दलहन आयात करना हमारे लिए शर्म की बात, अब दालों का निर्यातक बनेगा भारत: शिवराज सिंह चौहान
सीहोर/ नई दिल्ली, 7 फरवरी (आईएएनएस)। मध्य प्रदेश के सीहोर जिले के अमलाहा स्थित खाद्य दलहन अनुसंधान केंद्र (एफएलआरपी) से आज देश की दलहन नीति और किसान–केंद्रित कृषि विमर्श का नया अध्याय जुड़ा और केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण और ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान की अध्यक्षता में देशव्यापी दलहन क्रांति का आगाज हुआ। यहां आयोजित राष्ट्रीय दलहन परामर्श एवं रणनीति बैठक में एक ही मंच पर केंद्रीय कृषि मंत्री चौहान के साथ ही केंद्रीय राज्य मंत्री तथा मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, ओडिशा के उपमुख्यमंत्री, कई राज्यों के कृषि मंत्री, शीर्ष वैज्ञानिक, आईसीएआर-आईसीएआरडीए के प्रतिनिधि, प्रगतिशील किसान, एफपीओ, बीज और दाल मिल प्रतिनिधि जुटे– और संदेश साफ था: दलहन में आत्मनिर्भर भारत का रोडमैप अब खेतों के बीच से तय होगा, दिल्ली के फाइलों के कमरों से नहीं।
एक तरफ अमलाहा (सीहोर) में खाद्य दलहन अनुसंधान केंद्र (एफएलआरपी) से ‘दलहन आत्मनिर्भरता मिशन’ का रोडमैप तय हुआ, तो दूसरी तरफ केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने विपक्ष की आशंकाओं को खारिज करते हुए स्पष्ट संदेश दिया कि दालें आयात करना हमारे लिए शर्म की बात है, अब भारत दालों का निर्यातक बनेगा और हालिया अंतरराष्ट्रीय समझौतों के बावजूद भारत के किसान के हितों पर जरा सी भी आंच नहीं आने दी जाएगी।
केंद्रीय कृषि मंत्री ने स्पष्ट कहा कि विपक्ष का “देश बेच दिया, किसान बेच दिए, किसान बर्बाद हो जाएंगे” वाला नैरेटिव आज के तथ्य सामने आने के बाद टिक नहीं सकता। उन्होंने कहा कि यह अपने आप में एक ऐतिहासिक और अद्भुत समझौता है, जिसमें भारत की प्रगति और विकास के नए द्वार खुलेंगे, निर्यात बढ़ेगा, रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और किसान की आय भी बढ़ेगी, क्योंकि हमारे मसाले निर्यात होंगे, चावल हमारा इन देशों में कितना जाता है, उसका निर्यात बढ़ेगा, और हमारे डेयरी के उत्पाद सुरक्षित रहेंगे हैं और इसलिए भारत के किसानों को इससे बहुत फायदा है। उन्होंने मंच से कहा कि इस ऐतिहासिक समझौते के लिए मैं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का भारत के किसानों की तरफ से धन्यवाद देता हूं।
‘दलहन आत्मनिर्भरता मिशन’ की राष्ट्रीय बैठक में केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह ने कहा कि आप समझ सकते हैं कि पूरा हिंदुस्तान आज अमलाहा में इकट्ठा हो गया है। शिवराज सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का संकल्प है कि विकसित भारत के लिए आत्मनिर्भर भारत बनाना आवश्यक है और उसी कड़ी में दलहन में आत्मनिर्भरता एक बड़ा लक्ष्य है। प्रधानमंत्री का संकल्प है कि दलहन में भी भारत आत्मनिर्भर बने, दालें बाहर से नहीं मंगाएंगे, बल्कि कल ऐसी स्थिति आए कि हम दालों का निर्यात करेंगे। इसके लिए उन्होंने ‘दलहन आत्मनिर्भरता मिशन’ बनाया है। आज उसी मिशन की राष्ट्रीय बैठक यहां की गई है।
केंद्रीय मंत्री चौहान ने मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री को इस वर्ष को “कृषक कल्याण वर्ष” घोषित करने के लिए बधाई देते हुए कहा कि भारत सरकार, मध्य प्रदेश सरकार के इस निर्णय में पूरी तरह से कदम से कदम, कंधे से कंधा मिलाकर सहयोग करेगी, ताकि प्रदेश में किसानों की आय बढ़ाई जा सके, फसलों का उत्पादन बढ़े और वैल्यू एडिशन के नए अवसर तैयार हों। उन्होंने यह भी कहा कि सभी राज्यों के कृषि मंत्री अपने–अपने राज्यों में भी हम सब मिलकर अलग–अलग रोडमैप बनाएंगे, ताकि प्रत्येक राज्य की जरूरतों के अनुरूप दलहन मिशन को आगे बढ़ाया जा सके।
भारत–अमेरिका समझौते को लेकर चल रही राजनीतिक बहस पर केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह ने विपक्ष को कठोर शब्दों में घेरा। उन्होंने कहा कि हमारा विपक्ष हाय–तौबा मचा रहा था कि अमेरिका के साथ ऐसा समझौता हो जाएगा जिसमें भारत का किसान तबाह हो जाएगा, बर्बाद हो जाएगा।
उन्होंने याद दिलाया कि यह वही नरेंद्र मोदी हैं, जिन्होंने कहा था, “देश नहीं झुकने दूंगा,” और यह भी कहा था कि चाहे कितनी बड़ी कीमत क्यों न चुकानी पड़े, किसानों के हितों की रक्षा करेंगे। अभी जो समझौता हुआ है यूएसए के साथ, इसके पहले 27 देशों के साथ यूरोपियन यूनियन के, और उसके पहले जो एफटीए हुए हैं, आज के समझौते ने तो बता दिया है कि देश के और किसानों के हित पूरी तरह से सुरक्षित रखे गए हैं।
--आईएएनएस
एमएस/