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चिंपैंजियों के समूह में बढ़ा संघर्ष, वैज्ञानिकों ने जताई चिंता

 

वन्यजीवों के व्यवहार पर चल रहे एक अध्ययन में वैज्ञानिकों ने चिंपैंजियों के एक बड़े समूह में गंभीर बदलावों की ओर इशारा किया है। रिपोर्ट के अनुसार, यह मामला Chimpanzee से जुड़ा है, जिनके सामाजिक व्यवहार और समूह संरचना में पिछले कुछ वर्षों में लगातार गिरावट देखी जा रही है।

वैज्ञानिकों के मुताबिक, वर्ष 2018 के बाद इस समूह में आंतरिक तनाव और विभाजन की स्थिति बढ़ती गई। पहले यह समूह 200 से अधिक चिंपैंजियों का एक बड़ा सामाजिक ढांचा था, लेकिन समय के साथ यह छोटे-छोटे हिस्सों में बंटने लगा। इसके बाद आपसी संबंधों में दूरी और तनाव स्पष्ट रूप से बढ़ता गया।

अध्ययन में यह भी सामने आया है कि समूह के भीतर बढ़ते मतभेद धीरे-धीरे संघर्ष में बदल गए, जो कई बार हिंसक घटनाओं तक पहुंच गए। शोधकर्ताओं का कहना है कि चिंपैंजियों में इस तरह का सामाजिक विघटन उनके प्राकृतिक व्यवहार, संसाधनों की प्रतिस्पर्धा और नेतृत्व संघर्ष से जुड़ा हो सकता है।

विशेषज्ञों के अनुसार, चिंपैंजियों के समूहों में अक्सर शक्ति संतुलन और क्षेत्र को लेकर संघर्ष देखने को मिलता है, लेकिन इस स्तर का लगातार बढ़ता तनाव असामान्य माना जा रहा है। इससे न केवल उनके सामाजिक ढांचे पर असर पड़ता है, बल्कि उनकी प्रजनन और अस्तित्व संबंधी स्थिति भी प्रभावित हो सकती है।

वन्यजीव वैज्ञानिकों का यह भी कहना है कि ऐसे मामलों का अध्ययन इंसानों और अन्य प्राइमेट्स के सामाजिक व्यवहार को समझने में भी मदद करता है, क्योंकि चिंपैंजियों की सामाजिक संरचना काफी हद तक मानव समाज से मिलती-जुलती मानी जाती है।

फिलहाल यह शोध अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बना हुआ है और वैज्ञानिक इस समूह के व्यवहार पर लगातार नजर बनाए हुए हैं, ताकि भविष्य में ऐसे संघर्षों के कारणों को बेहतर तरीके से समझा जा सके।