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साइबर गतिविधियों पर चेतावनी को उत्तर कोरिया ने बताया 'घिसा पिटा आरोप', बोला- अमेरिका जिम्मेदार

 

सोल, 4 अगस्त (आईएएनएस)। उत्तर कोरिया ने उसकी साइबर गतिविधियों और सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) कर्मियों को लेकर दक्षिण कोरिया, अमेरिका, जापान और अन्य देशों द्वारा हाल ही में जारी संयुक्त चेतावनी को खारिज कर दिया है। उसने इसे "झूठी जानकारी पर आधारित राजनीतिक आरोप" बताया है।

पिछले सप्ताह दक्षिण कोरिया, अमेरिका, जापान सहित 11 देशों ने एक संयुक्त चेतावनी जारी कर आरोप लगाया था कि उत्तर कोरिया के आईटी कर्मचारी फर्जी पहचान और जाली दस्तावेजों का इस्तेमाल कर विदेशी कंपनियों में फ्रीलांस और रिमोट नौकरियां हासिल करते हैं। इन गतिविधियों से अर्जित विदेशी मुद्रा का उपयोग प्योंगयांग अपने वेपन प्रोग्राम के लिए करता है। इसी वजह से देशों और कंपनियों को कर्मचारियों की पहचान सत्यापन प्रक्रिया और साइबर सुरक्षा उपाय मजबूत करने की सलाह दी गई थी।

मंगलवार को उत्तर कोरिया की सरकारी समाचार एजेंसी केसीएनए के बयान का हवाला देते हुए योनहाप न्यूज एजेंसी ने बताया कि विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि अमेरिका और उसके सहयोगियों की यह संयुक्त चेतावनी उत्तर कोरिया की छवि खराब करने के उद्देश्य से लगाया गया एक "घिसा-पिटा राजनीतिक आरोप" है।

प्रवक्ता ने पलटवार करते हुए कहा कि साइबर क्षेत्र के सैन्यीकरण के लिए वास्तव में अमेरिका जिम्मेदार है। उनके अनुसार, वाशिंगटन लगातार अपनी साइबर युद्ध क्षमता बढ़ा रहा है और सहयोगी देशों के साथ संयुक्त साइबर अभ्यास आयोजित कर रहा है।

बयान में कहा गया कि दुनिया की सबसे बड़ी साइबर क्षमता रखने वाला अमेरिका यदि दूसरे देशों से साइबर खतरे की बात करता है, तो यह तर्कसंगत नहीं है। उत्तर कोरिया का आरोप है कि "साइबर खतरे" का मुद्दा केवल संप्रभु देशों पर दबाव बनाने और अपनी नीतियों को उचित ठहराने का बहाना है।

उत्तर कोरिया ने यह भी कहा कि साइबर क्षेत्र पूरी मानवता की साझा संपत्ति है और गलत सूचनाओं के आधार पर उसमें वर्चस्व स्थापित करने की कोशिश स्वीकार नहीं की जा सकती।

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने स्पष्ट किया कि प्योंगयांग साइबर मुद्दे को राजनीतिक और वैचारिक दबाव का माध्यम बनाने के किसी भी प्रयास को स्वीकार नहीं करेगा तथा हर क्षेत्र में अपने राष्ट्रीय सुरक्षा और विकास हितों की रक्षा करता रहेगा।

--आईएएनएस

केआर/