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Cyclone Alert: बंगाल की खाड़ी में क्यों आते हैं ज्यादा चक्रवात? जानिए गर्म समुद्र से लेकर हवाओं तक का पूरा विज्ञान

 

बंगाल की खाड़ी का क्षेत्र चक्रवाती तूफानों के लिहाज से बेहद संवेदनशील माना जाता है। यहां समुद्र का गर्म पानी, वातावरण में नमी और हवाओं की अनुकूल परिस्थितियां मिलकर चक्रवातों के बनने और ताकतवर होने में मदद करती हैं। खासकर मानसून की वापसी के बाद अक्टूबर और नवंबर में चक्रवाती गतिविधियां बढ़ सकती हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि अरब सागर की तुलना में बंगाल की खाड़ी में चक्रवात बनने की संभावना अधिक क्यों रहती है?

बंगाल की खाड़ी में चक्रवातों का खतरा क्यों ज्यादा?

बंगाल की खाड़ी में चक्रवात बनने के पीछे कई भौगोलिक और मौसमी कारण हैं। इस क्षेत्र में समुद्र की सतह का तापमान अक्सर चक्रवातों के विकास के अनुकूल रहता है। इसके अलावा, वातावरण में मौजूद नमी और हवाओं की दिशा भी तूफानों की ताकत को प्रभावित करती है।

अरब सागर में भी चक्रवात आते हैं, लेकिन दोनों समुद्री क्षेत्रों की मौसमी परिस्थितियां अलग-अलग होती हैं। इसी वजह से चक्रवातों की संख्या, तीव्रता और उनके रास्तों में अंतर देखने को मिलता है।

गर्म समुद्री पानी से मिलती है ऊर्जा

चक्रवात को विकसित होने के लिए गर्म समुद्र और पर्याप्त नमी की जरूरत होती है। आमतौर पर समुद्र की सतह का तापमान करीब 26.5 डिग्री सेल्सियस या उससे अधिक होने पर चक्रवात बनने के लिए अनुकूल परिस्थितियां बन सकती हैं। हालांकि, केवल तापमान अधिक होना ही पर्याप्त नहीं है।

गर्म समुद्र से पानी वाष्प बनकर ऊपर उठता है। ऊपर जाकर जलवाष्प के संघनन से ऊष्मा निकलती है, जो वायुमंडल में हवा को ऊपर उठने में मदद करती है। इससे सतह के पास कम दबाव का क्षेत्र मजबूत हो सकता है। अनुकूल परिस्थितियां बनी रहने पर यही सिस्टम विकसित होकर चक्रवाती तूफान का रूप ले सकता है।

नदियों के मीठे पानी का क्या है असर?

गंगा, ब्रह्मपुत्र और अन्य बड़ी नदियां बंगाल की खाड़ी में भारी मात्रा में मीठा पानी पहुंचाती हैं। मीठा पानी खारे पानी की तुलना में कम घनत्व वाला होता है, इसलिए समुद्र की ऊपरी परत में अपेक्षाकृत हल्की परत बन सकती है।

कुछ परिस्थितियों में यह परत समुद्र के भीतर से ठंडे पानी के ऊपर आने को सीमित करती है। इससे तूफान के गुजरने के दौरान समुद्र की सतह जल्दी ठंडी नहीं होती और चक्रवात को ऊर्जा मिलती रह सकती है। हालांकि, इसका प्रभाव समुद्री धाराओं, पानी की गहराई और मौसम की परिस्थितियों पर भी निर्भर करता है।

हवाओं की गति भी तय करती है तूफान की ताकत

चक्रवात के विकास में वर्टिकल विंड शीयर यानी अलग-अलग ऊंचाइयों पर हवाओं की गति और दिशा में अंतर की अहम भूमिका होती है।

जब विंड शीयर ज्यादा मजबूत होता है, तो यह चक्रवात के बादलों और उसके केंद्र के बीच संतुलन बिगाड़ सकता है। इसके विपरीत, कमजोर विंड शीयर चक्रवात को व्यवस्थित होने और मजबूत बनने के लिए अनुकूल परिस्थितियां दे सकता है। इसके साथ ही वातावरण में नमी और समुद्र की ऊष्मा भी जरूरी होती है।

अक्टूबर-नवंबर में क्यों बढ़ जाती है चक्रवात की आशंका?

उत्तर हिंद महासागर में चक्रवातों के लिए आम तौर पर दो प्रमुख मौसम माने जाते हैं। पहला प्री-मानसून सीजन, जो अप्रैल से जून के बीच होता है, और दूसरा पोस्ट-मानसून सीजन, जो अक्टूबर से दिसंबर तक रहता है।

मानसून की वापसी के बाद समुद्र में बची गर्मी, वातावरण में नमी और हवाओं की अनुकूल स्थिति मिलकर चक्रवात बनने में मदद कर सकती है। इसी कारण अक्टूबर और नवंबर के दौरान बंगाल की खाड़ी में चक्रवाती गतिविधियों पर विशेष नजर रखी जाती है।

चक्रवात के दौरान सुरक्षा क्यों जरूरी?

तटीय इलाकों में चक्रवात के कारण तेज हवाएं, भारी बारिश, समुद्र में ऊंची लहरें और बाढ़ जैसी स्थितियां बन सकती हैं। ऐसे समय में मौसम विभाग और स्थानीय प्रशासन की चेतावनियों का पालन करना, सुरक्षित स्थानों पर जाना और समुद्र में जाने से बचना जरूरी है।