×

Coolie Interesting Facts: रेलवे स्टेशन पर कुली लाल कपड़े में ही क्यों दिखते हैं? जानिए वजह

 

आपने अक्सर रेलवे स्टेशन पर यात्रा करते समय कुलियों को जरूर देखा होगा। ये कुली यात्रियों का सामान ढोते हैं और अक्सर लाल रंग की यूनिफॉर्म या लाल कपड़ों में नजर आते हैं। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि आखिर कुली लाल कपड़े ही क्यों पहनते हैं? इसके पीछे सिर्फ एक परंपरा नहीं, बल्कि कई महत्वपूर्ण कारण भी छिपे हुए हैं।

भारतीय रेलवे में कुलियों की भूमिका काफी पुरानी और अहम रही है। आधुनिक समय में इन्हें “पोर्टर” भी कहा जाता है, लेकिन आम बोलचाल में आज भी लोग इन्हें कुली ही कहते हैं। स्टेशन पर यात्रियों का भारी सामान उठाने से लेकर उन्हें सही प्लेटफॉर्म तक पहुंचाने तक, कुली एक महत्वपूर्ण सेवा प्रदान करते हैं।

अब बात करते हैं उनके लाल कपड़ों की। सबसे पहला और प्रमुख कारण है पहचान (Visibility)। रेलवे स्टेशन जैसे भीड़भाड़ वाले स्थान पर हजारों यात्री आते-जाते रहते हैं। ऐसे में अगर कुली एक जैसे और चमकीले रंग के कपड़े पहनें तो उन्हें आसानी से पहचाना जा सकता है। लाल रंग दूर से ही ध्यान आकर्षित करता है, जिससे यात्री तुरंत कुली को पहचान सकते हैं।

दूसरा कारण है व्यावहारिकता और परंपरा। लाल रंग लंबे समय से कुलियों की यूनिफॉर्म के रूप में इस्तेमाल होता आ रहा है। यह परंपरा कई दशकों पुरानी है, जिसे समय के साथ जारी रखा गया है। इससे एक पेशेवर पहचान भी बनती है और यात्रियों के बीच भरोसा भी बढ़ता है।

तीसरा कारण है सुरक्षा और संगठन। रेलवे स्टेशन पर काम करते समय भीड़ और भागदौड़ के बीच कुलियों की अलग पहचान होना जरूरी होता है। लाल कपड़े पहनने से वे भीड़ से अलग नजर आते हैं, जिससे न केवल यात्री उन्हें आसानी से ढूंढ पाते हैं बल्कि रेलवे प्रशासन को भी व्यवस्था बनाए रखने में मदद मिलती है।

इसके अलावा, यह भी माना जाता है कि लाल रंग ऊर्जा और सक्रियता का प्रतीक होता है। कुलियों का काम शारीरिक रूप से काफी मेहनत वाला होता है, जिसमें लगातार सामान उठाना और चलना शामिल होता है। ऐसे में यह रंग उनकी मेहनत और सक्रिय भूमिका को भी दर्शाता है।

समय के साथ रेलवे स्टेशन और व्यवस्था में कई बदलाव आए हैं, लेकिन कुलियों की भूमिका आज भी उतनी ही महत्वपूर्ण बनी हुई है। भले ही तकनीक और ट्रॉली सिस्टम आ गए हों, लेकिन यात्रियों को व्यक्तिगत सहायता देने में कुलियों की भूमिका को अभी भी अनदेखा नहीं किया जा सकता।

आज भी देश के लगभग हर बड़े रेलवे स्टेशन पर कुली अपनी लाल वर्दी में यात्रियों की मदद करते नजर आते हैं। उनकी यह पहचान न केवल परंपरा का हिस्सा है, बल्कि रेलवे की व्यवस्था का एक महत्वपूर्ण प्रतीक भी बन चुकी है।

कुल मिलाकर, कुलियों के लाल कपड़े सिर्फ एक यूनिफॉर्म नहीं हैं, बल्कि यह उनकी पहचान, परंपरा और उपयोगिता तीनों का प्रतीक हैं। अगली बार जब आप स्टेशन जाएं और किसी लाल कपड़े वाले कुली को देखें, तो आपको उनके इस खास रंग के पीछे की वजह जरूर याद आएगी।