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कांग्रेस की लड़ाई व्यापारियों के खिलाफ नहीं, वोट के अधिकार के लिए है: रविंदर शर्मा

 

जम्मू, 27 अक्टूबर (आईएएनएस)। कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता रविंदर शर्मा ने दिल्ली के रामलीला मैदान में 1 नवंबर को होने वाले कार्यक्रम से पहले व्यापारियों की चिंताओं, भारतीय सेना को निशाना बनाने वाले कथित एआई-जनित वीडियो और जम्मू-कश्मीर में कैबिनेट विस्तार को लेकर नेशनल कॉन्फ्रेंस में असंतोष के मुद्दे पर अपनी बात रखी। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा लोकतांत्रिक संस्थाओं को कमजोर करने और जम्मू-कश्मीर की चुनी हुई सरकार को अस्थिर करने की कोशिश कर रही है। शर्मा ने यह भी कहा कि कांग्रेस की लड़ाई किसी व्यापारी या वर्ग के खिलाफ नहीं, बल्कि नागरिकों के मतदान के अधिकार और लोकतंत्र की रक्षा के लिए है।

राहुल गांधी की ओर से व्यापारियों से अपनी चिंताओं को सरकार तक पहुंचाने और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को हटाने की मांग के संदर्भ में रविंदर शर्मा ने कहा कि कांग्रेस का उद्देश्य व्यापारियों को नुकसान पहुंचाना नहीं है। कांग्रेस पहले दशहरे तक अपना कार्यक्रम टाल चुकी थी और बाद में रामलीला मैदान में रैली की अनुमति मिलने के बाद कार्यक्रम तय किया गया। कांग्रेस का पूरा कार्यक्रम मैदान के अंदर आयोजित करने की योजना है और सड़कों पर ऐसा प्रदर्शन करने का इरादा नहीं है, जिससे कारोबार प्रभावित हो।

शर्मा ने सवाल उठाया कि भाजपा की ओर से भी यात्रा या पदयात्रा निकाली जा रही है तो व्यापारियों को नुकसान पहुंचने की आशंका केवल कांग्रेस के कार्यक्रम को लेकर क्यों जताई जा रही है? उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में अपनी मांग उठाने के लिए उपलब्ध रास्तों का इस्तेमाल करना विपक्ष का अधिकार है।

कांग्रेस प्रवक्ता ने मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ संसद में दिए गए महाभियोग प्रस्ताव का उल्लेख करते हुए आरोप लगाया कि उस पर चर्चा नहीं होने दी जा रही है। उन्होंने कहा कि इस मामले में कांग्रेस सुप्रीम कोर्ट भी गई है और उसकी याचिका लंबित है। मतदाता सूचियों से बड़ी संख्या में लोगों के नाम हटाए जाने की शिकायतें सामने आई हैं। उन्होंने लगभग 13 करोड़ मतदाताओं के नाम काटे जाने का आरोप लगाया और कहा कि कुछ मामलों में नामों में गड़बड़ी के कारण मतदाताओं को वोट डालने में परेशानी हो सकती है। उन्होंने करीब 13 हजार मतदाताओं से जुड़ी ऐसी ही एक शिकायत का भी जिक्र किया।

शर्मा ने कहा कि किसी नागरिक का वोट भाजपा को जाना है या किसी अन्य पार्टी को, यह उसका अपना निर्णय होना चाहिए, लेकिन उसका नाम मतदाता सूची से नहीं हटना चाहिए। उन्होंने व्यापारियों और दूसरे वर्गों से कांग्रेस के अभियान का समर्थन करने की अपील की। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी, कांग्रेस और इंडिया ब्लॉक मताधिकार की रक्षा के लिए संघर्ष कर रहे हैं। उन्होंने नागरिकों के अभिव्यक्ति के अधिकार पर भी चिंता जताई और कहा कि लोकतंत्र तथा व्यापार एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं।

भारतीय सेना को निशाना बनाने वाले कथित एआई-जनित वीडियो पर रविंदर शर्मा ने कहा कि यदि कोई फर्जी वीडियो सामने आता है तो सरकार को तुरंत उसका खंडन करना चाहिए। सरकार कई बार शुरुआती प्रतिक्रिया देने के बजाय चुप रहती है, जबकि उसके पास ऐसी सामग्री की सच्चाई स्पष्ट करने के लिए पर्याप्त व्यवस्था है। आम नागरिक के लिए हर बार यह पहचानना संभव नहीं होता कि कौन सा वीडियो वास्तविक है या कौन सा वीडियो एआई की मदद से बनाया गया है। ऐसे में सरकार की जिम्मेदारी है कि वह लोगों को सही जानकारी दे और उन्हें भ्रामक सामग्री पर विश्वास करने से रोके। किसी वीडियो का सार्वजनिक रूप से साझा होना अपने आप में इस बात का प्रमाण नहीं है कि उसे कांग्रेस ने बनाया है।

उन्होंने अरुणाचल प्रदेश और लद्दाख से जुड़े सुरक्षा संबंधी मुद्दों का उल्लेख करते हुए कहा कि चीन की गतिविधियों को लेकर लोगों की चिंताएं रही हैं। शर्मा ने गलवान में भारतीय जवानों की शहादत और सीमा से जुड़े विवादों का हवाला दिया और कहा कि सरकार को सीमाओं की सुरक्षा पर ध्यान देना चाहिए। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि राष्ट्रीय सुरक्षा के मामलों में सरकार को सतर्क रहना चाहिए और किसी भी संदिग्ध वीडियो पर समय रहते स्पष्ट जानकारी देनी चाहिए।

नेशनल कॉन्फ्रेंस में कैबिनेट विस्तार को लेकर असंतोष के सवाल पर शर्मा ने भाजपा पर जम्मू-कश्मीर की राजनीतिक व्यवस्था को कमजोर करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि विधानसभा में 90 सीटें हैं, लेकिन जम्मू-कश्मीर का राज्य का दर्जा बहाल नहीं किया गया है। केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में राज्य का दर्जा बहाल करने को लेकर प्रतिबद्धता जताई थी और विधानसभा चुनाव भी कराए गए, लेकिन राज्य का दर्जा बहाल करने का वादा अब तक पूरा नहीं हुआ। भाजपा चुनी हुई सरकार को पर्याप्त अधिकार देने के बजाय प्रशासनिक फैसलों पर नियंत्रण बनाए रखना चाहती है। सरकार के पास बहुमत है और कांग्रेस बाहर से उसका समर्थन कर रही है। उन्होंने यह भी दावा किया कि चुनाव से पहले गठबंधन होने के कारण कांग्रेस को कैबिनेट में शामिल होने का प्रस्ताव मिला था, लेकिन पार्टी ने भाजपा को बेनकाब करने के उद्देश्य से सरकार में शामिल नहीं होने का फैसला किया।

शर्मा ने कहा कि कांग्रेस चाहती तो मंत्रिमंडल का हिस्सा बन सकती थी, लेकिन उसने जम्मू-कश्मीर के लोगों के हितों को प्राथमिकता दी। भाजपा की कोशिश है कि मंत्रियों की संख्या सीमित रहे और सरकार के भीतर असंतोष पैदा हो। चुनी हुई सरकार के सामने लगातार ऐसी परिस्थितियां बनाई जा रही हैं, जिनसे उसके कामकाज पर असर पड़े।

कांग्रेस प्रवक्ता ने कहा कि नेशनल कॉन्फ्रेंस और कांग्रेस दोनों की मांग रही हैं कि जम्मू-कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा वापस मिले। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री और केंद्रीय गृह मंत्री की ओर से इस संबंध में वादे किए गए थे तथा सुप्रीम कोर्ट में भी राज्य का दर्जा जल्द बहाल करने की प्रतिबद्धता जताई गई थी। चुनाव कराने की प्रक्रिया पूरी हुई, लेकिन राज्य का दर्जा बहाल करने का दूसरा महत्वपूर्ण कदम अब भी बाकी है। शर्मा ने कहा कि लोगों ने चुनाव में अपना जनादेश दिया है और अब सरकार को स्वतंत्र रूप से काम करने का अवसर मिलना चाहिए।

--आईएएनएस

पीएसके/डीकेपी