रिया देते हुए मौलाना रजवी ने कहा कि राज्य में नई सरकार के गठन के बाद विधानसभा में इस गीत को गाने को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। कुछ लोग इसके समर्थन में हैं, जबकि कुछ इसका विरोध कर रहे हैं। इस मुद्दे को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष आमने-सामने दिखाई दे रहे हैं।
उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में सबसे अधिक आवश्यकता इस बात की है कि नई सरकार राज्य के विकास और जनकल्याण पर ध्यान केंद्रित करे। सरकार को ऐसा रोडमैप तैयार करना चाहिए जिससे केरल की जनता को बेहतर सुविधाएं मिल सकें और राज्य का समग्र विकास सुनिश्चित हो सके। मौलाना ने कहा कि राजनीतिक दलों को विवादित मुद्दों के बजाय जनता की समस्याओं के समाधान और विकास कार्यों को प्राथमिकता देनी चाहिए।
--आईएएनएस
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