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सीएसडी में बड़े बदलाव की तैयारी: डिपो होंगे हाईटेक, सैनिकों को बेहतर सुविधाएं

 

नई दिल्ली, 14 जुलाई (आईएएनएस)। रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ ने कैंटीन सर्विसेज विभाग (सीएसडी) की 80वीं नियंत्रण बोर्ड बैठक में कई महत्वपूर्ण पहलुओं की समीक्षा की है। इस बैठक में देशभर के सीएसडी डिपो के आधुनिकीकरण, इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहनों पर सब्सिडी, स्वदेशी और सहकारी उत्पादों को बढ़ावा देने तथा पूर्व सैनिकों और उनके परिवारों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने पर विशेष जोर दिया गया।

बैठक में सहकारी संस्थाओं और स्वदेशी संगठनों के उत्पादों को सीएसडी की आपूर्ति श्रृंखला में शामिल करने की प्रगति की भी समीक्षा की गई। रक्षा राज्य मंत्री ने बताया कि खादी एवं ग्रामोद्योग, जनजातीय उत्पादों, किसान संगठनों और विभिन्न सहकारी संस्थाओं द्वारा निर्मित वस्तुओं को चरणबद्ध तरीके से सीएसडी के उत्पाद पोर्टफोलियो में शामिल किया जा रहा है।

संजय सेठ ने कहा कि यह पहल केवल सीएसडी के उत्पादों की विविधता बढ़ाने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका सीधा लाभ देश के कारीगरों, किसानों, जनजातीय समुदायों और सहकारी संस्थाओं को मिलेगा। इससे उन्हें बड़ा बाजार उपलब्ध होगा और स्वदेशी विनिर्माण को नई गति मिलेगी। यह पहल आत्मनिर्भर भारत, सहकार से समृद्धि और वोकल फॉर लोकल जैसे राष्ट्रीय अभियानों को भी मजबूती प्रदान करेगी। झारखंड की राजधानी रांची में आयोजित इस बैठक में रक्षा मंत्रालय, तीनों सेनाओं और कैंटीन सर्विसेज विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने हिस्सा लिया।

बैठक का उद्देश्य सीएसडी की कार्यप्रणाली को और अधिक आधुनिक, पारदर्शी तथा लाभार्थी-केंद्रित बनाना था, ताकि सेवारत सैनिकों, पूर्व सैनिकों और उनके आश्रितों को बेहतर सेवाएं मिल सकें। बैठक में सबसे प्रमुख विषयों में सीएसडी के लिए बजटीय सहायता बढ़ाने का प्रस्ताव रहा। इसके अलावा, देशभर के सीएसडी डिपो को आधुनिक बनाने की योजना पर भी विस्तार से चर्चा की गई।

अधिकारियों ने बताया कि बढ़ती मांग और बदलती आवश्यकताओं को देखते हुए डिपो को आधुनिक भंडारण एवं लॉजिस्टिक्स केंद्रों के रूप में विकसित किया जा रहा है। एक अन्य महत्वपूर्ण विषय सीएसडी के माध्यम से खरीदे जाने वाले इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहनों पर केंद्र और राज्य सरकारों की सब्सिडी का विस्तार था। इस कदम से सैनिकों और पूर्व सैनिकों को पर्यावरण-अनुकूल वाहनों की खरीद में अतिरिक्त लाभ मिल सकता है। बैठक के दौरान दिव्यांग सैनिकों, पूर्व सैनिकों और उनके आश्रितों के लिए सहायक उपकरणों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के विषय पर भी गंभीर चर्चा हुई।

अधिकारियों ने इस वर्ग की विशेष आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए सुविधाओं का दायरा बढ़ाने पर विचार-विमर्श किया। रांची दौरे के दौरान संजय सेठ ने रामगढ़ स्थित सीएसडी डिपो का भी निरीक्षण किया। यह देश के उन पांच पायलट डिपो में शामिल है जिन्हें आधुनिक बनाने के लिए चुना गया है। उन्होंने वहां उपलब्ध बुनियादी ढांचे और चल रहे उन्नयन कार्यों का जायजा लिया। सरकार की योजना इन डिपो को आधुनिक वेयरहाउस और लॉजिस्टिक्स केंद्रों में बदलने की है, ताकि वितरण व्यवस्था अधिक तेज, प्रभावी और तकनीक-सक्षम बन सके।

अधिकारियों के अनुसार, रामगढ़ मॉडल भविष्य में देशभर के अन्य सीएसडी डिपो के आधुनिकीकरण का आधार बनेगा। इससे न केवल आपूर्ति प्रणाली मजबूत होगी, बल्कि सैनिकों और पूर्व सैनिकों को वस्तुओं की उपलब्धता भी अधिक सुगम हो सकेगी।

रक्षा राज्य मंत्री ने पूर्व सैनिकों के कल्याण से जुड़ी विभिन्न पहलों की भी समीक्षा की और सेवा वितरण प्रणाली को अधिक सुलभ एवं सुविधाजनक बनाने के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि सरकार रक्षा बलों के वर्तमान और पूर्व कर्मियों के कल्याण के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है और यह सुनिश्चित किया जाएगा कि लाभार्थी-केंद्रित योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन हो।

उन्होंने अधिकारियों से निरंतर नवाचार, बेहतर प्रबंधन और समयबद्ध कार्यान्वयन पर ध्यान देने का आह्वान करते हुए कहा कि सीएसडी को भविष्य की जरूरतों के अनुरूप तैयार करना समय की मांग है। ऐसा इसलिए ताकि देश के सैनिकों, पूर्व सैनिकों और उनके परिवारों को सर्वोत्तम सुविधाएं उपलब्ध कराई जा सकें।

--आईएएनएस

जीसीबी/डीकेपी