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किचन पर संकट के बादल: जानिए भारत में रोजाना कितनी LPG का होता है इस्तेमाल और क्या हैं सरकार की तैयारियां

 

पश्चिम एशिया में युद्ध के गहराते संकट ने भारत की कुकिंग गैस सप्लाई चेन के सामने एक बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है। ईरान और इज़राइल-अमेरिका गुट के बीच बढ़ते तनाव के कारण, होर्मुज़ जलडमरूमध्य—जो दुनिया का सबसे संवेदनशील समुद्री मार्ग है—अशांति की स्थिति में है। भारत अपनी LPG ज़रूरतों का 60 प्रतिशत हिस्सा आयात करता है, जिसका 90 प्रतिशत इसी मार्ग से होकर गुज़रता है। इस पृष्ठभूमि में, गुजरात के बंदरगाहों पर 92,000 मीट्रिक टन गैस लेकर दो भारतीय जहाज़ों का पहुँचना देश के लिए बड़ी राहत लेकर आया है।

भारत में LPG की खपत और आयात पर निर्भरता

पेट्रोलियम योजना और विश्लेषण प्रकोष्ठ (PPAC) की ताज़ा रिपोर्ट के अनुसार, फरवरी 2026 में भारत में LPG की खपत 2,822 मीट्रिक टन दर्ज की गई। यह आँकड़ा पिछले महीनों की तुलना में थोड़ी गिरावट दर्शाता है, क्योंकि जनवरी 2026 में खपत 3,034 मीट्रिक टन और दिसंबर 2025 में 3,068 मीट्रिक टन थी। भारत अपनी कुल LPG माँग का 60 प्रतिशत हिस्सा विदेशों से आयात करता है। प्रेस सूचना ब्यूरो (PIB) के आँकड़ों से पता चलता है कि इस आयातित गैस का 90 प्रतिशत हिस्सा विशेष रूप से होर्मुज़ जलडमरूमध्य के रास्ते ही भारत पहुँचता है।

पश्चिम एशिया संघर्ष और सप्लाई संकट

पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष ने समुद्री व्यापार मार्गों को असुरक्षित बना दिया है। अमेरिका और इज़राइल के हमलों के बाद ईरान के सर्वोच्च नेता, अयातुल्ला अली खामेनेई की मृत्यु की खबरों ने स्थिति को और भी ज़्यादा गंभीर बना दिया है। चूंकि भारत की अधिकांश गैस आयात इसी प्रभावित क्षेत्र से होकर गुज़रती है, इसलिए सप्लाई में रुकावट का खतरा मंडरा रहा है। इसे ध्यान में रखते हुए, भारत सरकार ने घरेलू LPG उत्पादन को तत्काल 25 प्रतिशत तक बढ़ाने के सख्त निर्देश जारी किए हैं।

घरेलू उपभोक्ताओं को प्राथमिकता और सरकारी निर्देश

संकट की इस घड़ी में, सरकार का मुख्य ध्यान घरेलू उपभोक्ताओं पर बना हुआ है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि कुकिंग गैस का उपयोग करने वाले आम नागरिकों का, बढ़े हुए उत्पादन पर पहला अधिकार होगा। इसके अलावा, देश के भीतर गैस की जमाखोरी और कालाबाज़ारी को रोकने के लिए कड़ी निगरानी के आदेश भी जारी किए गए हैं। युद्ध की खबरों के बीच, कई इलाकों में लोग बेवजह गैस सिलेंडरों का ज़खीरा जमा कर रहे हैं; इसे रोकने के लिए प्रशासन पूरी तरह से सतर्क है। 'शिवालिक' और 'नंदा देवी' गुजरात पहुँचे

आपूर्ति को लेकर बनी अनिश्चितताओं के बीच, भारत के झंडे वाले दो जहाज़ों—'शिवालिक' और 'नंदा देवी'—का आगमन भारत के लिए एक बड़ी रणनीतिक जीत है। 'शिवालिक' गुजरात के मुंद्रा बंदरगाह पर सफलतापूर्वक पहुँच गया है, जबकि 'नंदा देवी' वडीनार बंदरगाह पर पहुँचा है। कुल मिलाकर, ये दोनों जहाज़ लगभग 92,000 मीट्रिक टन LPG लेकर आए हैं। तकनीकी अनुमानों के अनुसार, यह मात्रा इतनी विशाल है कि इससे पूरे देश में एक साथ 64 लाख से भी ज़्यादा LPG सिलिंडरों को फिर से भरा जा सकता है।