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कांग्रेस ने टिकट बंटवारे में परिवारवाद पर खेला दांव, वीडियो में जाने Gen Z से 70 साल तक के उम्मीदवार मैदान में

 

जयपुर नगर निगम चुनाव के लिए कांग्रेस के टिकट बंटवारे में इस बार परिवारवाद, युवाओं और नए चेहरों का मिला-जुला असर दिखाई दे रहा है। पार्टी ने अपने कई नेताओं और पदाधिकारियों के परिवारों को टिकट दिया है। साथ ही युवाओं को भी बड़ी संख्या में मौका दिया गया है। दूसरी ओर, कई पुराने पार्षदों और चुनाव हार चुके नेताओं को टिकट से बाहर रखा गया है। जयपुर नगर निगम के नए परिसीमन के बाद इस बार कुल 150 वार्ड हैं और दोनों प्रमुख दलों ने बड़ी संख्या में नए चेहरों पर दांव लगाया है।

नेताओं के परिवारों को भी मिला टिकट

कांग्रेस के टिकट वितरण में कई जगह नेताओं के परिवार के सदस्यों को

<a style="border: 0px; overflow: hidden" href=https://youtube.com/embed/t8CwxyejsVg?autoplay=1&mute=1><img src=https://img.youtube.com/vi/t8CwxyejsVg/hqdefault.jpg alt=""><span><div class="youtube_play"></div></span></a>" style="border: 0px; overflow: hidden;" width="640"> मैदान में उतारा गया है। कई वार्डों में जहां पहले पति या परिवार का कोई सदस्य चुनाव लड़ चुका था, वहां इस बार उसकी पत्नी या परिवार के दूसरे सदस्य को टिकट दिया गया है। इससे पार्टी के भीतर परिवारवाद को लेकर चर्चा भी शुरू हो गई है।कांग्रेस की रणनीति के पीछे स्थानीय राजनीतिक पकड़ और परिवार के पुराने जनसंपर्क का फायदा उठाने की कोशिश मानी जा रही है। हालांकि टिकट वितरण को लेकर पार्टी के भीतर असंतोष और बगावत के स्वर भी सामने आए हैं।

Gen Z से 70 साल तक के उम्मीदवार

कांग्रेस ने इस बार उम्र के लिहाज से भी काफी विविधता दिखाई है। पार्टी के उम्मीदवारों में Gen Z यानी युवा पीढ़ी के चेहरों से लेकर करीब 70 साल की उम्र के वरिष्ठ नेताओं तक को मौका दिया गया है।युवाओं को टिकट देने के पीछे पार्टी की कोशिश नए मतदाताओं को जोड़ने और नगर निगम में नई पीढ़ी की भागीदारी बढ़ाने की है। वहीं अनुभवी नेताओं को मैदान में उतारकर पार्टी ने पुराने संगठनात्मक अनुभव और स्थानीय पकड़ का फायदा उठाने की कोशिश की है।

बागियों को भी मिला दूसरा मौका

कांग्रेस ने पिछले नगर निगम चुनावों में पार्टी से बगावत कर निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़ चुके कुछ नेताओं को भी इस बार टिकट दिया है। ऐसे नेताओं को दोबारा पार्टी के साथ जोड़ने की रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है।लांकि पार्टी के भीतर कुछ नेताओं ने टिकट वितरण पर सवाल उठाए हैं। टिकट को लेकर असंतोष के बीच कांग्रेस के सामने अपने उम्मीदवारों को एकजुट रखना बड़ी चुनौती होगी। पार्टी ने चुनाव से पहले उम्मीदवारों की निष्ठा और वार्ड बदलकर चुनाव लड़ने जैसे मुद्दों पर भी सख्त रुख अपनाने की बात कही थी।

सुनीता महावर को फिर मिला मौका

पिछले चुनाव में मेयर पद की दावेदारी करने वाली वरिष्ठ पार्षद सुनीता महावर को कांग्रेस ने एक बार फिर टिकट दिया है। उनके अनुभव और नगर निगम की राजनीति में सक्रिय भूमिका को देखते हुए पार्टी ने उन पर भरोसा जताया है।उनकी उम्मीदवारी को कांग्रेस के वरिष्ठ और अनुभवी चेहरों को साथ लेकर चलने की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।

सिविल लाइंस में नए चेहरों पर दांव

सिविल लाइंस विधानसभा क्षेत्र के वार्डों में कांग्रेस ने इस बार खास तौर पर नए चेहरों को मौका दिया है। पार्टी ने यहां चुनाव हार चुके या पहले से पार्षद रह चुके कई नेताओं को टिकट नहीं दिया।इससे संकेत मिलता है कि कांग्रेस इन वार्डों में पुराने चेहरों के बजाय नए उम्मीदवारों के जरिए मतदाताओं के बीच नई उम्मीद पैदा करने की कोशिश कर रही है। नए परिसीमन के बाद वार्डों की सीमाएं और चुनावी समीकरण बदल चुके हैं, ऐसे में दोनों दलों ने बड़े पैमाने पर नए चेहरों को मौका दिया है।

83 फीसदी मौजूदा पार्षदों के टिकट कटे

जयपुर नगर निगम चुनाव में इस बार पुराने पार्षदों के टिकट काटने का ट्रेंड कांग्रेस और बीजेपी दोनों में दिखाई दे रहा है। एक रिपोर्ट के मुताबिक दोनों दलों ने मिलाकर करीब 82.8 फीसदी यानी 207 मौजूदा पार्षदों को दोबारा टिकट नहीं दिया है। इसके पीछे परिसीमन, नए वार्डों के गठन और एंटी-इंकम्बेंसी से बचने की रणनीति को प्रमुख कारण माना जा रहा है।कांग्रेस के टिकट वितरण से साफ है कि पार्टी ने इस बार अनुभव और नए चेहरों के बीच संतुलन बनाने की कोशिश की है। परिवार के सदस्यों, युवाओं, महिलाओं और कुछ पुराने बागियों को जगह देकर पार्टी ने अलग-अलग राजनीतिक समीकरण साधने का प्रयास किया है। अब चुनौती इन सभी उम्मीदवारों को एकजुट कर चुनाव मैदान में उतारने और अंदरूनी नाराजगी को नियंत्रित करने की होगी।