कोयंबटूर विदेश नौकरी घोटाले में पांच आरोपियों को अदालत ने सुनाई कठोर कारावास की सजा
कोयंबटूर, 28 मार्च (आईएएनएस)। कोयंबटूर के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने 26 मार्च 2026 को पांच निजी व्यक्तियों, पुलियिल चेरियन (फर्म के प्रबंध निदेशक), फ्रांसिस अरुण, आशा शार्लेट और संतोष विलियम को दोषी ठहराया और उन्हें 14 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है, और 54 लाख रुपए का जुर्माना भी लगाया है।
प्रीथा कुमारी को भी कोयंबटूर विदेश नौकरी घोटाले में 4 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाने के साथ 2 लाख रुपए का जुर्माना भी लगाया है। अदालत ने उनकी संपत्तियों को जब्त करने का आदेश दिया और जांच के दौरान जब्त किए गए 448 ग्राम सोने के आभूषणों को पीड़ितों को मुआवजे के रूप में देने के लिए बेचने का आदेश दिया।
कोयंबटूर शहर के कट्टूर पुलिस द्वारा शुरू में दर्ज किया गया यह मामला मद्रास हाईकोर्ट के आदेश पर 2011 में सीबीआई को सौंप दिया गया था। इसके बाद, सीबीआई ने 18 मार्च 2011 को आठ आरोपियों के खिलाफ उपरोक्त मामला दर्ज किया और उन्हें मुंबई में गिरफ्तार किया गया। आरोप है कि इस गिरोह ने 2005 में गांधीपुरम में यानबो एसोसिएट्स नामक एक फर्म शुरू की थी।
यह भी आरोप है कि आरोपियों ने जाली विदेशी रोजगार परमिट प्रस्तुत किए और 2005 के दौरान प्रति व्यक्ति 80,000 रुपए से लेकर 3 लाख रुपए तक की फीस वसूल की। उन्होंने मुख्य रूप से युवा पेशेवरों और मजदूरों को यूनाइटेड किंगडम और साइप्रस में उच्च वेतन वाली नौकरियों का वादा करके लुभाया।
जांच के बाद सीबीआई ने 21 मार्च 2012 को आरोपियों के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किया। न्यायालय ने मुकदमे की सुनवाई के बाद उपरोक्त आरोपियों को दोषी ठहराया और तदनुसार सजा सुनाई।
मुकदमे की सुनवाई के दौरान आरोपी नारायणन रमेश बाबू, वीएन शाइन और बेंजामिन विलियम सॉवर की मृत्यु हो गई, और उनके खिलाफ आरोप समाप्त कर दिए गए।
--आईएएनएस
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