कांग्रेस सांसद राहुल गांधी संविधान और लोकतंत्र की लड़ाई लड़ रहे हैं: पप्पू यादव
नई दिल्ली, 31 अक्टूबर (आईएएनएस)। निर्दलीय सांसद पप्पू यादव ने राहुल गांधी पर भाजपा सांसद रविशंकर प्रसाद की टिप्पणी, राष्ट्रीय एकता दिवस पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से विपक्ष की आलोचना और भारत में गरीबी कम होने को लेकर विश्व बैंक की रिपोर्ट पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि देश में लोकतांत्रिक संस्थाओं, संविधान, आम लोगों के अधिकारों और अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी लगातार संविधान की रक्षा और आम जनता के मुद्दों को उठाने की लड़ाई लड़ रहे हैं। विपक्ष अब एकजुट होकर लोकतंत्र और जनता के अधिकारों के लिए आवाज उठा रहा है।
राहुल गांधी पर रविशंकर प्रसाद की टिप्पणी को लेकर पप्पू यादव ने कहा कि भाजपा के नेता बहस की बात तो करते हैं, लेकिन यह स्पष्ट नहीं करते कि वे किन मुद्दों पर चर्चा चाहते हैं। उन्होंने केंद्र सरकार को निशाने पर लेते हुए उसे तानाशाही प्रवृत्ति वाली सरकार बताया। पप्पू यादव ने कहा कि लोकतांत्रिक संस्थाओं और चुनाव आयोग की निष्पक्षता को लेकर गंभीर सवाल हैं। विपक्ष को संसद में अपनी बात रखने का पर्याप्त अवसर नहीं मिलता और बाहर प्रदर्शन करने पर भी उसे दबाने की कोशिश होती है।
पप्पू यादव ने कहा कि पिछले 12 वर्षों में राहुल गांधी ने संविधान, मणिपुर, महिलाओं, किसानों, छात्रों और आम नागरिकों के अधिकारों से जुड़े मुद्दे लगातार उठाए हैं। उन्होंने मणिपुर से लेकर गोवा तक राहुल गांधी की यात्राओं और उनके राजनीतिक संघर्ष का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी ने मणिपुर के लोगों, पंजाब के किसानों, महिलाओं और छात्रों के मुद्दों को उठाया है। उन्होंने स्कूलों के बंद होने, व्यापारियों की परेशानियों, जीएसटी और मध्यम वर्ग पर आर्थिक दबाव जैसे विषयों को भी विपक्ष की लड़ाई का हिस्सा बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि राहुल गांधी की सदस्यता छीनी गई, उन्हें जेल भेजने की तैयारी की गई और उनका सरकारी आवास और सुरक्षा भी वापस ली गई, लेकिन वे सरकार के खिलाफ आवाज उठाते रहे। जब राहुल गांधी ने वोट चोरी का मुद्दा उठाया था, तब कई लोगों ने उनके सवालों को गंभीरता से नहीं लिया, लेकिन अब विपक्ष इस मुद्दे पर एकजुट हो रहा है।
उन्होंने भाजपा को चुनौती देते हुए कहा कि यदि उसे अपने जनसमर्थन पर इतना भरोसा है तो वह चुनावी चुनौती स्वीकार करे। विपक्ष बैलेट पेपर से चुनाव कराने की मांग और चुनावी प्रक्रिया को लेकर सवाल उठा रहा है। उन्होंने अयोध्या, बनारस और अन्य चुनावी क्षेत्रों में भाजपा की हार का उल्लेख करते हुए कहा कि इन नतीजों पर भी चर्चा होनी चाहिए।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इस बयान पर कि विपक्ष देश की प्रगति रोकना चाहता है, पप्पू यादव ने कहा कि सरकार को पहले देश की अर्थव्यवस्था और आम लोगों की आर्थिक स्थिति पर जवाब देना चाहिए। देश में बड़ी संख्या में स्कूल बंद हुए हैं और रोजगार के अवसरों को लेकर युवाओं में निराशा है। उन्होंने गैस, पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी का जिक्र करते हुए कहा कि महंगाई ने आम आदमी और मध्यम वर्ग की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। यादव ने दावा किया कि प्रधानमंत्री के सत्ता में आने के समय गैस की कीमत करीब 43 से 51 रुपए के बीच थी, जबकि अब यह लगभग 100 रुपए तक पहुंच गई है। उन्होंने पेट्रोल और डीजल की कीमतों को लेकर भी सवाल उठाए। साथ ही, रुपए की कीमत में गिरावट और बढ़ते कर्ज का उल्लेख करते हुए सरकार से जवाब मांगा।
उन्होंने कहा कि मध्यम वर्ग पर टैक्स और ईएमआई का दबाव बढ़ा है। सरकार को यह बताना चाहिए कि 12 वर्षों में कितनी नौकरियां दी गईं और युवाओं को रोजगार देने के वादे का क्या हुआ। सरकार आर्थिक मुद्दों से ध्यान हटाकर हिंदू-मुस्लिम, यूजीसी, यूसीसी, डीएनए, मंडल और आरक्षण जैसे विषयों पर विवाद पैदा करती है। देश को संविधान के अनुसार चलने देना चाहिए और आम लोगों के अधिकारों की रक्षा होनी चाहिए।
भारत में गरीबी कम होने को लेकर विश्व बैंक की रिपोर्ट पर पप्पू यादव ने सवाल उठाया कि जब महंगाई और आम लोगों की आर्थिक परेशानियां बढ़ रही हैं, तब गरीबी में कमी के आंकड़ों को किस आधार पर समझा जाए। उन्होंने प्रति व्यक्ति आय, रुपए की स्थिति, पेट्रोल की कीमत और देश पर बढ़ते कर्ज का उल्लेख करते हुए रिपोर्ट के निष्कर्षों पर सवाल उठाए। उन्होंने पूछा कि यदि देश में गरीबी इतनी कम हुई है तो बड़ी संख्या में लोगों को मुफ्त अनाज देने की जरूरत क्यों पड़ रही है। पप्पू यादव ने प्रधानमंत्री की ओर से 84 करोड़ लोगों को पांच किलो अनाज दिए जाने का उल्लेख करते हुए कहा कि सरकार को गरीबी और रोजगार के आंकड़ों पर स्पष्ट जवाब देना चाहिए। उन्होंने दो करोड़ नौकरियों के वादे का भी सवाल उठाया और कहा कि जनता को यह जानने का अधिकार है कि रोजगार के मोर्चे पर सरकार ने क्या हासिल किया है।
पप्पू यादव ने कहा कि देश में लोकतंत्र और संविधान की रक्षा के लिए विपक्ष एक साथ आ रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ लोगों के हाथों में सत्ता और संस्थाओं का नियंत्रण सिमटता जा रहा है, जिससे लोकतांत्रिक व्यवस्था कमजोर हो रही है। उन्होंने चुनाव आयोग से जुड़े मुद्दों पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि संवैधानिक संस्थाओं की निष्पक्षता बनाए रखना जरूरी है। गरीब महिलाएं, किसान, संत-महात्मा और अलग-अलग क्षेत्रों के लोग लोकतंत्र तथा संविधान की रक्षा के लिए आवाज उठा रहे हैं। बिहार से बड़ी संख्या में लोगों के दिल्ली पहुंचने का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि करीब दस हजार लोग इस लड़ाई में शामिल होने के लिए आ रहे हैं। पप्पू यादव ने कहा कि यह संघर्ष केवल राजनीतिक दलों का नहीं, बल्कि देश के करोड़ों नागरिकों के अधिकारों का है।
--आईएएनएस
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