जाति जनगणना के सवालों पर कांग्रेस ने जताई आपत्ति, वीडियो में जाने खड़गे-राहुल ने PM मोदी को लिखा पत्र; OBC का सही आंकड़ा सामने आने पर उठाए सवाल
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने आगामी जनगणना में जातियों के नाम दर्ज करने और डेटा जुटाने की प्रक्रिया को लेकर केंद्र सरकार के सामने कई सवाल उठाए हैं। दोनों नेताओं ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर जनगणना में पूछे जाने वाले सवालों में बदलाव करने की मांग की है। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि जाति जनगणना से जुड़े प्रश्नों और प्रक्रिया को अंतिम रूप देने से पहले राजनीतिक दलों, विशेषज्ञों और आम जनता से व्यापक स्तर पर सलाह ली जानी चाहिए।
खड़गे और राहुल गांधी ने विशेष रूप से जनगणना के सवालों में ‘पिछड़ा वर्ग’ शब्द का उल्लेख नहीं होने पर आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि यदि प्रश्नावली में पिछड़े वर्ग से संबंधित स्पष्ट विकल्प नहीं होंगे, तो देश में अन्य पिछड़ा वर्ग यानी OBC की आबादी का वास्तविक और सटीक आंकड़ा सामने लाने में परेशानी हो सकती है। कांग्रेस नेताओं ने जातिगत आंकड़े जुटाने के लिए तेलंगाना और बिहार में अपनाई गई प्रक्रियाओं का हवाला देते हुए इसी तरह की व्यवस्था लागू करने की मांग की है।
कांग्रेस का तर्क है कि जाति से संबंधित जानकारी केवल आंकड़ा जुटाने की प्रक्रिया नहीं है, बल्कि इसका सीधा संबंध देश में सामाजिक और आर्थिक नीतियों के निर्माण से है। ऐसे में जाति जनगणना में इस्तेमाल होने वाले सवालों और डेटा संग्रह की पद्धति को स्पष्ट, व्यापक और वैज्ञानिक बनाया जाना जरूरी है। पार्टी का कहना है कि इस प्रक्रिया में सभी राजनीतिक दलों और संबंधित विशेषज्ञों की राय ली जानी चाहिए, ताकि बाद में आंकड़ों की विश्वसनीयता को लेकर कोई विवाद खड़ा न हो।
पहली डिजिटल जनगणना होगी 2027 में
जनगणना 2027 को देश की पहली डिजिटल जनगणना के तौर पर आयोजित किया जाएगा। इस प्रक्रिया में जनसंख्या से जुड़ा डेटा डिजिटल माध्यम से दर्ज किया जाएगा। लोगों को अपनी जानकारी खुद उपलब्ध कराने यानी सेल्फ-एन्यूमरेशन का विकल्प भी दिया जाएगा। इससे जनगणना प्रक्रिया को पहले की तुलना में अधिक तकनीकी और डिजिटल स्वरूप मिलने की उम्मीद है।जनगणना की कानूनी प्रक्रिया सेंसस एक्ट, 1948 और सेंसस रूल्स, 1990 के तहत पूरी की जाएगी। केंद्र सरकार की ओर से यह स्पष्ट किया गया है कि जनगणना के दौरान लोगों द्वारा दी जाने वाली व्यक्तिगत जानकारी पूरी तरह गोपनीय रखी जाएगी। इसका उद्देश्य नागरिकों की निजी जानकारी को सुरक्षित रखना है।
व्यक्तिगत जानकारी सार्वजनिक नहीं की जा सकेगी
केंद्र के अनुसार सेंसस एक्ट की धारा 15 के तहत जनगणना के दौरान दर्ज की गई व्यक्तिगत जानकारी को सार्वजनिक नहीं किया जा सकता। इसे सूचना का अधिकार यानी RTI के तहत भी उपलब्ध नहीं कराया जा सकता। इसके अलावा ऐसी व्यक्तिगत जानकारी को किसी अदालत में सबूत के तौर पर इस्तेमाल करने की भी अनुमति नहीं है।जाति जनगणना को लेकर कांग्रेस की ओर से उठाए गए सवालों के बाद अब निगाहें केंद्र सरकार के अगले कदम पर हैं। कांग्रेस चाहती है कि जनगणना की प्रवली तैयार करने और जातिगत आंकड़े जुटाने की प्रक्रिया में सभी पक्षों से चर्चा की जाए, ताकि देश की सामाजिक संरचना से जुड़े आंकड़े अधिक सटीक और भरोसेमंद तरीके से सामने आ सकें।