दिल्ली पुलिस ने दो साइबर ठगों को गिरफ्तार किया, 3.60 करोड़ फ्रॉड का आरोप
नई दिल्ली, 9 अप्रैल (आईएएनएस)। दिल्ली पुलिस की साइबर शाहदरा टीम ने ऑनलाइन फ्रॉड का बड़ा भंडाफोड़ किया है। टीम ने दो आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है, जिन पर लगभग 3.60 करोड़ रुपए के साइबर फ्रॉड करने का आरोप है। दोनों आरोपी टेलीग्राम और म्यूल अकाउंट्स का इस्तेमाल करके लोगों को ठगते थे। पुलिस ने उनके पास से दो मोबाइल और फ्रॉड से जुड़ी टेलीग्राम चैट्स भी बरामद की हैं।
यह मामला तब सामने आया जब दिल्ली के पीयूष नाम के एक व्यक्ति ने साइबर पुलिस स्टेशन शाहदरा में शिकायत दर्ज कराई। पीयूष ने बताया कि उसकी जानकारी के बिना उसके बैंक खाते से 6,65,992 रुपए निकाल लिए गए। वह पहले ऑनलाइन गेमिंग से जुड़ा हुआ था। 27 अक्टूबर 2025 से 30 अक्टूबर 2025 के बीच उसके खाते में कई अनधिकृत लेन-देन हुए। बाद में पता चला कि उसके मोबाइल में एक अनजान एपीके फाइल इंस्टॉल हो गई थी, जिसके जरिए फ्रॉड करने वालों ने उसके फोन तक पहुंच बना ली थी। इस शिकायत पर प्राथमिकी दर्ज की गई।
मामले की जांच इंस्पेक्टर विजय कुमार के नेतृत्व में शुरू हुई। डीसीपी शाहदरा के निर्देश पर एसआई पुष्पेंद्र पांडे, एसआई एस.बी. शरण, एचसी सचिन शालोट और एचसी कपिल की एक विशेष टीम गठित की गई। टीम ने बैंक लेन-देन के रिकॉर्ड, तकनीकी निगरानी और डिजिटल सबूतों का गहराई से विश्लेषण किया। जांच में पता चला कि फ्रॉड की रकम 'आर.पी. टोल एंड पार्किंग' नाम से एक्सिस बैंक के एक खाते में ट्रांसफर की गई थी। इस खाते को राम अवतार सिंह नाम का व्यक्ति संचालित कर रहा था, जो आगरा के शास्त्री पुरम, सिकंदरा का रहने वाला है।
पुलिस टीम ने तकनीकी जानकारी के आधार पर आगरा के शास्त्री पुरम में छापा मारा और राम अवतार सिंह को गिरफ्तार कर लिया। पूछताछ के दौरान उसने खुलासा किया कि वह विक्रांत सोनी नाम के दूसरे व्यक्ति के साथ मिलकर यह धोखाधड़ी कर रहा था। इसके बाद टीम जगदीशपुरा, आगरा पहुंची और वहां छापा मारकर विक्रांत सोनी को भी पकड़ लिया। दोनों को तकनीकी सबूतों और पूछताछ के आधार पर औपचारिक रूप से गिरफ्तार किया गया।
पूछताछ में विक्रांत सोनी ने अपना पूरा गुनाह कबूल किया। उसने बताया कि वर्ष 2023 में उसकी मुलाकात पिंकी यादव नाम की एक महिला से हुई, जिसने उसे विदेश में अच्छी नौकरी और कमाई का लालच दिया। बाद में टेलीग्राम के जरिए उसका संपर्क लियो नाम के एक चीनी व्यक्ति से हुआ। जुलाई 2024 में उसे बैंकॉक भेजा गया और फिर सड़क मार्ग से कंबोडिया के नोम पेन्ह ले जाया गया। वहां संगठित साइबर फ्रॉड शिविरों में उसे 3-4 महीने की ट्रेनिंग दी गई। ट्रेनिंग में भारतीय लोगों को ठगने की तकनीकें, सोशल इंजीनियरिंग, मैलिशियस एपीके लिंक भेजना और स्क्रिप्ट के जरिए बातचीत करना सिखाया गया।
ट्रेनिंग पूरी होने के बाद विक्रांत भारत लौट आया और अपने साथियों के साथ मिलकर फ्रॉड का काम शुरू कर दिया। वह टेलीग्राम पर विदेशी हैंडलर्स से संपर्क बनाए रखता था। फ्रॉड से मिली रकम को म्यूल बैंक अकाउंट्स के जरिए आगे भेजा जाता था। पुलिस के अनुसार इस गिरोह ने कुल मिलाकर करीब 3.60 करोड़ रुपए की धोखाधड़ी की है।
--आईएएनएस
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